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Home› Pashudhan› New Law To Crack Down On Spurious Seeds Shivraj Says 70 Of Seeds Fall Outside The Legal Ambit

नकली बीजों पर नकेल के लिए नया कानून आएगा : शिवराज बोले- 70% बीज कानून के दायरे से बाहर, किसानों को ये भरोसा...

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Sun, 11 Oct 2026 07:47 PM IST
सार

  • नकली और घटिया बीजों पर लगाम लगाने के लिए नया बीज कानून लाने की तैयारी में केंद्र सरकार।
  • कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 20 से अधिक किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ की बैठक।
  • सरकार के अनुसार, करीब 70% बीज मौजूदा कानून के दायरे से बाहर हैं, नए बिल में बीजों की पहचान के लिए ट्रैकिंग व्यवस्था होगी।
  • किसानों को पारंपरिक बीजों के इस्तेमाल, आपसी लेन-देन और बिक्री की स्वतंत्रता देने का प्रस्ताव।

सरकार नए बीज कानून की तैयारी में, शिवराज सिंह चौहान ने किसान संगठनों के साथ की बैठक।
सरकार नए बीज कानून की तैयारी में, शिवराज सिंह चौहान ने किसान संगठनों के साथ की बैठक। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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नकली और घटिया बीजों पर नकेल कसने के मकसद से केंद्र सरकार नया बीज कानून लाने की तैयारी में है। इस कड़ी में नई दिल्ली के कृषि भवन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने  शनिवार को 20 से अधिक किसान संगठनों के नेताओं के साथ एक बैठक की।

70% बीज अभी भी नियम के दायरे से बाहर
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बैठक में साफ किया कि हमारा वर्तमान बीज अधिनियम साल 1966 में बना था और बीज नियंत्रण आदेश 1983 में लागू हुआ था। सरकार का मानना है कि समय के साथ परिस्थितियों में बहुत बदलाव आया है और पुराना कानून अब समय के अनुकूल नहीं रहा है। कृषि मंत्री ने चिंता जताते हुए कहा कि आज भी करीब 70 प्रतिशत बीज मौजूदा कानून के दायरे से बाहर हैं।

पुराने कानून में खराब बीज बनाने वालों की जिम्मेदारी तय करने और सजा देने की व्यवस्था बहुत प्रभावी नहीं है, जिसके कारण बाजार में नकली बीज आसानी से पहुंच जाते हैं। केंद्रीय मंत्री के अनुसार, नए बिल में एक बीज को ट्रैक करने की व्यवस्था होगी, जिससे किसान असली और सही बीज की पहचान बहुत आसानी से कर सकेंगे।

किसानों के अधिकारों और पारंपरिक बीजों की पूरी गारंटी
किसानों के मन में उठने वाली चिंताओं को लेकर कृषि मंत्री ने कहा कि इस नए कानून से किसानों के अधिकारों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सरकार के अनुसार, किसान अपने पारंपरिक बीजों का उपयोग करने, आपस में उनका लेन-देन करने और उन्हें बेचने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र रहेंगे।

किसानों के लिए किसी भी तरह का डिजिटल या अनिवार्य पंजीकरण लागू नहीं होगा। अगर किसान खुद के उपयोग, गांव में बांटने या किसी कंपनी के लिए भी बीज का उत्पादन करता है, तो उसे रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत नहीं है। हालांकि, अगर कोई किसान अपनी मर्जी से अपनी किसी खास किस्म का पंजीकरण कराना चाहे, तो उसके लिए सुविधा उपलब्ध होगी।

कानून बनाने में नहीं होगी जल्दबाजी, हर सुझाव पर होगा गंभीरता से विचार
कृषि मंत्री के मुताबिक, सरकार इस नए एक्ट को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं कर रही है और न ही इसके लिए कोई समय-सीमा (डेडलाइन) तय की गई है। उन्होंने बताया कि नवंबर-दिसंबर 2025 में इस बिल के मसौदे पर सार्वजनिक सुझाव मांगे गए थे, जिस पर किसानों और संगठनों की तरफ से लगभग 18,000 सुझाव मिले थे। सरकार ने कहा है कि कोई भी व्यक्तिगत किसान हो या कोई संगठन, अगर वे सुझाव देना चाहते हैं तो उनके सुझावों का स्वागत है।

नए प्रस्तावित कानून में अपराधों और सजा को तीन अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है। सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, छोटी गलतियों के लिए पहली बार में सिर्फ चेतावनी दी जाएगी, जबकि दूसरी बार गलती करने पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।


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