धान की कटाई का सीजन शुरू होने वाला है। ऐसे में हरियाणा और पंजाब सरकार ने पराली जलाने की समस्या से निपटने की तैयारियां शुरू कर दी है। हरियाणा सरकार ने प्रदेश में जिला और ब्लॉक स्तर पर एक खास पराली संरक्षण बल की तैनाती करने की योजना बनाई है। यह बल पराली जलाने की घटनाओं पर कड़ी नजर रखेगी। दूसरी ओर पराली जलाने के बजाय मशीन से प्रबंधन करने वाले किसानों को प्रति एकड़ 1,200 रुपये के हिसाब से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। वहीं, पंजाब ने पराली प्रबंधन को बढ़ावा देने के मकसद से मशीनों की खरीद पर करोड़ों रुपये की सब्सिडी जारी की है।
हरियाणा में सख्ती और पराली न जलाने पर इनाम
प्रदेश सरकार की कार्ययोजना के अनुसार, पराली जलाने की पुष्टि होने पर हर मामले में तीन सख्त कदम उठाए जाएंगे। इनमें किसान पर एफआईआर (FIR) दर्ज करना, चालान काटना और उसकी जमीन के रिकॉर्ड में 'रेड एंट्री' (लाल निशान) करना शामिल है। इसके अलावा, नियम तोड़ने वालों से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के एवज में उचित मुआवजा भी वसूला जाएगा। सरकार किसानों को पराली जलाने के बजाय अन्य विकल्प अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इसके तहत मशीनों की खरीद पर सब्सिडी देने के साथ ही उनके सही उपयोग के लिए 1,200 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।
अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वे कटाई के समय के अनुसार जिलों और पड़ोसी राज्यों के बीच बेलर (पराली की गांठ बनाने वाली मशीन) और अन्य मशीनों की आवाजाही सुनिश्चित करें। कटाई का काम सितंबर में यमुनानगर, अंबाला, करनाल और कुरुक्षेत्र से शुरू होकर अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में सिरसा, फतेहाबाद, हिसार और जींद तक पहुंचेगा। इसके लिए पंचायत और सरकारी जमीन पर पराली की गांठों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था की जा रही है।
निगरानी के लिए नोडल अधिकारी और ड्रोन का इस्तेमाल
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के निर्देशों के तहत, राज्य में पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखने के लिए ड्रोन तैनात किए जा रहे हैं। कृषि विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजेंद्र कुमार के अनुसार, कुछ किसान उपग्रह (सैटेलाइट) की नजर से बचने के लिए देर शाम या रात के अंधेरे में पराली जलाते हैं, इसलिए शाम के समय गश्त तेज कर दी गई है। कृषि निदेशक अमित खत्री ने बताया कि खेतों की निगरानी के लिए 8,134 गांव स्तरीय नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। हरियाणा के 5,600 गांवों में लगभग 6,21,285 पंजीकृत धान किसान हैं। एक नोडल अधिकारी मोबाइल ऐप के जरिए अधिकतम 100 किसानों (संवेदनशील गांवों में 50) पर नजर रखेगा और आग लगने की घटनाओं की तुरंत रिपोर्ट करेगा। सरकार ने किसानों को जागरूक करने के लिए बड़े पैमाने पर गांव-गांव कैंप भी लगाए हैं।
पंजाब में मशीनों पर सब्सिडी और खाद का पर्याप्त स्टॉक
पड़ोसी राज्य पंजाब में भी पराली प्रबंधन पर पूरा जोर दिया जा रहा है। पंजाब के कृषि और किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुडियां के अनुसार, चालू खरीफ सीजन में किसानों ने अब तक 16,227 फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें खरीदी हैं। इसके लिए पंजाब सरकार ने 10,000 से अधिक मशीनों की खरीद पर 183 करोड़ रुपये की सब्सिडी जारी की है। राज्य सरकार व्यक्तिगत किसानों को 50 प्रतिशत और सहकारी समितियों व पंचायतों को 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी दे रही है। सरकार के अनुसार, 2026-27 के लिए 576 करोड़ रुपये की कार्ययोजना के कारण पंजाब में पराली जलाने के मामलों में 90 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। यह आंकड़ा 2022 में 49,922 था, जो 2025 में घटकर मात्र 5,114 रह गया है।
पराली के अलावा, रबी सीजन के लिए पंजाब में खाद का भी पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। अधिकारियों ने बताया कि राज्य में 3.92 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 5 लाख मीट्रिक टन डीएपी (DAP) उपलब्ध है। कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे पूरे राज्य में खाद की सुचारू उपलब्धता सुनिश्चित करें। साथ ही, किसानों से अपील की गई है कि वे डीएपी पर अपनी निर्भरता कम करें और मिट्टी की सेहत बनाए रखने के लिए टीएसपी, एनपीके और एसएसपी जैसे अन्य उर्वरकों का संतुलित उपयोग करें।