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Matar Ki Kheti: मटर की बंपर पैदावार चाहिए तो जान लें खेती का पूरा तरीका, खाद से बीज तक की जानकारी

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Fri, 06 Nov 2026 07:30 PM IST
सार

मटर की खेती से अच्छी कमाई करना चाहते हैं? जानें उन्नत किस्में, प्रति हेक्टेयर बीज की मात्रा, खाद और सिंचाई का सही तरीका। वैज्ञानिक खेती से बढ़ाएं उत्पादन।

मटर की खेती
मटर की खेती - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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मटर की खेती किसानों के लिए अच्छी कमाई का विकल्प बन सकती है। बाजार में हरी मटर के साथ सूखे दानों की भी अच्छी मांग रहती है। इसका इस्तेमाल सब्जी, दाल और कई तरह के खाद्य उत्पाद बनाने में किया जाता है। ऐसे में किसान वैज्ञानिक तरीके से मटर की खेती करके बेहतर उत्पादन और मुनाफा हासिल कर सकते हैं। हालांकि, अच्छी पैदावार के लिए खेत की तैयारी, उन्नत किस्मों का चयन, खाद और सिंचाई का सही प्रबंधन जरूरी है।

मटर की खेती के लिए कैसी होनी चाहिए मिट्टी?
एग्रीकल्चर एक्सपर्ट के मुताबिक, मटर की अच्छी पैदावार के लिए भुरभुरी दोमट और बलुई दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है। खेत में पानी निकासी की उचित व्यवस्था होनी चाहिए, क्योंकि पानी जमा होने से पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। मिट्टी का पीएच मान 6.0 से 7.5 के बीच होना बेहतर रहता है।

खेत तैयार करने के लिए सबसे पहले मिट्टी पलटने वाले हल से जुताई करें। इसके बाद कल्टीवेटर या हैरो से एक-दो जुताइयां करके खेत को समतल बना लें। आखिरी जुताई से पहले अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद डालें। खेत को भुरभुरा और खरपतवार मुक्त रखने से बीज का अंकुरण अच्छा होता है।

मटर की ये उन्नत किस्में दे सकती हैं बेहतर उत्पादन
मटर की खेती में सही किस्म का चुनाव करना जरूरी है। किसान अपने क्षेत्र की जलवायु और बुवाई के समय के अनुसार किस्म चुनें। मटर की प्रमुख उन्नत किस्मों में अर्केल, आजाद पी-1, बोनविले, आजाद पी-2, रचना, डीएमआर-7, अलंकार और पंत मटर-42 शामिल हैं। किसानों को अपने क्षेत्र के कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) या कृषि विभाग से सलाह लेकर किस्म का चयन करना चाहिए। इससे स्थानीय मौसम के अनुकूल किस्म चुनने में मदद मिलेगी।

प्रति हेक्टेयर कितनी खाद और उर्वरक डालें?
मटर की अच्छी बढ़वार और पैदावार के लिए संतुलित खाद डालना जरूरी है। प्रति हेक्टेयर 20-25 किलो नाइट्रोजन, 60-70 किलो फॉस्फोरस और 30-40 किलो पोटाश का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा 10-15 टन अच्छी तरह सड़ी गोबर की खाद डालें। उर्वरकों की मात्रा मिट्टी की जांच और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार तय करें। खाद को सीधे बीज के संपर्क में न रखें।

एक हेक्टेयर में कितना बीज डालें?
एग्रीकल्चर एक्सपर्ट के अनुसार, मटर की खेती में बीज की मात्रा किस्म और दाने के आकार पर निर्भर करती है।
  • अगेती और बड़े दाने वाली किस्में: 100-120 किलो बीज प्रति हेक्टेयर।
  • मध्यम और पछेती किस्में: 80-90 किलो बीज प्रति हेक्टेयर।
बीज की अंतिम मात्रा उसकी अंकुरण क्षमता और किस्म के अनुसार तय करें।

सिंचाई करते समय इन बातों का रखें ध्यान
मटर की फसल में सिंचाई का प्रबंधन मिट्टी की किस्म, मौसम और पौधों की अवस्था को देखकर करना चाहिए। रेतीली मिट्टी में नमी जल्दी खत्म होती है, इसलिए वहां सिंचाई की जरूरत अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है। वहीं भारी मिट्टी में सिंचाई के बीच अधिक अंतर रखा जा सकता है। खेत में पानी जमा नहीं होने देना चाहिए। जलभराव से पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है और फसल की बढ़वार प्रभावित हो सकती है।

वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर बढ़ेगी कमाई
मटर की अच्छी पैदावार के लिए खेत की तैयारी से लेकर बीज चयन, खाद और सिंचाई तक हर काम सही तरीके से करना जरूरी है। किसान मिट्टी की जांच करवाकर उर्वरकों का इस्तेमाल करें और स्थानीय कृषि विशेषज्ञों की सलाह अपनाएं। इससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन बेहतर करने में मदद मिल सकती है। अच्छी गुणवत्ता वाली उपज मिलने से किसानों को बाजार में बेहतर दाम हासिल करने का अवसर भी मिलेगा।
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