पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों को आधुनिक तकनीक, बाजार और खेती की जमीनी चुनौतियों से जुड़ी जानकारी देने के उद्देश्य से गुरुवार को मेरठ में किसान कारवां 2.0 की क्षेत्रीय किसान महासभा आयोजित की गई। आईआईएमटी विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में उत्तर प्रदेश सरकार और 'किसान तक' के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह जादूगर सलमान की कृषि आधारित प्रस्तुति के साथ हुई, जिसके बाद विशेषज्ञों और किसानों ने गन्ना, बासमती धान, फसल सुरक्षा, प्राकृतिक खेती और कृषि तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की।
बासमती के निर्यात और हापुड़ को हब बनाने पर चर्चा
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बासमती धान की महत्ता को देखते हुए 'बासमती के बादशाह-खुशबू से बाजार तक' विषय पर विशेष चर्चा आयोजित की गई। इस सत्र में बीईडीएफ के निदेशक डॉ. रितेश शर्मा और प्रगतिशील किसानों ने हिस्सा लिया। चर्चा के दौरान किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने, सप्लाई चेन को मजबूत करने और किसानों को सीधे निर्यात से जोड़ने पर जोर दिया गया। इसके साथ ही, हापुड़ जिले को बासमती निर्यात और बेहतर बाजार पहुंच के लिए एक मॉडल हब के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।
गन्ना भुगतान, रोग प्रबंधन और आधुनिक तकनीक
पश्चिमी यूपी की मुख्य फसल गन्ने पर केंद्रित सत्र में भुगतान व्यवस्था को सुधारने, लाल सड़न जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव और रोग प्रतिरोधी नई किस्मों को किसानों तक पहुंचाने पर मंथन हुआ। इसके अलावा, मशीनों के जरिए गन्ने की सूखी पत्तियों के बेहतर प्रबंधन पर भी बात की गई।
वहीं, फसल सुरक्षा से जुड़े एक अन्य सत्र में कृषि विशेषज्ञों और अधिकारियों ने फसल बीमा की पहुंच बढ़ाने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के साथ-साथ सोलर पंप, ड्रोन और नैनो यूरिया जैसी आधुनिक तकनीकों को किसानों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के उपायों पर चर्चा की।
10 किसानों को कृषिवीर सम्मान और किसान परिषद का गठन
कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले पश्चिमी यूपी के 10 किसानों को कृषिवीर सम्मान से नवाजा गया। सम्मानित होने वालों में मंजू कश्यप, ओमवीर सिंह, प्रीतम सिंह, विनोद सैनी, नीलम त्यागी, नीरजा शर्मा, श्याम सिंह, ठाकुर धर्मपाल, जुनैद फरीदी अली और विनोद पवार शामिल रहे, जिन्हें प्रशस्ति पत्र और ट्रॉफी दी गई।
किसानों की समस्याओं और जमीनी जरूरतों को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों, अधिकारियों और प्रगतिशील किसानों को मिलाकर एक 20 सदस्यीय किसान परिषद का भी गठन किया गया। इसके अलावा, खेती-किसानी की जानकारी से जुड़ी क्विज प्रतियोगिता में भाग लेने वाले 15 किसानों को एक-एक हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया गया।