मिलिए हरियाणा (काछवा, करनाल) के प्रगतिशील किसान सुरेंद्र लाठर जी से, जिन्होंने 115 एकड़ में इंटीग्रेटेड फार्मिंग (Integrated Farming) का एक बेहद सफल मॉडल तैयार किया है। 1984 में पारंपरिक खेती से शुरुआत करने वाले सुरेंद्र आज अपने खेत में फसल उगाने के साथ-साथ 75,000 मुर्गियों का पोल्ट्री फार्म, मछली पालन और खुद का बीज प्रोसेसिंग (Seed Processing) प्लांट चला रहे हैं। उनके पोल्ट्री फार्म से रोजाना 60-65 हजार अंडों का उत्पादन होता है। सबसे खास बात यह है कि मुर्गियों की खाद से उनकी जमीन की सेहत इतनी सुधर गई है कि रासायनिक खाद का खर्च नाममात्र रह गया है। साथ ही, 2 एकड़ के तालाब में वह रोहू, कतला और पंगास मछली का पालन कर रहे हैं, जिससे उन्हें प्रति एकड़ 4 लाख रुपये की अतिरिक्त बचत होती है। मछली के इस तालाब का वेस्ट पानी खेतों की सिंचाई के काम आता है, जिससे फसल की पैदावार में 5 क्विंटल/एकड़ तक का इजाफा हुआ है। इसके अलावा, वह सालाना 19,000 क्विंटल (गेहूं और धान) प्रमाणित बीज तैयार करते हैं और बड़ी कंपनियों के साथ आलू के बीज की कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग भी करते हैं। उनका साफ संदेश है- किसानों को केवल एक फसल या व्यवसाय पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।