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Farmer S Great Invention A Smart Harvester Designed For Small Farms Enabling Grain And Straw Harvesting At A
किसान का बड़ा आविष्कार : छोटे खेतों के लिए तैयार किया स्मार्ट हार्वेस्टर, कम खर्च में अनाज-भूसे की कटाई...
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Devesh Saraswat
Updated Mon, 09 Feb 2026 03:29 PM IST
सार
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के पिपरहिया गांव के रहने वाले 51 वर्षीय किसान आज्ञा राम वर्मा ने अपनी सूझबूझ से एक खास स्मार्ट थ्रेश हार्वेस्टर विकसित किया है। यह छोटे और सीमांत किसानों के लिए काफी काम आ सकता है।12वीं तक शिक्षित आज्ञा राम वर्मा ने अपने 13 साल के खेती-बाड़ी के अनुभव का उपयोग इस मशीन को बनाने में किया है।
स्मार्ट थ्रेश हार्वेस्टर कम ईंधन की खपत करता है।
- फोटो : ICAR
खेती-किसानी में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के पिपरहिया गांव के रहने वाले 51 वर्षीय किसान आज्ञा राम वर्मा ने अपनी सूझबूझ से एक खास स्मार्ट थ्रेश हार्वेस्टर विकसित किया है। यह छोटे और सीमांत किसानों के लिए काफी काम आ सकता है।12वीं तक शिक्षित आज्ञा राम वर्मा ने अपने 13 साल के खेती-बाड़ी के अनुभव का उपयोग इस मशीन को बनाने में किया है।
छोटे किसानों के लिए किफायती और असरदार समाधान
आमतौर पर बड़े कंबाइन हार्वेस्टर उन खेतों में नहीं पहुंच पाते जो आकार में छोटे होते हैं या जहां रास्ता संकरा होता है। आज्ञा राम वर्मा द्वारा तैयार किया गया यह कॉम्पैक्ट हार्वेस्टर इसी कमी को पूरा करता है। यह मशीन न केवल अलग-अलग भूभागों पर कुशलता से काम करती है, बल्कि इसमें एक एकीकृत भूसा थ्रेशिंग तंत्र भी लगा है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह प्रचलित मशीनों के मुकाबले 12 से 15 प्रतिशत कम ईंधन की खपत करती है, जिससे किसानों की जेब पर बोझ कम पड़ता है।
भूसा निकालता
- फोटो : ICAR
लागत में आएगी भारी कमी, भूसे की चिंता भी होगी खत्म
इस नवाचार के आर्थिक फायदों की बात करें तो यह पारंपरिक खेती के तरीकों को पीछे छोड़ता नजर आ रहा है। जहां हाथ से कटाई (मैनुअल) कराने पर किसानों को प्रति हेक्टेयर करीब 15,000 रुपये खर्च करने पड़ते हैं, वहीं इस स्मार्ट हार्वेस्टर के इस्तेमाल से यह लागत घटकर मात्र 10,000 रुपये रह जाती है।
पशुपालकों और डेयरी किसानों के लिए यह मशीन और भी खास है। अक्सर बड़ी कंबाइन मशीनों से कटाई के बाद गेहूं का भूसा खेत में ही नष्ट हो जाता है, लेकिन आज्ञा राम वर्मा की यह मशीन अनाज के साथ-साथ पशुओं के लिए चारा (भूसा) भी सुनिश्चित करती है। इसके अलावा, इसकी गति तेज होने के कारण फसल की कटाई जल्दी हो जाती है, जिससे अचानक होने वाली बेमौसम बारिश से फसल को बचाने में मदद मिलती है।
अभी वैज्ञानिक जांच होनी बाकी।
- फोटो : ICAR
बस्ती के 800 से अधिक किसानों ने मशीन पर जताया भरोसा
बस्ती जिले के लगभग 823 किसान इस तकनीक को अपना चुके हैं और अब तक 276 हेक्टेयर क्षेत्र में इसका सफल उपयोग किया जा चुका है। पूर्वी और मध्य भारत के गंगा के मैदानी इलाकों के लिए यह मशीन काफी उपयोगी मानी जा रही है, जहां श्रमिकों की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
इस मशीन ने खेतों में अपनी उपयोगिता साबित कर दी है, लेकिन अब इसके प्रदर्शन, ईंधन दक्षता और टिकाऊपन की जांच के लिए वैज्ञानिक पुष्टिकरण की तैयारी की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक जांच के बाद इसकी गुणवत्ता और सुरक्षा पर मुहर लग जाएगी, जिससे इसे बड़े पैमाने पर अन्य राज्यों के किसानों तक पहुंचाया जा सकेगा। फिलहाल, आज्ञा राम वर्मा का यह प्रयास उन छोटे किसानों के लिए एक बड़ी उम्मीद बनकर उभरा है जो कम लागत में आधुनिक खेती का सपना देखते हैं।
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