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Fertilizer: हर खाद कितने समय बाद काम करती है? जानें सही समय और इस्तेमाल का तरीका

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Mon, 21 Sep 2026 02:47 PM IST
सार

  • यूरिया का असर सामान्यतः 3 से 7 दिन में दिखना शुरू हो सकता है।
  • डीएपी को आमतौर पर बुवाई या रोपाई के समय बेसल डोज के रूप में दिया जाता है।
  • पोटाश का असर करीब 10 से 20 दिन में दिखने की सामान्य अवधि बताई जाती है।
  • गोबर की खाद और कम्पोस्ट का असर धीरे-धीरे होता है और इसे खेत की मिट्टी सुधारने में भी उपयोग किया जाता है।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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खेती में अच्छी पैदावार के लिए केवल खाद डालना ही काफी नहीं है। कौन-सी खाद कब और किस तरीके से डालनी है, यह भी उतना ही जरूरी है। अलग-अलग उर्वरकों के असर का समय अलग होता है। कुछ खाद मिट्टी में जल्दी उपलब्ध हो जाती हैं, जबकि जैविक खाद को असर दिखाने में ज्यादा समय लग सकता है। खाद का असर मिट्टी की नमी, तापमान, फसल की अवस्था, मिट्टी के प्रकार और खाद डालने के तरीके पर भी निर्भर करता है। इसलिए नीचे दिए गए समय को सामान्य जानकारी के तौर पर समझें।
  • यूरिया : यूरिया में 46% नाइट्रोजन होती है। यह फसल की शुरुआती बढ़वार और हरियाली के लिए प्रमुख नाइट्रोजन उर्वरकों में शामिल है।
सही समय और विधि
यूरिया को बुवाई या रोपाई के समय जरूरत के अनुसार दिया जा सकता है। इसका उपयोग फसल की टॉप ड्रेसिंग में भी किया जाता है। खेत में पर्याप्त नमी होने पर या सिंचाई के आसपास इसका इस्तेमाल करना उपयोगी रहता है।
  • डीएपी : डीएपी में 18% नाइट्रोजन और 46% फॉस्फोरस होता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से फसल की शुरुआती जड़ और बढ़वार के लिए किया जाता है।
सही समय और विधि
डीएपी को आमतौर पर बुवाई या रोपाई के समय बेसल डोज के रूप में दिया जाता है। इसे बीज के बिल्कुल सीधे संपर्क में रखने से बचना चाहिए।
  • एमओपी या पोटाश : एमओपी यानी म्यूरेट ऑफ पोटाश में 60% पोटाश (K₂O) होता है। पोटाश फसल की मजबूती, गुणवत्ता और कई तरह के तनावों से निपटने में मदद करता है।
सही समय और विधि
इसे बुवाई या रोपाई के समय तथा जरूरत के अनुसार बाद में टॉप ड्रेसिंग के रूप में दिया जा सकता है। मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर देना बेहतर रहता है।
  • सिंगल सुपर फॉस्फेट : सिंगल सुपर फॉस्फेट यानी एसएसपी फॉस्फोरस का एक प्रमुख स्रोत है। इसमें सल्फर भी मिलता है।
सही समय और विधि
एसएसपी को आमतौर पर बुवाई या रोपाई के समय मिट्टी में मिलाकर दिया जाता है। खाद को जड़ क्षेत्र के आसपास सही तरीके से उपलब्ध कराना जरूरी है।
  • एनपीके 12:32:16: एनपीके 12:32:16 में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश तीनों पोषक तत्व होते हैं। इसका इस्तेमाल फसल की जरूरत के अनुसार किया जाता है।
सही समय और विधि
इसे फसल और मिट्टी की पोषक जरूरत के अनुसार दिया जाना चाहिए। जहां फर्टिगेशन की सुविधा हो, वहां उर्वरक का उपयोग सिंचाई के जरिए भी किया जा सकता है।
  • जिप्सम : जिप्सम से मुख्य रूप से सल्फर और कैल्शियम की आपूर्ति होती है। यह उन खेतों में उपयोगी हो सकता है जहां इन पोषक तत्वों की कमी पाई गई हो।
सही समय और विधि
जिप्सम को मिट्टी में बेसल डोज के रूप में दिया जा सकता है। नमी वाली मिट्टी में इसे अच्छी तरह मिलाकर इस्तेमाल करना उचित रहता है।
  • गोबर की खाद और कम्पोस्ट : गोबर की सड़ी हुई खाद और कम्पोस्ट जैविक पदार्थ उपलब्ध कराते हैं। इनका असर रासायनिक उर्वरकों की तुलना में धीरे-धीरे दिखाई देता है।
सही समय और विधि
इन्हें बुवाई से पहले खेत में अच्छी तरह मिला देना चाहिए। इससे मिट्टी की संरचना, जैविक पदार्थ और लंबे समय में मिट्टी की उर्वरता सुधारने में मदद मिलती है।
  • नैनो यूरिया : नैनो यूरिया पत्तियों पर छिड़काव के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसके असर को पारंपरिक यूरिया की तरह केवल मिट्टी में डालने वाली खाद के समय से नहीं आंकना चाहिए।
सही समय और विधि
उत्पाद के लेबल पर दी गई मात्रा और फसल के अनुसार इसका छिड़काव करें। सामान्यतः पत्तियों पर छिड़काव सुबह या शाम के समय किया जाता है। मात्रा हमेशा संबंधित उत्पाद के लेबल और कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार रखें।
  • नैनो डीएपी : नैनो डीएपी में नाइट्रोजन और फॉस्फोरस की आपूर्ति के लिए इसका उपयोग किया जाता है। इसे फसल की जरूरत और उपयुक्त अवस्था के अनुसार इस्तेमाल किया जाता है।
सही समय और विधि
पत्तियों पर छिड़काव करते समय उत्पाद के लेबल पर दिए निर्देशों का पालन करें। फसल की अवस्था और पोषक तत्वों की जरूरत के अनुसार इसका उपयोग करना चाहिए।

किसान ध्यान रखें
खाद डालने का असर केवल खाद के नाम पर तय नहीं होता। मिट्टी की जांच, फसल की जरूरत, मौसम, सिंचाई और खाद डालने की सही विधि का भी असर पड़ता है। इसलिए बिना जरूरत ज्यादा खाद डालने से बचें। मिट्टी की जांच के आधार पर उर्वरक की मात्रा तय करना अधिक सही तरीका है। खासकर नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश की मात्रा फसल की जरूरत के अनुसार ही रखें।

जरूरी बात : ऊपर बताए गए दिन सामान्य अनुमान हैं। वास्तविक असर मिट्टी, फसल, मौसम, नमी, पोषक तत्वों की कमी और खाद के इस्तेमाल के तरीके के अनुसार कम या ज्यादा हो सकता है।
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