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पितृ पक्ष में क्या दान करें? : गेहूं, चावल से लेकर काले तिल तक, जानें धार्मिक मान्यता

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Fri, 02 Oct 2026 07:19 PM IST
सार

  • 26 सितंबर 2026 से शुरू हुआ पितृ पक्ष, सर्वपितृ अमावस्या तक रहेगा।
  • धार्मिक मान्यता के अनुसार अन्न दान को पितृ पक्ष में विशेष महत्व दिया जाता है।
  • गेहूं और चावल जरूरतमंदों या ब्राह्मण को दान करने की परंपरा।
  • श्राद्ध और तर्पण में काले तिल का विशेष महत्व बताया गया है।

पितृ पक्ष 2026
पितृ पक्ष 2026 - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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हिंदू धर्म में पितृ पक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और तर्पण का विशेष समय माना जाता है। वर्ष 2026 में पितृ पक्ष की शुरुआत 26 सितंबर, शनिवार को भाद्रपद पूर्णिमा से हुई और इसका समापन सर्वपितृ अमावस्या पर होगा। इस दौरान लोग अपने पूर्वजों की शांति और उनकी स्मृति में श्राद्ध, तर्पण और दान करते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष में जरूरतमंदों को दान देने और पूर्वजों का स्मरण करने का विशेष महत्व है। कई धार्मिक परंपराओं में पितृ दोष की शांति के लिए भी इस दौरान दान करने की सलाह दी जाती है। आइए जानते हैं, पितृ पक्ष में किन चीजों का दान किया जाता है।

अन्न दान का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार पितृ पक्ष में अन्न दान को महत्वपूर्ण माना गया है। इस दौरान गेहूं और चावल किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को दान करने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

इसी तरह काले तिल का भी पितृ कर्म में विशेष स्थान बताया गया है। तर्पण और श्राद्ध की कई परंपराओं में काले तिल का इस्तेमाल किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितृ पक्ष में काले तिल का दान करना भी शुभ माना जाता है।

दक्षिणा के साथ दान की परंपरा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दान अपनी क्षमता के अनुसार और श्रद्धा के साथ करना चाहिए। कई परंपराओं में दान के साथ दक्षिणा देने का भी उल्लेख मिलता है। इसका उद्देश्य जरूरतमंद की सहायता करना और श्रद्धापूर्वक पूर्वजों का स्मरण करना माना जाता है। दान करते समय दिखावे से बचने और जरूरतमंद व्यक्ति की गरिमा का ध्यान रखने की सलाह भी धार्मिक परंपराओं में दी जाती है।

पितृ पक्ष में इन बातों का रखें ध्यान
  • अन्न दान : गेहूं, चावल और अन्य खाद्य सामग्री जरूरतमंदों को दान करने की परंपरा है।
  • काले तिल का दान : श्राद्ध और तर्पण में काले तिल का विशेष महत्व माना जाता है। इसलिए इसका दान भी किया जाता है।
  • दक्षिणा सहित दान : अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान के साथ दक्षिणा देने की परंपरा है।
  • श्रद्धा और सम्मान : पितृ पक्ष में पूर्वजों का स्मरण श्रद्धा के साथ करने और उनके प्रति सम्मान बनाए रखने की मान्यता है।
  • गुप्त दान : धार्मिक परंपराओं में बिना दिखावे और गुप्त रूप से दान करने को भी महत्व दिया गया है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष का उद्देश्य केवल दान करना ही नहीं, बल्कि पूर्वजों का श्रद्धापूर्वक स्मरण करना और जरूरतमंदों की सहायता करना भी है।
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