विज्ञापन
Home› Kheti Kisani› Direct Changes Organic Farming Can Costly Adopt Step By Step Approach Reduce Chemical Fertilizers

जैविक खेती में सीधे बदलाव पड़ सकता है भारी : रासायनिक खाद घटाने का अपनाएं ये चरणबद्ध तरीका

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Mon, 05 Oct 2026 07:40 PM IST
सार

रासायनिक खेती से जैविक खेती की ओर अचानक बदलाव करने पर शुरुआती दौर में उत्पादन प्रभावित हो सकता है। किसान मिट्टी की जांच और विशेषज्ञ की सलाह के आधार पर धीरे-धीरे जैविक खाद की मात्रा बढ़ाते हुए रासायनिक खाद कम कर सकते हैं।

जैविक खेती
जैविक खेती - फोटो : गांव जंक्शन
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

रासायनिक खेती से जैविक खेती की ओर बढ़ने वाले किसानों को शुरुआती दौर में फसल उत्पादन में कमी का सामना करना पड़ सकता है। अचानक रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल बंद करने से खेत की मिट्टी को नई पोषण व्यवस्था के साथ तालमेल बनाने में समय लगता है। ऐसे में कुछ किसान निराश होकर दोबारा रासायनिक खेती की ओर लौट जाते हैं। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बदलाव को एक साथ करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से अपनाना बेहतर विकल्प हो सकता है।

अचानक बदलाव से क्यों घट सकती है पैदावार?
लंबे समय से रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल वाले खेत में अचानक उनका प्रयोग बंद करने पर फसल को उपलब्ध पोषक तत्वों की मात्रा प्रभावित हो सकती है। वहीं जैविक खाद और अन्य जैविक स्रोतों से पोषक तत्व धीरे-धीरे उपलब्ध होते हैं। मिट्टी की जैविक गतिविधि और उर्वरता में सुधार होने में भी समय लग सकता है। इसी वजह से संक्रमण के शुरुआती वर्षों में उत्पादन प्रभावित होने की आशंका रहती है।

धीरे-धीरे कम करें रासायनिक खाद
जैविक खेती की ओर जाने के लिए किसान चरणबद्ध रणनीति अपना सकते हैं। उदाहरण के तौर पर खाद प्रबंधन में धीरे-धीरे जैविक स्रोतों की हिस्सेदारी बढ़ाई जा सकती है।
  • पहला चरण : करीब 40 प्रतिशत जैविक खाद और 60 प्रतिशत रासायनिक खाद का इस्तेमाल।
  • दूसरा चरण : अगली फसल में जैविक और रासायनिक खाद की मात्रा करीब 50-50 प्रतिशत रखी जा सकती है।
  • तीसरा चरण : इसके बाद जैविक खाद की हिस्सेदारी बढ़ाकर करीब 60 प्रतिशत और रासायनिक खाद को 40 प्रतिशत तक किया जा सकता है।
  • आगे : खेत की स्थिति, फसल और मिट्टी की जांच के आधार पर रासायनिक उर्वरकों की मात्रा धीरे-धीरे कम की जा सकती है।

यह अनुपात हर खेत और फसल के लिए एक जैसा नहीं होना चाहिए। मिट्टी की जांच और कृषि विशेषज्ञ की सलाह के आधार पर खाद की मात्रा तय करना अधिक सुरक्षित रहेगा।

मिट्टी की जांच से शुरू करें जैविक खेती
जैविक खेती की ओर बढ़ने से पहले खेत की मिट्टी की जांच कराना उपयोगी है। इससे मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों की स्थिति पता चलती है और खाद प्रबंधन की सही योजना बनाने में मदद मिलती है। किसान गोबर की सड़ी खाद, कंपोस्ट, हरी खाद और उपलब्ध जैविक स्रोतों का इस्तेमाल बढ़ा सकते हैं।

उत्पादन के साथ मिट्टी की सेहत पर ध्यान
जैविक खेती में बदलाव का उद्देश्य केवल रासायनिक खाद कम करना नहीं, बल्कि मिट्टी की सेहत, पोषक तत्वों का संतुलन और खेती की लागत को भी ध्यान में रखना है। संक्रमण अवधि में उत्पादन और बाजार की स्थिति पर नजर रखना जरूरी है। फसल के अनुसार सही पोषण प्रबंधन अपनाकर किसान जैविक खेती की ओर व्यवस्थित तरीके से बढ़ सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन