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Report: गांवों में 91% माइक्रोफाइनेंस कर्ज आजीविका बढ़ाने में सहायक, 3.81 लाख करोड़ रुपये का बकाया ऋण
गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा
Published by: Himanshu Mishra
Updated Sun, 12 Oct 2025 10:15 AM IST
सार
‘भारत माइक्रोफाइनेंस रिपोर्ट 2025’ यह साबित करती है कि भारत में सूक्ष्म वित्त न केवल ऋण का माध्यम है, बल्कि आजीविका और सशक्तिकरण का साधन बन चुका है। यह क्षेत्र अब केवल आर्थिक समावेशन का नहीं, बल्कि ग्रामीण आत्मनिर्भरता और उद्यमिता के नए युग का वाहक बन रहा है।
गांवों में माइक्रोफाइनेंसिंग का बढ़ता दायरा
- फोटो : सोशल मीडिया
देश में माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन की आधारशिला बनता जा रहा है। भारत माइक्रोफाइनेंस रिपोर्ट 2025 के अनुसार, देश में कुल सक्रिय माइक्रोफाइनेंस ग्राहकों की संख्या 8.28 करोड़ रही, जबकि इन पर कुल 3.81 लाख करोड़ रुपये का बकाया ऋण था। रिपोर्ट में बताया गया कि 91% माइक्रोफाइनेंस कर्ज आजीविका और आय बढ़ाने वाले कार्यों में उपयोग हो रहे हैं, जिससे करोड़ों छोटे किसानों, महिलाओं और कारीगरों को आर्थिक स्थिरता मिली है।
कुल कर्ज और ग्राहक आधार में मामूली गिरावट
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 के अंत तक ग्राहक आधार में 13% और ऋण में 14% की गिरावट दर्ज की गई है।
एनबीएफसी-एमएफआई क्षेत्र का हिस्सा सबसे अधिक 39% (₹1.48 लाख करोड़) रहा।
बैंकों का हिस्सा 32% (₹1.24 लाख करोड़),
लघु वित्त बैंकों (SFBs) का 16% (₹59,817 करोड़),
जबकि एनबीएफसी का हिस्सा 12% (₹45,042 करोड़) रहा।
कुल 13.99 करोड़ सक्रिय लोन अकाउंट्स में से लगभग 54% एनबीएफसी-एमएफआई और बैंकों के हैं।
स्वयं सहायता समूहों (SHG) का बढ़ता दायरा
रिपोर्ट के मुताबिक, SHG बैंक लिंकेज कार्यक्रम में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है। देशभर में 84.94 लाख एसएचजी को ₹3.04 लाख करोड़ का कर्ज दिया गया है। कुल मिलाकर 143.3 लाख एसएचजी के साथ 17.1 करोड़ परिवार इस कार्यक्रम से जुड़े हैं, जो ग्रामीण महिलाओं के लिए वित्तीय समावेशन की बड़ी मिसाल है।
माइक्रो लेंडिंग संस्थानों की भूमिका और विस्तार
देशभर में 203 माइक्रो लेंडिंग संस्थान (MLI) सक्रिय हैं, जो 98% माइक्रोफाइनेंस व्यवसाय का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन संस्थानों के पास 6.27 करोड़ सक्रिय ग्राहक हैं और कुल ₹2.38 लाख करोड़ का ऋण पोर्टफोलियो है। इसमें से ₹72,930 करोड़ प्रबंधित पोर्टफोलियो है, जिसमें सबसे अधिक योगदान बिजनेस कॉरस्पोंडेंट्स (₹53,287 करोड़) का रहा। प्रति उधारकर्ता औसतन ₹38,005 का ऋण बकाया है।
माइक्रोफाइनेंस में रोजगार और संस्थागत संरचना
वित्त वर्ष 2024-25 के अंत तक यह क्षेत्र 37,380 शाखाओं और 3.29 लाख कर्मचारियों के साथ कार्यरत था। इनमें से 64% कर्मचारी फील्ड पर कार्यरत हैं। महिला कर्मचारियों की हिस्सेदारी लगभग 9% रही। हालांकि सक्रिय उधारकर्ताओं की प्रति अधिकारी संख्या घटकर 299 रह गई, जिससे सेवा गुणवत्ता में सुधार तो हुआ लेकिन परिचालन लागत बढ़ी है।
शीर्ष राज्य और क्षेत्रीय स्थिति
माइक्रोफाइनेंस ऋण वितरण में शीर्ष पांच राज्य रहे। इनमें बिहार, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक शामिल है। इन राज्यों ने मिलकर कुल पोर्टफोलियो का सबसे बड़ा हिस्सा संभाला है। एनबीएफसी और एनबीएफसी-एमएफआई ने मिलकर ग्राहक आधार का 86% और ऋण पोर्टफोलियो का 84% योगदान दिया।
नाबार्ड और सा-धन की टिप्पणी
नाबार्ड अध्यक्ष शाजी केवी ने कहा, “माइक्रोफाइनेंस ने वित्तीय समावेशन को नई दिशा दी है। इससे महिलाओं, छोटे किसानों और कारीगरों को बिना गिरवी के कर्ज मिला, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सके।”
सा-धन के सीईओ जिजी मैमन ने कहा, “पिछले साल ऋण वितरण पर लगाम लगाने के दो दौर के सुरक्षा उपाय (जुलाई 2024 और अप्रैल 2025) लागू किए गए, जिससे उधारकर्ताओं की सुरक्षा बढ़ी। अब जब 91% कर्ज आय सृजन के लिए उपयोग हो रहा है, तो चालू वर्ष में सुधार की उम्मीद है।”
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