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बंजर धरती में भी अब खिलेगी खेती: जोधपुर के वैज्ञानिकों ने खोजा लवणीय मिट्टी में बेहतर उपज पाने का समाधान

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Umashankar Mishra Updated Wed, 09 Sep 2026 08:40 PM IST
सार

कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर के वैज्ञानिकों ने खारे पानी से बंजर हो रही भूमि को उपजाऊ बनाने की नई तकनीक विकसित की है। जिप्सम, बायोफर्टिलाइजर और लवण रोधी फसलों से किसानों को 30% तक अधिक उपज मिली है। जानें, पूरी तकनीक और सौर ऊर्जा आधारित जल शोधन की जानकारी...

बंजर भूमि सुधार के लिए कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर के वैज्ञानिकों ने जिप्सम, बायोफर्टिलाइजर और लवण रोधी फसलों की किस्मों के समन्वय से एक ऐसी तकनीक विकसित की है।
बंजर भूमि सुधार के लिए कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर के वैज्ञानिकों ने जिप्सम, बायोफर्टिलाइजर और लवण रोधी फसलों की किस्मों के समन्वय से एक ऐसी तकनीक विकसित की है। - फोटो : AI Image
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विस्तार
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पश्चिमी राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र में खारे पानी की वजह से बंजर हो रही हज़ारों हेक्टेयर जमीन को अब नया जीवन मिलने की उम्मीद है। कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर के वैज्ञानिकों ने जिप्सम, बायोफर्टिलाइजर और लवण रोधी फसलों की किस्मों के समन्वय से एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जिससे मिट्टी की उर्वरता वापस लौट रही है। खेतों पर हुए परीक्षण में उत्पादन में 25 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है।

जिप्सम और जैविक खाद का अनूठा संयोजन
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बीआर चौधरी ने बताया कि मृदा विज्ञान विभाग ने इस समस्या पर तीन वर्षों तक गहन शोध किया। वैज्ञानिकों ने मिट्टी में मौजूद हानिकारक लवणों को बेअसर करने के लिए जिप्सम की निर्धारित खुराक के साथ जैविक खादों का विशेष मिश्रण तैयार किया, जिससे मिट्टी के क्षारीय स्तर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।

उत्पादन में 30% तक दर्ज की गई बढ़ोतरी
विश्वविद्यालय के प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. ईश्वर सिंह के अनुसार, वैज्ञानिकों ने लवण प्रभावित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त फसलों की खास किस्में चुनी हैं। क्षेत्र के 50 से अधिक किसानों के खेतों पर सरसों, जौ और गेहूं की लवण सहनशील किस्मों का सफल प्रदर्शन किया गया, जिसमें फसल उत्पादन में 25 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज हुई। किसानों को यह तकनीक अपनाने के लिए विश्वविद्यालय द्वारा प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

सौर ऊर्जा से होगा जल शोधन 
जल प्रबंधन संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रामनिवास ने बताया कि खारे पानी के सीधे सिंचाई में उपयोग को रोकने के लिए सौर ऊर्जा संचालित जल शोधन इकाइयों की सिफारिश की गई है। इसके साथ ही जलभराव और लवण जमाव रोकने के लिए खेतों में ड्रेनेज सिस्टम लगाने की सलाह भी दी गई है। विश्वविद्यालय के अनुसार, यह समग्र प्रबंधन प्रणाली न केवल मिट्टी का स्वास्थ्य सुधारेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए कृषि आधारित आजीविका को भी सुरक्षित बनाएगी।
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