दलहन बीज उत्पादन के लिए लाइसेंस दे रहा IIPR: दलहनी किस्मों के बीज तैयार कर बेच सकेंगी कारोबारी कंपनियां
डॉ. उमाशंकर मिश्र, कानपुर
Published by: Umashankar Mishra
Updated Thu, 01 Oct 2026 09:51 AM IST
सार
किसानों तक चना, अरहर, मसूर, मटर, मूंग और उड़द की उन्नत किस्मों के भरोसेमंद बीज पहुंचाने के लिए कानपुर स्थित भाकृअनुप-भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान (आईआईपीआर) ने बीज कंपनियों को साझेदारी का न्योता दिया है। लाइसेंस लेकर कंपनियां इन किस्मों का उत्पादन कर अपने ब्रांड से बीज बेच सकेंगी, ताकि संस्थान की शोध-सिद्ध किस्में हर गांव के किसानों तक पहुंच सकें। जानिए, विस्तार से...
यह अवसर सभी प्रमुख दलहनी फसलों के लिए है। चना, अरहर, मसूर, मटर, मूंग और उड़द की किस्में इस पहल में शामिल हैं।
- फोटो : AI Image
खेत में बोया गया बीज अच्छा हो, तो आधी जीत वहीं हो जाती है। किसानों तक चना, अरहर, मसूर, मटर, मूंग और उड़द की उन्नत किस्मों के भरोसेमंद बीज पहुंचाने के लिए कानपुर स्थित भाकृअनुप-भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान (आईआईपीआर) ने गैर-विशिष्ट लाइसेंसिंग का अवसर खोला है। लाइसेंस लेने वाली कंपनी को प्रजनक बीज, व्यावसायीकरण का अधिकार और तकनीकी सहयोग भी मिलेगा।
प्रयोगशाला में तैयार हुई दलहन की उन्नत किस्में अब कंपनियों के जरिये खेत-खेत तक पहुंचेंगी। आईआईपीआर ने बीज कंपनियों को अपनी किस्मों के उत्पादन और व्यावसायीकरण के लिए साझेदारी का न्योता दिया है। यह लाइसेंस गैर-विशिष्ट होगा, यानी एक ही किस्म के लिए कई कंपनियां लाइसेंस ले सकेंगी।
यह अवसर सभी प्रमुख दलहनी फसलों के लिए है। चना, अरहर, मसूर, मटर, मूंग और उड़द की किस्में इसमें शामिल हैं। लाइसेंस शुल्क हर किस्म के हिसाब से अलग तय होगा।
तीन साल का साथ, एकमुश्त शुल्क
लाइसेंस की वैधता तीन साल होगी, जिसे आपसी सहमति से आगे बढ़ाया जा सकेगा। इसके लिए कंपनी को एकमुश्त शुल्क देना होगा। संस्थान लाइसेंसधारी को प्रजनक बीज की आपूर्ति करेगा। कंपनियां देश के उन राज्यों में बीज बेच सकेंगी, जहां संबंधित किस्म अधिसूचना के अनुसार अनुशंसित है।
बीज आपका, ब्रांड भी आपका
लाइसेंस लेने वाली कंपनी आधार बीज और प्रमाणित बीज का उत्पादन कर सकेगी और उसे बाजार में उतार सकेगी। वह अपने ब्रांड नाम और ट्रेड नेम से बीज बेच सकेगी। शर्त बस इतनी है कि पैकेट पर किस्म का मूल नाम साफ दिखाई दे।
कसौटी पर खरा उतरना होगा
कंपनियों को बीज की आनुवंशिक शुद्धता बनाए रखनी होगी और बीज प्रमाणीकरण के मानकों का पालन करना होगा। उन्हें आईआईपीआर को सालाना उत्पादन रिपोर्ट सौंपनी होगी और बिक्री से पहले गुणवत्ता सुनिश्चित करनी होगी। मानक से कमतर बीज लॉट को नष्ट करना होगा और कानून के मुताबिक बीज के नमूने सुरक्षित रखने होंगे। बीज पैकेट पर "किस्म का विकास एवं लाइसेंस भाकृअनुप-आईआईपीआर, कानपुर द्वारा" लिखना अनिवार्य होगा।
किस्म का मालिकाना संस्थान के पास
बौद्धिक संपदा को लेकर नियम साफ हैं। किस्म का स्वामित्व आईआईपीआर के पास ही रहेगा। लिखित अनुमति के बिना लाइसेंसधारी न तो प्रजनन कर सकेगा, न किस्म में कोई सुधार। उप-लाइसेंस देने की छूट नहीं होगी और लाइसेंसधारी किस्म पर पेटेंट या पौधा किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण अधिनियम (पीपीवीएफआरए) के तहत दावा भी नहीं कर सकेगा।
शर्तें टूटीं तो लाइसेंस भी जाएगा
गुणवत्ता मानकों का उल्लंघन होने, लाइसेंस की शर्तें तोड़ने या किस्म का अनधिकृत उपयोग करने पर लाइसेंस समाप्त किया जा सकता है। किस्में पौधा किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 2001 के तहत संरक्षित हैं। विवाद की स्थिति में अधिकार क्षेत्र कानपुर, उत्तर प्रदेश होगा और मध्यस्थता भाकृअनुप के दिशा-निर्देशों के अनुसार होगी।
आईआईपीआर के साथ साझेदारी क्यों?
संस्थान के अनुसार, भाकृअनुप की विकसित उन्नत किस्में, विश्वसनीय राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान का साथ, प्रामाणिक प्रजनक बीज स्रोत, व्यावसायिक बीज उत्पादन का अधिकार और तकनीकी सहयोग व गुणवत्ता निगरानी इस साझेदारी की खूबियां हैं। संस्थान का कहना है, "सशक्त बीज कंपनियां, समृद्ध किसानों का भविष्य।"
यहां करें संपर्क
इच्छुक कंपनियां भाकृअनुप-भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कल्याणपुर, कानपुर-208024 (उत्तर प्रदेश) से संपर्क कर सकती हैं। ईमेल: director.iipr@icar.gov.in और iipritmu@gmail.com। मोबाइल: +91 94545 54433
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