उत्तर प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने और प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनाने में पशुपालन, दुग्ध विकास और मत्स्य पालन क्षेत्र ग्रोथ इंजन की भूमिका निभा रहे हैं। गांव जंक्शन के इस विशेष पॉडकास्ट में मुकेश मेश्राम (प्रमुख सचिव, पशुधन, दुग्ध विकास एवं मत्स्य विभाग, उत्तर प्रदेश) ने ग्रामीण समृद्धि, नस्ल सुधार और आधुनिक पशुपालन तकनीकों का पूरा रोडमैप साझा किया है। इस बातचीत में सेक्स-सॉर्टेड सीमेन (Sex-Sorted Semen), भ्रूण प्रत्यारोपण (ETT), 1962 मोबाइल वेटरनरी यूनिट के जरिए पशु उपचार आपके द्वार, निराश्रित गोवंश प्रबंधन, बायोगैस-गोकाष्ठ निर्माण, डेयरी प्रोसेसिंग पर 35% पूंजीगत सब्सिडी (₹10 करोड़ तक) और बैकयार्ड पोल्ट्री/बकरी पालन के जरिए कम लागत में लाखों के मुनाफे जैसे अहम विषयों पर व्यावहारिक जानकारी दी गई है। अगर आप पशुपालक, किसान, युवा उद्यमी या एग्री-स्टार्टअप शुरू करने के इच्छुक हैं, तो यह विस्तृत चर्चा आपके लिए बेहद उपयोगी साबित होगी।
HIGHLIGHTS
$1 ट्रिलियन इकॉनमी का रोडमैप: यूपी के विकास और ग्रामीण आजीविका में पशुधन सेक्टर की अहम भूमिका।
क्रांतिकारी नस्ल सुधार तकनीक: सेक्स-सॉर्टेड सीमेन (Sex-Sorted Semen) और भ्रूण प्रत्यारोपण (ETT) से केवल बछिया उत्पादन का मॉडल।
ब्राजील से गिर गाय की वापसी: उच्च दुग्ध उत्पादन वाली देशी गायों के संवर्धन की वास्तविक केस-स्टडी।
बकरी व शूकर पालन: छोटे किसानों के लिए "एटीएम" मॉडल और SC लाभार्थियों के लिए 90% सब्सिडी योजना।
डेयरी प्रोसेसिंग पर भारी छूट: दुग्ध प्रसंस्करण इकाई लगाने पर सरकार से 35% पूंजीगत सब्सिडी (₹10 करोड़ तक)।
1962 टोल-फ्री वेटरनरी वैन: 'पशुपालन विभाग आपके द्वार'—डोरस्टेप इलाज, वैक्सीनेशन और डीवर्मिंग।
नंदी/बैल योजना: खेती और सिंचाई के लिए निशुल्क गोवंश के साथ ₹72,000 सालाना चारा सहायता।
गो-काष्ठ व गो-दीप से कमाई: पराली और गोबर के संयोजन से पर्यावरण संरक्षण और गोशालाओं की आत्मनिर्भरता।
कम लागत, बड़ा मुनाफा: बैकयार्ड पोल्ट्री में मात्र ₹3,000 लगाकर ₹80,000 सालाना कमाने का फॉर्मूला।
आवर्तनशील (सर्कुलर) खेती: कृषि अपशिष्ट से पशु आहार और पशु अपशिष्ट से प्राकृतिक खाद का शून्य-लागत चक्र।