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हाथों से नहीं, मशीन से होगी कपास की तुड़ाई : कृषि मंत्री ने लॉन्च किया ये खास हार्वेस्टर, जानें कीमत और खासियत

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Mon, 16 Feb 2026 09:46 AM IST
सार

कपास की खेती करने वाले किसानों के लिए काम की खबर है। कपास की खेती में तुड़ाई का काम काफी मेहनत और लागत मांगता है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वैज्ञानिकों द्वारा विकसित कपास हार्वेस्टिंग मशीन (Cotton Harvesting Machine) किसानों को समर्पित की। यह मशीन कपास किसानों की लागत कम करने में मदद करेगी। आईए जानें इस खास यंत्र की कीमत और खासियत...
 

कपास हार्वेस्टिंग मशीन का जायजा लेते शिवराज सिंह चौहान।
कपास हार्वेस्टिंग मशीन का जायजा लेते शिवराज सिंह चौहान। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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कपास की खेती करने वाले किसानों के लिए काम की खबर है। कपास की खेती में तुड़ाई का काम काफी मेहनत और लागत मांगता है। भोपाल स्थित आईसीएआर-केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान के 51वें स्थापना दिवस के अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वैज्ञानिकों द्वारा विकसित कपास हार्वेस्टिंग मशीन (Cotton Harvesting Machine) किसानों को समर्पित की। यह मशीन कपास किसानों की लागत कम करने में मदद करेगी। आईए जानें इस खास यंत्र की कीमत और खासितें...

हाथों से तुड़ाई का झंझट होगा खत्म, बचेगी लागत
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अब तक किसानों को कपास की तुड़ाई पूरी तरह हाथों से करनी पड़ती थी। इस काम में समय और मेहनत संग मजदूरों पर होने वाले खर्च से फसल की लागत भी बढ़ जाती थी। किसानों की लंबे समय से मांग थी कि कोई ऐसी मशीन आए जो कपास निकालने का काम आसान कर सके। आज आईसीएआर के वैज्ञानिकों ने उस मांग को पूरा कर दिया है। यह स्वदेशी तकनीक समय बचाएगी और कपास की खेती को मुनाफे का धंधा बनाने में मदद करेगी।

कितनी है मशीन की कीमत?
किसानों के मन में सबसे बड़ा सवाल मशीन की कीमत को लेकर होता है। केंद्रीय मंत्री ने बताया है कि इस कॉटन हार्वेस्टर को बनाने में लगभग 12 लाख रुपये की लागत आई है। सभी प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद यह मशीन किसानों को लगभग 15 लाख रुपये में उपलब्ध हो जाएगी। यह मशीन किसान की पहुंच में रहेगी और उत्पादन लागत कम करने में अहम भूमिका निभाएगी। यह मशीन किसानों के लिए जल्द उपलब्ध होगी।

कैसे काम करती है यह मशीन?
शिवराज सिंह चौहान ने मशीन की कार्यप्रणाली की जानकारी देते हुए बताया कि हार्वेस्टिंग से पहले कपास के पौधों की पत्तियों पर एक खास स्प्रे किया जाता है। यह स्प्रे फसल के लिए नुकसानदायक नहीं होता, लेकिन इससे पत्तियां झड़ जाती हैं। पत्तियां हटते ही मशीन के जरिए कपास को तोड़ा जाता है।

दो मिनट में मशीन ने काफी तुड़ाई की 
कृषि  मंत्री ने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा, मैंने देखा कि मुश्किल से डेढ़ से दो मिनट के भीतर मशीन ने तुड़ाई की और काफी मात्रा में कपास टैंक में जमा हो गया। प्रथम दृष्ट्या यह प्रयोग मुझे पूरी तरह सफल लगा है। कार्यक्रम के दौरान यह भी बताया गया कि कपास का उत्पादन बढ़ाने के लिए हाई डेंसिटी यानी प्रति एकड़ ज्यादा पौधे लगाने की तकनीक और नई किस्मों पर काम हो रहा है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मशीन में अगर कुछ प्रारंभिक सुधार की जरूरत होगी, तो उसे भी पूरा किया जाएगा ताकि किसानों को एक परिपूर्ण मशीन मिल सके। सरकार का संकल्प है कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से किसानों को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाया जाए।
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