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किसानों के लिए कमाई का नया मौका : खेत में उगाएं हरा चारा, ₹3 किलो तक खरीदेंगी गौशालाएं

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Wed, 04 Nov 2026 04:31 PM IST
सार

यूपी की हरा चारा नीति के तहत किसान खेतों में चारा उगाकर गौशालाओं को 3 रुपये प्रति किलो तक में बेच सकेंगे। जानें अनुबंध, भुगतान और आजमगढ़ में खेती के लक्ष्य की पूरी जानकारी।

गायों को हरा चारा खिलाया जाता है।
गायों को हरा चारा खिलाया जाता है। - फोटो : सोशल मीडिया
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अगर आप खेती के साथ पशुपालन भी करते हैं या अतिरिक्त आमदनी का जरिया तलाश रहे हैं तो हरे चारे की खेती आपके लिए फायदेमंद हो सकती है। उत्तर प्रदेश सरकार की हरा चारा नीति के तहत किसान अपने खेतों में चारा उगाकर सीधे गौशालाओं को बेच सकते हैं। इसके बदले उन्हें 2.50 से 3 रुपये प्रति किलो तक भुगतान मिलेगा। खास बात यह है कि चारा बेचने के लिए किसानों को किसी बिचौलिए की जरूरत नहीं होगी और भुगतान सीधे उनके बैंक खाते में किया जाएगा।

पशुपालन विभाग किसानों को हरे चारे की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। इसका उद्देश्य गौशालाओं में गोवंशों को सालभर ताजा हरा चारा उपलब्ध कराना और किसानों के लिए आमदनी का अतिरिक्त स्रोत तैयार करना है।

2025 से 2028 तक लागू है हरा चारा नीति
उत्तर प्रदेश सरकार ने गौशालाओं में चारे की उपलब्धता बढ़ाने और किसानों को इससे जोड़ने के लिए हरा चारा नीति लागू की है। यह नीति वर्ष 2025 से 2028 तक प्रभावी रहेगी। इसके तहत किसान अपने गांव या आसपास की गौशालाओं की जरूरत के अनुसार हरे चारे का उत्पादन कर सकेंगे। इस व्यवस्था से दोहरा फायदा होगा। एक ओर गौशालाओं को नियमित रूप से ताजा चारा मिलेगा, वहीं दूसरी ओर किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बाजार तलाशने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

कैसे बेच सकेंगे गौशालाओं को हरा चारा?
इस योजना के तहत किसान और गौशाला के बीच हरे चारे की आपूर्ति के लिए अनुबंध किया जाएगा। इसकी व्यवस्था ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव की देखरेख में होगी। किसानों को 100 रुपये के स्टांप पेपर पर कम से कम एक साल का अनुबंध करना होगा। इसके बाद वे सालभर में अलग-अलग मौसम में तैयार होने वाले हरे चारे की आपूर्ति संबंधित गौशाला को कर सकेंगे।

किसानों के लिए जरूरी बातें
  • अनुबंध : 100 रुपये के स्टांप पेपर पर समझौता करना होगा।
  • समय अवधि : कम से कम एक साल का अनुबंध होगा।
  • खरीददार : गांव या नजदीकी क्षेत्र की गौशालाएं।
  • कीमत : हरे चारे के लिए 2.50 से 3 रुपये प्रति किलो तक दर।
  • भुगतान : चारा खरीदने के बाद राशि सीधे किसान के बैंक खाते में भेजी जाएगी।
  • देखरेख : ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव की भूमिका रहेगी।

खेती शुरू करने से पहले किसान इन बातों का रखें ध्यान
हरे चारे की खेती करने से पहले किसानों को कुछ जरूरी जानकारियां जुटा लेनी चाहिए-
  • नजदीकी गौशाला का पता करें : अपने गांव या आसपास की गौशाला में संपर्क कर चारे की जरूरत जानें।
  • अनुबंध की जानकारी लें : ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव या पशुपालन विभाग से अनुबंध की प्रक्रिया समझें।
  • चारे की किस्म चुनें : मौसम और जमीन के अनुसार उपयुक्त हरे चारे की फसल का चयन कृषि विशेषज्ञ की सलाह से करें।
  • आपूर्ति की शर्तें जानें : चारे की गुणवत्ता, मात्रा, तुड़ाई और आपूर्ति की समय-सीमा पहले स्पष्ट कर लें।
  • भुगतान की पुष्टि करें : अनुबंध में खरीद दर और बैंक खाते में भुगतान की शर्तें जरूर दर्ज कराएं।

किसानों के लिए क्यों है यह मौका?
हरे चारे की खेती से किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए मंडी या निजी खरीदारों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। गौशालाओं के साथ पहले से तय अनुबंध होने पर चारे की बिक्री का रास्ता आसान हो सकता है। हालांकि, खेती शुरू करने से पहले स्थानीय स्तर पर योजना की उपलब्धता, खरीद की शर्तें और भुगतान की प्रक्रिया की पुष्टि जरूर कर लें।
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