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Home› Kheti Kisani› Ridge Gourd Cultivation Using Scaffolding Mulching First Harvest In 30 Days Earning Up To Rs 1 Lakh Per Acre

मचान-मल्चिंग से तोरई की खेती : 30 दिन में पहली तोड़ाई, एक एकड़ में 1 लाख रुपये तक कमाई

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Mon, 05 Oct 2026 07:34 PM IST
सार

मचान और मल्चिंग विधि से झींगा (तोरई) की खेती में पौधों की बढ़वार और खेत की नमी बनाए रखने में मदद मिलती है। करीब 30–35 दिन में पहली तोड़ाई शुरू हो सकती है। एक एकड़ में 50 क्विंटल तक उत्पादन और 30 रुपये किलो औसत भाव पर करीब 1.50 लाख रुपये सकल आमदनी का अनुमान है।

मचान-मल्चिंग से तोरई की खेती
मचान-मल्चिंग से तोरई की खेती - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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पारंपरिक खेती के साथ सब्जियों की उन्नत खेती किसानों की आमदनी बढ़ाने का अच्छा जरिया बन रही है। किसान मचान और मल्चिंग विधि से झींगा (तोरई) की खेती कर बेहतर कमाई कर रहे हैं। इस तकनीक से पौधों की अच्छी बढ़वार के साथ खेत में नमी बनाए रखने में भी मदद मिलती है।

30-35 दिन में पहली तोड़ाई
झींगा की फसल सामान्य तौर पर 30 से 35 दिन में पहली तोड़ाई के लिए तैयार हो जाती है। इसके बाद करीब डेढ़ महीने तक लगातार तोड़ाई की जा सकती है। इससे किसानों को एक साथ पूरी फसल बेचने के बजाय लंबे समय तक आमदनी मिलती रहती है।

एक एकड़ में 50 हजार रुपये लागत
एक एकड़ में झींगा की खेती पर करीब 50 हजार रुपये खर्च आता है। अच्छी फसल होने पर करीब 50 क्विंटल उत्पादन मिल सकता है। बाजार में औसत भाव 30 रुपये प्रति किलो मानें तो 50 क्विंटल झींगा की बिक्री से करीब 1.50 लाख रुपये की सकल आमदनी हो सकती है। लागत घटाने के बाद किसान को करीब 1 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा मिल सकता है। वास्तविक आमदनी उत्पादन और बाजार भाव के अनुसार कम या ज्यादा हो सकती है।

पत्तियां पीली पड़ें तो सावधान
झींगा की फसल में कई बार पत्तियों का पीला पड़ना या मुड़ना जैसी समस्या दिखाई दे सकती है। ऐसे में किसान बिना जानकारी के किसी भी दवा का छिड़काव न करें। समस्या दिखाई देने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही उचित दवा का इस्तेमाल करें। समय पर सही प्रबंधन करने से फसल को रोग और कीटों से बचाने के साथ उत्पादन बेहतर करने में मदद मिल सकती है।
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