खेती की बढ़ती लागत और कामगारों की कमी के बीच पंजाब कृषि विश्वविद्यालय मक्के (Maize) की कटाई करने वाली नई मशीन को परख रहा है। कॉर्न कॉब कलेक्टर नाम का यह यंत्र ट्रैक्टर से जुड़ कर काम करता है।
भुट्टे और डंठल अलग-अलग जमा होंगे
इस मशीन के काम करने के तरीके को देखने के लिए एक फील्ड ट्रायल का आयोजन किया गया। प्रदर्शन के दौरान सामने आया कि यह मशीन खेत ेस मक्के के भुट्टों को आसानी से बाल्टी जैसे कंटनेर में डालती है और मक्के के डंठल को अलग से जमा करती है। शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि एक घंटे में यह मशीन 0.30 एकड़ से 0.35 एकड़ में कटाई का काम पूरा कर सकती है।
किसानों के समय और पैसे दोनों की होगी बचत
विश्वविद्यालय के अधिकारियों का कहना है कि खेती में यंत्रों का उपयोग करने से उपज बढ़ने के साथ मजदूरों पर निर्भरता और खेती की लागत कम होती है। ऐसी नए यंत्र मक्का किसानों के लिए काफी लाभकारी साबित हो सकते हैं, क्योंकि इनके तहत
समय की काफी बचत होगी और कटाई काम भी रफ्तार से होगा।
मक्की की ओर किसानों का बढ़ता रुझान
बीते सालों में मक्का औद्योगिक क्षेत्र के लिए कच्चा माल बनकर उभरा है, खासतौर से अनाज आधारित इथेनॉल में मक्के की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। आगामी समय में भी इथेनॉल कारखानों में मक्के की मांग बने रहने आसार दिखाई देते हैं, जिस वजह से आने वाले समय में मक्के की खेती में यंत्रीकरण की मांग बढ़ा सकती है।