महिंद्रा ने सोमवार को अपनी नई मैक्ससीडर (Maxseeder) यंत्र का व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन और सप्लाई शुरू करने का एलान किया है। यह यंत्र बिना जुताई के कई फसलों की सटीक बुवाई करता है।
35 एचपी से भी चलेगा यंत्र, मक्के से गेहूं तक की बुवाई
यह यंत्र ट्रैक्टर संग जोड़कर काम करता है। खास बात यह है कि इसे 35 एचपी या उससे ज्यादा क्षमता वाले ट्रैक्टर के साथ जोड़कर चलाया जा सकता है। इस यंत्र की मदद से किसान धान, गेहूं, सोयाबीन, मक्का और कपास सहित कई तरह की फसलों की आसानी से बुवाई कर सकते हैं।
पराली जलाने की समस्या का मिलेगा समाधान, बचेगी खाद
महिंद्रा के अनुसार, इस मशीन की जीरो-टिल तकनीक'की मदद से किसान धान की बची हुई पराली के बीच सीधे बुवाई कर सकते हैं। इससे किसानों को खेत में पराली जलाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और यह पराली जलाने का एक बेहतर और टिकाऊ विकल्प है।
कंपनी का कहना है कि मशीन की पेटेंट तकनीक से खाद का कम उपयोग होता है और बीज की बर्बादी भी रुकती है। इससे खेती की लागत घटती है और किसानों की कमाई में वृद्धि होती है।
मध्य प्रदेश में हो रहा निर्माण, पंजाब-हरियाणा में हुए परीक्षण
इस मशीन का निर्माण मध्य प्रदेश के पीथमपुर स्थित महिंद्रा के विशेष फार्म मशीनरी प्लांट में किया जा रहा है। कंपनी के मुताबिक, यह मशीन महिंद्रा फार्म इक्विपमेंट बिजनेस के डीलरों के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। भारत भर के किसानों की अलग-अलग जरूरतों को पूरा करने के लिए इसे चरणबद्ध तरीके से बाजार में उतारा जाएगा, जिसकी शुरुआत सबसे पहले पंजाब और हरियाणा से की जा रही है।
कंपनी के अनुसार, पंजाब और हरियाणा के खेतों में किए गए परीक्षणों में यह साबित हुआ है कि मैक्ससीडर मशीन भारी पराली के बीच भी मिट्टी को कम से कम नुकसान पहुंचाए बिना बुवाई करने में पूरी तरह सक्षम है। इससे न केवल लागत में कमी आती है, बल्कि पर्यावरण को भी फायदा पहुंचता है।