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मंडियों में घट रही सरसों की आवक: किसानों के स्टॉक पर टिकी बाजार की नजर, मजबूत मांग से कीमतों को सहारा

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sat, 26 Sep 2026 02:05 PM IST
सार

मंडियों में सरसों की आवक लगातार घट रही है, जबकि घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है। किसानों, स्टॉकिस्टों और प्रोसेसर्स के पास उपलब्ध स्टॉक के चलते खुले बाजार में आवक सीमित है, जिससे सरसों की कीमतों को सहारा मिल रहा है।

मंडियों में सरसों की घटी आवक
मंडियों में सरसों की घटी आवक - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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देश में सरसों की घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है, जबकि मंडियों में इसकी आवक लगातार घट रही है। बाजार में उपलब्ध सरसों का बड़ा हिस्सा स्टॉकिस्टों और तेल प्रोसेसर्स के पास बताया जा रहा है। इससे सरसों की कीमतों को सहारा मिल रहा है। एग्रोवॉच इंडिया के डायरेक्टर राहुल चौहान के मुताबिक, देश में सरसों की मांग और खपत दोनों तेज हैं। मौजूदा सीजन की शुरुआत से अब तक करीब 60 से 70 लाख टन सरसों की खपत हो चुकी है। वहीं, फरवरी तक आने वाले अगले सीजन से पहले करीब 40 लाख टन सरसों की जरूरत होगी।

सरसों के तेल की बढ़ रही मांग
कोविड के बाद से सरसों के तेल को सेहतमंद विकल्प के तौर पर देखने वाले उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ी है। इसके चलते सरसों के तेल की खपत में साल-दर-साल बढ़ोतरी हो रही है। राहुल चौहान के अनुसार, सरसों के तेल के नियमित उपभोक्ता कीमतों में बदलाव के बावजूद इसे खरीदना पसंद करते हैं। यही वजह है कि बाजार में सरसों की मांग बनी हुई है।

मंडियों में क्यों घट रही आवक?
इस समय मंडियों में सरसों की आवक लगातार कम हो रही है। शुरुआती दौर में बिचौलियों और व्यापारियों की सक्रिय खरीद के कारण छोटे किसानों की काफी सरसों मंडियों में बिक चुकी है। अब बची हुई सरसों का एक बड़ा हिस्सा किसानों के पास है। इसके अलावा स्टॉकिस्टों और प्रोसेसर्स के पास भी सरसों का स्टॉक मौजूद है। ऐसे में खुले बाजार में नई सरसों की आवक सीमित बनी हुई है।

आयात शुल्क में कटौती का असर सीमित
राहुल चौहान के मुताबिक, खाद्य तेलों के आयात पर सीमा शुल्क में कटौती के फैसले से बाजार में कुछ समय के लिए दबाव बना था। हालांकि, देश में सरसों का उत्पादन मजबूत होने के कारण इसका असर ज्यादा नहीं पड़ा। पिछले 15-20 दिनों में आयात शुल्क में कटौती की चर्चाओं के बीच सरसों की कीमतों में पहले ही गिरावट आ चुकी थी। शुल्क में 5 फीसदी की कटौती के बाद भी कीमतों में बड़ी गिरावट नहीं देखी गई। बाजार इस बदलाव को काफी हद तक पहले ही अपने भाव में शामिल कर चुका था।
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