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महिंद्रा नई सीडिंग मशीन : 35 HP ट्रैक्टर से पराली के बीच कर सकेंगे गेहूं की सीधी बुवाई, खाद-बीज की भी होगी बचत

गांव जंक्शन डेस्क, मुंबई Published by: Umashankar Mishra Updated Tue, 13 Oct 2026 02:58 PM IST
सार

महिंद्रा एंड महिंद्रा ने मैक्ससीडर मल्टी-क्रॉप मशीन का व्यावसायिक उत्पादन और आपूर्ति शुरू की है। यह 35 HP या अधिक क्षमता वाले ट्रैक्टर से चल सकती है और धान की पराली के बीच सीधे बुवाई के लिए बनाई गई है। कंपनी के अनुसार, इससे बीज और खाद की खपत घटाने तथा पराली जलाने की जरूरत कम करने में मदद मिल सकती है।

महिंद्रा ने अपनी मल्टी-क्रॉप सीडिंग मशीन मैक्ससीडर का व्यावसायिक उत्पादन व आपूर्ति शुरू कर दी है।
महिंद्रा ने अपनी मल्टी-क्रॉप सीडिंग मशीन मैक्ससीडर का व्यावसायिक उत्पादन व आपूर्ति शुरू कर दी है। - फोटो : Ai
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विस्तार
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धान की कटाई के बाद खेत में बची पराली को जलाने के बजाय उसमें सीधे अगली फसल की बुवाई की जा सके, इसके लिए महिंद्रा एंड महिंद्रा ने अपनी मल्टी-क्रॉप सीडिंग मशीन मैक्ससीडर का व्यावसायिक उत्पादन और आपूर्ति शुरू कर दी है।

कंपनी के मुताबिक, यह मशीन कम मिट्टी छेड़छाड़ के साथ बुवाई करने और बीज व खाद की खपत घटाने में मदद कर सकती है।

कनाडा की कंपनी क्लीन सीड टेक्नोलॉजीज से लाइसेंस लेकर बनाई गई इस मशीन का उत्पादन मध्य प्रदेश के पीथमपुर स्थित महिंद्रा के विशेष कृषि मशीनरी संयंत्र में हो रहा है। इसकी बिक्री चरणबद्ध तरीके से शुरू होगी। पहले पंजाब और हरियाणा के किसानों तक इसे पहुंचाने की योजना है।

35 हॉर्सपावर का ट्रैक्टर भी काफी
मैक्ससीडर ट्रैक्टर से जोड़कर चलाई जाने वाली मशीन है। कंपनी का कहना है कि इसे 35 हॉर्सपावर या उससे अधिक क्षमता वाले ट्रैक्टर से चलाया जा सकता है। इससे किसानों को बुवाई के लिए ज्यादा शक्तिशाली ट्रैक्टर की जरूरत नहीं पड़ेगी और आधुनिक मशीन से खेती करने का खर्च कम रखने में मदद मिल सकती है।

यह मशीन धान, गेहूं, सोयाबीन, मक्का और कपास समेत कई फसलों की बुवाई के लिए बनाई गई है।

पराली में बुवाई, बीज और खाद की बचत का दावा
जीरो-टिल तकनीक से लैस मैक्ससीडर धान की पराली के बीच सीधे बुवाई कर सकती है। इससे खेत तैयार करने के लिए पराली जलाने की जरूरत घटाने का विकल्प मिलता है। कंपनी के मुताबिक, मशीन की पेटेंट तकनीक बीज की बर्बादी और खाद के इस्तेमाल को कम करने में मदद करती है, जिससे खेती की लागत घट सकती है।

पंजाब और हरियाणा में किए गए खेत परीक्षणों में मशीन ने धान की भारी पराली के बीच बुवाई की क्षमता दिखाई। कंपनी का कहना है कि इस दौरान मिट्टी को कम छेड़ते हुए इनपुट की खपत घटाने में मदद मिली।

किसानों के लिए ऐसी मशीनें खासकर धान के बाद गेहूं की बुवाई के समय उपयोगी हो सकती हैं। हालांकि, अलग-अलग खेतों, फसलों और परिस्थितियों में इसकी लागत और बचत का आकलन करना जरूरी होगा।
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