इस रबी सीजन में किसान रिजका की खेती करके अपने पशुओं के लिए अगले दो से तीन सालों तक उच्च गुणवत्ता वाले चारे का पक्का इंतजाम कर सकते हैं। उत्तर प्रदेश और राजस्थान समेत देश के कई राज्यों में इस पौष्टिक चारा फसल की खेती प्रमुखता से की जाती है। उचित विधि और सही समय पर बुवाई कर किसान इससे बंपर पैदावार ले सकते हैं।
खेत की तैयारी और बुवाई का सही समय
खेत तैयार करने के लिए सबसे पहले 2 से 3 बार हैरो और कल्टीवेटर से जुताई कर पाटा लगाना चाहिए। इसी दौरान खेत में प्रति हेक्टेयर 10 से 15 टन कम्पोस्ट खाद मिला दें। फसल को भूमिगत कीड़ों से बचाने के लिए 25 किलो मिथाईल पैराथियॉन (2 प्रतिशत धूल) प्रति हेक्टेयर की दर से मिट्टी में मिलाना जरूरी है। इसके बाद खेत में पलेवा (बुवाई से पहले की सिंचाई) करें।
बुवाई के लिए अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े से लेकर दिसंबर के पहले सप्ताह तक का समय उचित है। हालांकि, चारे की ज्यादा उपज लेने के लिए अक्टूबर का दूसरा पखवाड़ा सबसे उत्तम पाया गया है। एक हेक्टेयर खेत के लिए 20 से 25 किलो बीज काफी होता है। बुवाई कतारों में करनी चाहिए और कतार से कतार की दूरी 20 से 25 सेंटीमीटर रखनी चाहिए।
बीज उपचार और खाद-पानी का प्रबंधन
फसल को रोगों से बचाने के लिए बुवाई से पहले बीजों का उपचार करना बेहद अहम है। एक हेक्टेयर के बीज को उपचारित करने के लिए 600 ग्राम राईजोबियम कल्चर को 250 ग्राम गुड़ के घोल में मिलाएं। इससे फसल में रोगों के संक्रमण की आशंका कम हो जाती है।
खाद की बात करें तो बुवाई के समय प्रति हेक्टेयर 15 किलो नाइट्रोजन, 100 किलो फास्फोरस और 30 किलो पोटाश का इस्तेमाल करें। वहीं सिंचाई के लिए, बीज के अंकुरण के बाद पहली हल्की सिंचाई करें। इसके बाद अगली दो सिंचाई 5 से 7 दिन के अंतराल पर करें और फिर जरूरत के अनुसार पानी देते रहें। ध्यान रखें कि चारे की हर कटाई के बाद खेत में सिंचाई जरूर करें और प्रति हेक्टेयर 15 किलो नाइट्रोजन का छिड़काव भी करें।
खरपतवार नियंत्रण और चारे की पैदावार
रिजका के खेत में बथुवा, मोथा, कृष्णनील, प्याजी, चटरी और मटरी जैसे खरपतवार उग आते हैं, जो फसल का खाद-पानी सोख लेते हैं। इनकी रोकथाम के लिए पहली सिंचाई के 4 से 5 दिन बाद खुरपी की मदद से निराई-गुड़ाई करें।
सही समय पर बोई गई फसल की पहली कटाई बुवाई के 60 दिन बाद की जानी चाहिए। इसके बाद की कटाइयां 30 से 35 दिनों के अंतराल पर करें। फसल की अच्छी बढ़वार के लिए कटाई हमेशा जमीन से 4 से 5 सेंटीमीटर की ऊंचाई से करनी चाहिए। इस विधि का पालन करने पर रिजका की 7 से 8 कटाइयों में प्रति हेक्टेयर 700 से 800 क्विंटल हरा चारा और 140 से 160 क्विंटल सूखा चारा प्राप्त किया जा सकता है।