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खेती में मशीनों को बढ़ावा दे रही सरकार : मशीनें खरीदने पर बंपर सब्सिडी, किराये पर भी उपलब्ध हो रहे कृषि यंत्र

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Umashankar Mishra Updated Thu, 09 Jul 2026 07:25 PM IST
सार

कृषि यांत्रिकीकरण पर सब-मिशन (SMAM) के तहत किसान कृषि मशीनों पर सब्सिडी, किराये पर मशीनें, ड्रोन सेवाएं और कस्टम हायरिंग सेंटर जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं। यह योजना खेती की लागत घटाने, समय बचाने और उत्पादकता बढ़ाने के साथ छोटे एवं सीमांत किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ रही है।

छोटे किसानों के लिए आधुनिक कृषि यंत्रों तक पहुंच हुई आसान।
छोटे किसानों के लिए आधुनिक कृषि यंत्रों तक पहुंच हुई आसान। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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खेती में समय पर बुआई, सिंचाई, निराई-गुड़ाई, दवा का छिड़काव और कटाई सबसे बड़ी चुनौती होती है। मजदूरों की कमी और बढ़ती लागत के बीच कृषि यांत्रिकीकरण किसानों के लिए बड़ा सहारा बनकर उभरा है। केंद्र सरकार वर्ष 2014-15 से कृषि यांत्रिकीकरण पर सब-मिशन (SMAM) चला रही है। इस योजना का मकसद छोटे, सीमांत और महिला किसानों सहित उन क्षेत्रों तक आधुनिक कृषि मशीनें पहुंचाना है, जहां अभी मशीनीकरण का स्तर कम है। 

अब तक इस योजना के तहत 9,404.47 करोड़ रुपये की सहायता से 21.61 लाख कृषि मशीनें किसानों तक पहुंचाई जा चुकी हैं, जिससे खेती अधिक तेज, सटीक और कम लागत वाली बनी है।

मशीन खरीदने पर सब्सिडी, किराये पर भी कृषि यंत्र
हर किसान महंगे कृषि यंत्र नहीं खरीद सकता। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार मशीनों की खरीद पर प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से आर्थिक सहायता देती है। सामान्य श्रेणी के किसानों को मशीन की लागत का 40 प्रतिशत, जबकि छोटे, सीमांत, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा पूर्वोत्तर राज्यों के किसानों को 50 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलती है।

जिन किसानों के लिए मशीन खरीदना संभव नहीं है, वे कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) से ट्रैक्टर, सीड ड्रिल, रीपर, हैप्पी सीडर, रोटावेटर, प्लांटर और अन्य आधुनिक कृषि यंत्र किराये पर लेकर खेती कर सकते हैं। इससे मशीन खरीदने का भारी खर्च बचता है और खेती समय पर पूरी हो जाती है।

ड्रोन तकनीक से खेती होगी और भी स्मार्ट
अब खेती केवल ट्रैक्टर और हार्वेस्टर तक सीमित नहीं रही है। सरकार किसान ड्रोन को भी तेजी से बढ़ावा दे रही है। वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच आईसीएआर, कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि विश्वविद्यालयों ने 40,918 हेक्टेयर क्षेत्र में 40,928 ड्रोन प्रदर्शन आयोजित किए हैं। 

ड्रोन के जरिए उर्वरक, सूक्ष्म पोषक तत्व और फसल सुरक्षा रसायनों का सटीक एवं समान छिड़काव किया जा सकता है, जिससे समय, पानी और दवा तीनों की बचत होती है। पात्र संस्थानों को प्रति ड्रोन 10 लाख रुपये तक 100 प्रतिशत सहायता, जबकि एफपीओ को ड्रोन खरीदने पर 75 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है। सेवा प्रदाताओं को ड्रोन संचालन के लिए 6,000 रुपये प्रति हेक्टेयर तक आकस्मिक सहायता भी उपलब्ध है।

महिला किसानों और एफपीओ को भी विशेष लाभ
यह योजना केवल व्यक्तिगत किसानों तक सीमित नहीं है। महिला किसानों के लिए कुल बजट का 30 प्रतिशत हिस्सा आरक्षित रखा गया है, ताकि वे आधुनिक कृषि तकनीकों से जुड़ सकें। किसान उत्पादक संगठन (FPO), स्वयं सहायता समूह (SHG) और ग्रामीण उद्यमी भी इस योजना के तहत मशीनें खरीदने और सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए सहायता प्राप्त कर सकते हैं। 

सरकार फार्म मशीनरी बैंक (FMB) स्थापित करने के लिए 80 प्रतिशत तक तथा कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने के लिए परियोजना लागत का 40 प्रतिशत (250 लाख रुपये तक की परियोजना) सहायता देती है। इससे गांवों में कृषि मशीनें आसानी से उपलब्ध हो रही हैं।

कम लागत, ज्यादा उत्पादन और बेहतर कमाई का रास्ता
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर कृषि कार्य पूरे होने से उपज बढ़ती है और उत्पादन लागत घटती है। आधुनिक मशीनों के उपयोग से श्रम पर निर्भरता कम होती है, फसल की गुणवत्ता बेहतर रहती है और कटाई के बाद होने वाले नुकसान में भी कमी आती है। 

सरकार का विशेष ध्यान उन राज्यों और क्षेत्रों पर है, जहां अभी कृषि मशीनीकरण का स्तर कम है। यदि किसान इस योजना का लाभ उठाकर मशीनों, कस्टम हायरिंग सेंटर और ड्रोन सेवाओं का उपयोग करें, तो कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करना आसान हो सकता है।
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