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रबी बुवाई से पहले किसानों की चांदी : सरसों-चने का मंडी भाव MSP से 17-21% ऊपर, जानें गेहूं तक का हाल...

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Tue, 06 Oct 2026 10:01 AM IST
सार

  • सरसों और चने के मौजूदा मंडी भाव आगामी रबी सीजन के MSP से काफी ऊपर चल रहे हैं।
  • भरतपुर में सरसों 8,000 रुपये प्रति क्विंटल से ज्यादा के भाव पर बिक रही है।
  • चने का मंडी भाव 7,000 से 7,200 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है।
  • ऊंचे भाव के बीच व्यापारियों ने सरकार से 20 लाख टन चने का बफर स्टॉक जारी करने की मांग की है।

सरसों किसानों को फिलहाल MSP से काफी बेहतर दाम मिल रहा है।
सरसों किसानों को फिलहाल MSP से काफी बेहतर दाम मिल रहा है। - फोटो : AI Image
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विस्तार
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सरसों और चने जैसी प्रमुख रबी फसलों के मंडी भाव सरकार द्वारा 2027-28 के विपणन वर्ष (अप्रैल-जून) के लिए घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य से काफी ऊंचे स्तर पर चल रहे हैं। बुवाई के समय बाजार की इन मौजूदा कीमतों के कारण खाद्य महंगाई को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।

वैश्विक बाजार का घरेलू कीमतों पर असर
जानकारों का कहना है कि खाने के तेलों और दलहन की वैश्विक बाजार में ऊंची कीमतों ने रबी की बुवाई से पहले ही घरेलू बाजार में इन कृषि उत्पादों के दाम बढ़ा दिए हैं। भारत अपनी सालाना तेल खपत का लगभग 58 प्रतिशत आयात करता है। वैश्विक स्तर पर पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी के कच्चे तेल की महंगी कीमतों ने घरेलू बाजार में तिलहन की मांग को तेजी से बढ़ा दिया है।

सरसों के भाव में भारी उछाल
राजस्थान के प्रमुख व्यापारिक केंद्र भरतपुर में किसान फिलहाल अपनी पिछले सीजन की सरसों 8000 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक पर बेच रहे हैं। यह रबी 2026 के लिए घोषित 6613 रुपये प्रति क्विंटल के एमएसपी से 21 प्रतिशत अधिक है।

चने के भाव सात हजार के पार
देश के दलहन उत्पादन में 50 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखने वाले चने का मंडी भाव फिलहाल 7000 रुपये से 7200 रुपये प्रति क्विंटल के बीच चल रहा है। यह अगले सीजन के लिए घोषित 5958 रुपये प्रति क्विंटल के एमएसपी से 17 प्रतिशत ज्यादा है। सरकार के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, रबी फसलों के एमएसपी में की गई इस वृद्धि से किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित होगा और फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा। सरसों और चने की बुवाई अक्टूबर के अंत तक शुरू हो जाएगी।

व्यापारियों द्वारा बफर स्टॉक निकालने की मांग
चने के मौजूदा बाजार भाव को कम करने के लिए व्यापारियों ने सरकार से एक विशेष मांग की है। व्यापारियों ने आग्रह किया है कि नेफेड (Nafed) और एनसीसीएफ (NCCF) जैसी सरकारी एजेंसियों के पास रखे लगभग 2 मिलियन टन (20 लाख टन) चने के बफर स्टॉक को खुले बाजार में निकाला जाए ताकि कीमतों पर नियंत्रण पाया जा सके।

गेहूं के एमएसपी में मामूली वृद्धि
प्रमुख रबी फसल गेहूं की एमएसपी में 2026-27 सीजन के लिए केवल 25 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है। यह भाव पिछले सीजन के 2585 रुपये से बढ़कर 2610 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। सूत्रों का कहना है कि गेहूं के एमएसपी में इस मामूली बढ़ोतरी का मुख्य कारण सरकार के पास अनाज का भारी स्टॉक होना और तिलहन तथा दलहन के उत्पादन को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। किसान संगठन 'संयुक्त किसान मोर्चा' ने किसानों को दिए जाने वाले इस लाभकारी मूल्य में मामूली बढ़ोतरी के लिए सरकार की आलोचना की है।

खुले बाजार में बिक्री से गिर सकते हैं गेहूं के दाम
थोक व्यापार के प्रमुख केंद्र, राजस्थान के कोटा में फिलहाल गेहूं का बाजार भाव 2550 रुपये से 2800 रुपये प्रति क्विंटल के बीच है। आने वाले समय में इन कीमतों में नरमी आने की संभावना है। इसका कारण यह है कि सरकार जल्द ही थोक खरीदारों के लिए भारतीय खाद्य निगम के पास मौजूद अतिरिक्त स्टॉक से खुले बाजार में बिक्री योजना शुरू करने की तैयारी कर रही है। चालू वित्त वर्ष के लिए सरकार ने उचित और औसत गुणवत्ता वाले गेहूं का आरक्षित मूल्य 2600 रुपये प्रति क्विंटल और URS वाले गेहूं का आरक्षित मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।

गेहूं का बंपर सरकारी स्टॉक और रबी फसल का चक्र
वर्तमान में 1 अक्टूबर के मानक के अनुसार सरकार को 20.52 मिलियन टन बफर और रणनीतिक रिजर्व की आवश्यकता होती है, लेकिन इसके मुकाबले एफसीआई (FCI) के पास केंद्रीय पूल में 46.76 मिलियन टन से अधिक गेहूं का स्टॉक मौजूद है। रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष धर्मेंद्र जैन के अनुसार, बाजार की स्थितियों और आपूर्ति के आधार पर गेहूं की कीमतों में वृद्धि की गई है, क्योंकि सरकार के पास वर्तमान में अनाज का अतिरिक्त स्टॉक है। रबी फसलों की बुवाई आमतौर पर अक्टूबर और नवंबर के दौरान की जाती है, और फसल के पकने की अवधि के आधार पर फरवरी से इसकी कटाई शुरू हो जाती है।


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