जम्मू-कश्मीर सरकार राज्य में मुर्गी पालन (पोल्ट्री) उद्योग को तेजी से बढ़ाने की योजना बना रही है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपने बजट भाषण में बड़े पैमाने पर नई पोल्ट्री इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। हालांकि, पोल्ट्री उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि नई इकाइयां लगाने से पहले सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन व्यावसायिक पोल्ट्री फार्मों को बंद होने से बचाना है, जो पहले से मौजूद हैं।
सरकार की विस्तार योजना और अंडों के उत्पादन का लक्ष्य
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने फरवरी के अपने बजट भाषण में घोषणा की थी कि राज्य में 800 नई व्यावसायिक (कमर्शियल) पोल्ट्री इकाइयां और 50,000 घरेलू (बैकयार्ड) पोल्ट्री इकाइयां स्थापित की जाएंगी। सरकार के अनुसार, इस योजना का मुख्य उद्देश्य लगभग 25 करोड़ (250 मिलियन) अंडों का उत्पादन करना और बाहरी राज्यों से आने वाली आपूर्ति पर निर्भरता को कम करना है। हालांकि, यह महत्वकांक्षी योजना ऐसे मुश्किल समय में आई है, जब किसानों का कहना है कि उनके कई फार्म या तो बंद हो गए हैं या भारी आर्थिक दबाव में काम कर रहे हैं।
2019 के बाद बदली स्थिति और सुरक्षा शुल्क हटने का असर
पोल्ट्री उद्योग के प्रतिनिधियों का कहना है कि 2019 से पहले राज्य का यह क्षेत्र काफी हद तक आत्मनिर्भर हो गया था और राज्य की लगभग 85 प्रतिशत खपत स्थानीय उत्पादन से ही पूरी हो रही थी। उस समय सरकार बाहरी राज्यों से आने वाले मुर्गों पर लगभग 9 रुपये प्रति किलो का शुल्क लगाती थी। किसानों के अनुसार, इससे उन्हें अन्य राज्यों के बड़े उत्पादकों के मुकाबले बाजार में सुरक्षा मिलती थी। लेकिन बाद में इस शुल्क को हटा दिया गया, जिससे स्थानीय किसानों को बाहरी बाजारों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।
कश्मीर वैली पोल्ट्री फार्मर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गुलाम मोहम्मद भट ने बताया, "जब सरकार ने यह सुरक्षा हटा दी, तो अन्य राज्यों से सस्ता माल बाजार में आने लगा। इसकी वजह से स्थानीय स्तर पर उत्पादित मुर्गों की मांग कम हो गई है।"
1,500 करोड़ रुपये के उद्योग पर दोहरा दबाव
वर्तमान में 1,500 करोड़ रुपये का यह पोल्ट्री उद्योग बढ़ती बाहरी प्रतिस्पर्धा और सरकार की नई विस्तार नीति के बीच फंसा हुआ है। किसानों का कहना है कि उन्हें दाना (फीड), परिवहन और मजदूरी जैसी लागतों का पूरा खर्च उठाना पड़ रहा है, जबकि सस्ते बाहरी माल के कारण उनका मुनाफा लगातार घट रहा है।
सरकार द्वारा 50,000 घरेलू इकाइयां लगाने की योजना ग्रामीण स्तर पर उत्पादन बढ़ाने का एक बड़ा कदम है। उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि इससे ग्रामीण आय में वृद्धि हो सकती है, लेकिन जो व्यावसायिक फार्म पहले से बने हुए हैं और जिनके पास बुनियादी ढांचा मौजूद है, उन्हें भी बाजार में टिके रहने के लिए सरकारी सहयोग की आवश्यकता है।
पुरानी इकाइयों को बचाने की मांग
किसानों के लिए यह एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है कि एक तरफ पुरानी इकाइयां बंद हो रही हैं और दूसरी तरफ सरकार नई क्षमताएं बढ़ा रही है। कश्मीर वैली पोल्ट्री फार्मर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गुलाम मोहम्मद भट ने कहा कि सरकार को नई इकाइयां बनाने से पहले मौजूदा फार्मों को घाटे से उबारने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने बताया कि किसानों ने कई बार सरकार के ध्यान में यह बात लाई है, लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला है।