कर्नाटक के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में इस साल मौसम की बेरुखी के कारण प्रीमियम अरेबिका कॉफी की तुड़ाई सामान्य समय से थोड़ी पहले शुरू हो गई है। कम बारिश और तेज धूप की वजह से फल जल्दी पक गए हैं, जिसके चलते किसानों को 2026-27 सीजन की फसल की तुड़ाई समय से पहले ही शुरू करनी पड़ी है।
सूखे मौसम के कारण जल्द पकी फसल और तुड़ाई की स्थिति
कर्नाटक प्लांटर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष एम.सी. करियप्पा के अनुसार, कोडागु के कुछ निचले इलाकों में बारिश की कमी और तेज गर्मी के कारण अरेबिका कॉफी समय से पहले पक गई है, जिसकी तुड़ाई शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि 20 अक्टूबर के आसपास तुड़ाई पूरी गति पकड़ेगी, जबकि रोबस्टा कॉफी की तुड़ाई दिसंबर के मध्य तक शुरू होने की संभावना है।
कर्नाटक ग्रोअर्स फेडरेशन के पूर्व अध्यक्ष एच.टी. मोहनकुमार ने जानकारी दी कि चिकमगलूर के कुछ हिस्सों में भी अरेबिका की तुड़ाई शुरू हो चुकी है और किसान बेहतर दाम पाने के लिए पार्चमेंट कॉफी बनाने पर जोर दे रहे हैं। अग्राणी कॉफी एंड कमोडिटीज के प्रवीण कोलिमार्ला के मुताबिक, नवंबर और दिसंबर में तुड़ाई अपने चरम पर होगी और दिसंबर से यह कॉफी निर्यात के लिए उपलब्ध हो जाएगी। उन्होंने बताया कि भारत की लगभग 80 प्रतिशत अरेबिका कॉफी पार्चमेंट (धुली हुई कॉफी) होती है।
देश में कुल 4.04 लाख टन कॉफी उत्पादन का अनुमान
कॉफी बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, 2026-27 के सीजन में कर्नाटक में अरेबिका का उत्पादन 84,015 टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल 79,145 टन था। वहीं राज्य में रोबस्टा का उत्पादन 1.77 लाख टन से बढ़कर 1.95 लाख टन होने की संभावना है। हालांकि, किसान प्रतिनिधि करियप्पा का मानना है कि अरेबिका की फसल पिछले साल की तुलना में कम हो सकती है, जबकि रोबस्टा का उत्पादन पिछले साल जैसा ही रहेगा।
राष्ट्रीय स्तर पर कॉफी बोर्ड के अनुसार, भारत में कुल अरेबिका उत्पादन पिछले साल के 1.11 लाख टन के मुकाबले बढ़कर 1.20 लाख टन और रोबस्टा का उत्पादन 2.62 लाख टन से बढ़कर 2.84 लाख टन होने का अनुमान है। इस प्रकार देश का कुल कॉफी उत्पादन 2025-26 के 3.73 लाख टन से बढ़कर इस बार 4.04 लाख टन रहने की उम्मीद जताई गई है।
वैश्विक बाजार में नरमी और घरेलू कीमतें
वैश्विक स्तर पर आपूर्ति सुधरने और ब्राजील में अगली फसल की बेहतर संभावनाओं के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में अरेबिका की कीमतों में गिरावट देखी गई है। आईसीई (ICE) पर अरेबिका की कीमतें गिरकर 2.74 डॉलर प्रति पाउंड पर आ गई हैं, जो एक महीने में करीब 18 प्रतिशत की गिरावट दर्शाती हैं।
वहीं भारत के घरेलू बाजार में कच्ची अरेबिका पार्चमेंट की कीमतें 23,500 रुपये से 24,600 रुपये प्रति 50 किलो की बोरी के आसपास चल रही हैं। इसके अलावा, अरेबिका चेरी के भाव 13,000 रुपये से 14,500 रुपये प्रति 50 किलो बोरी के दायरे में बने हुए हैं।