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वैश्विक बाजार में चावल की कीमतें एक साल के रिकॉर्ड पर, फिर भी औसत से 10% सस्ता भारतीय चावल, निर्यात का क्या?

संतोष देव गिरि, मिर्जापुर Published by: Devesh Saraswat Updated Fri, 16 Oct 2026 05:34 PM IST
सार

  • वैश्विक औसत से करीब 10% सस्ता है भारतीय चावल
  • भारत के सफेद चावल की कीमत 385-390 डॉलर प्रति मीट्रिक टन
  • 2026-27 में वैश्विक चावल उत्पादन घटने का अनुमान
  • धान की बढ़ती लागत और माल ढुलाई से निर्यातकों पर दबाव
  • 2027 में वैश्विक चावल व्यापार 6.14 करोड़ टन रहने का अनुमान

वैश्विक चावल उत्पादन में गिरावट के खतरे ने कीमतों में तेजी लाने का काम किया है।
वैश्विक चावल उत्पादन में गिरावट के खतरे ने कीमतों में तेजी लाने का काम किया है। - फोटो : AI Image
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विस्तार
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दुनिया भर में चावल का उत्पादन घटने की आशंका और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों के बीच एक अहम खबर है। इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के अनुसार, भारत में चावल की कीमतें अभी भी वैश्विक औसत से लगभग 10 प्रतिशत कम हैं। रिपोर्ट के अनुसार, एक साल से अधिक समय में कीमतें अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचने के बावजूद भारतीय चावल ने बाजार में अपनी पकड़ और कीमतों में अपना फायदा बनाए रखा है।

वियतनाम और थाईलैंड के मुकाबले काफी सस्ता है भारत का चावल
IREF की विज्ञप्ति के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत का 5 प्रतिशत टूटा हुआ सफेद चावल (5% broken white rice) 385-390 अमेरिकी डॉलर प्रति मीट्रिक टन के भाव पर है। वहीं, इसके मुकाबले वियतनाम का चावल 440-450 डॉलर और थाईलैंड का चावल लगभग 480 डॉलर प्रति मीट्रिक टन के भाव पर बिक रहा है। इससे पता चलता है कि भारतीय चावल अन्य प्रमुख निर्यातक देशों की तुलना में काफी सस्ता है।

दुनिया में घटेगा उत्पादन, लेकिन भारत के पास पर्याप्त स्टॉक
फेडरेशन ने अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि दुनियाभर में चावल का उत्पादन 2025-26 के 545.7 मिलियन टन से घटकर 2026-27 में 533.1 मिलियन टन होने का अनुमान है। यानी वैश्विक स्तर पर करीब 12.6 मिलियन टन चावल कम पैदा होगा।

विज्ञप्ति के अनुसार, भारत का अपना चावल उत्पादन भी पहले के लगभग 154 मिलियन टन की तुलना में अब करीब 147 मिलियन टन रहने का अनुमान है। हालांकि, IREF का मानना है कि सरकार के पास चावल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। यह बड़ा सरकारी स्टॉक सप्लाई में आने वाली किसी भी रुकावट को रोकने, घरेलू खाद्य सुरक्षा को बनाए रखने और चावल के निर्यात को बिना रुके चालू रखने में पूरी मदद करेगा।

निर्यातकों की चुनौतियां और 2027 का अनुमान
IREF के पंजाब प्रदेश अध्यक्ष और ईस्टमैन इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अमन सिंगल के अनुसार, सस्ती कीमतों की वजह से भारतीय चावल ने अफ्रीका और एशिया के बाजारों में अपनी मजबूत जगह बनाए रखी है। लेकिन धान की बढ़ती लागत, माल ढुलाई (भाड़ा) के बढ़ते खर्च और फसल की उपलब्धता को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण निर्यातकों के मुनाफे पर दबाव पड़ रहा है।

अमन सिंगल ने कहा, "केवल सस्ती निर्यात कीमतें ही काफी नहीं हैं। बाजार में अपना दबदबा बनाए रखने के लिए हमें बेहतर और सस्ती माल ढुलाई (लॉजिस्टिक्स), स्थिर नीतियां और भरोसेमंद सप्लाई की जरूरत है।"

दिल्ली में होगा भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन 2026
अनुमान लगाया जा रहा है कि साल 2027 में वैश्विक चावल व्यापार लगभग 61.4 मिलियन टन रहेगा और भारत दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक बना रहेगा। खेती और बाजार के इन सभी हालात पर 23 से 25 अक्टूबर तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में होने वाले भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन 2026 में चर्चा की जाएगी। इस सम्मेलन में विशेषज्ञ चावल के उत्पादन, मांग, स्टॉक, मौसम के खतरों और 2027 के लिए कीमतों के संभावित हालात पर बात करेंगे।


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