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एक खेत में उगाएं दो फसलें: इन फसलों को साथ उगाकर घटाएं खेती की लागत, कम बारिश में भी होगी अच्छी कमाई

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Fri, 06 Nov 2026 07:47 PM IST
सार

बुंदेलखंड में कम बारिश और बढ़ती गर्मी के बीच किसान अंतरवर्तीय खेती अपना सकते हैं। जानें चना-मसूर, चना-सरसों और सब्जियों के साथ कौन-सी फसलें उगाने से फायदा मिल सकता है।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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बुंदेलखंड में पानी की कमी हमेशा से खेती-किसानी के लिए बड़ी चुनौती रही है। पिछले कुछ वर्षों में सिंचाई के संसाधन बढ़ने से यहां खेती की स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन इस बार मानसून में औसत से करीब 10 से 16 फीसदी कम बारिश होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। ऐसे में आने वाले समय में जल संकट की आशंका जताई जा रही है।

वहीं, फरवरी में ही तापमान बढ़ने से फसलों पर गर्मी का असर पड़ने की आशंका है। अलनीनो के प्रभाव और मौसम में बदलाव को देखते हुए कृषि वैज्ञानिक किसानों को ऐसी फसलें अपनाने की सलाह दे रहे हैं, जिन्हें कम पानी की जरूरत होती है और जो अधिक तापमान को भी सहन कर सकती हैं। इसके लिए किसान अंतरवर्तीय खेती यानी एक ही खेत में दो फसलें उगाने का तरीका अपना सकते हैं।

एक खेत में दो फसलें उगाकर बढ़ाएं कमाई
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, किसान रबी सीजन में चना, सरसों, अलसी और मसूर जैसी फसलों की अंतरवर्तीय खेती कर सकते हैं। इसमें एक ही खेत में दो अलग-अलग फसलें निश्चित कतारों में बोई जाती हैं। इसके लिए ऐसी फसलों का चयन करना चाहिए, जिनकी ऊंचाई और बढ़ने का तरीका अलग-अलग हो, ताकि दोनों फसलों को पर्याप्त जगह और धूप मिल सके।

किसान इन फसलों को एक साथ उगा सकते हैं
  • अलसी के साथ मसूर
  • चने के साथ सरसों
  • सरसों के साथ मसूर
  • अलसी के साथ चना

इन फसलों को कम पानी में उगाया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, उचित फसल चयन और मौसम के अनुकूल प्रबंधन से एक सिंचाई में भी बेहतर उत्पादन लेने का अवसर मिल सकता है। इससे पानी और खेती की लागत बचाने में मदद मिलेगी।

सब्जियों के साथ भी उगा सकते हैं दूसरी फसल
अंतरवर्तीय खेती का तरीका सिर्फ दलहन और तिलहन फसलों तक सीमित नहीं है। किसान सब्जियों के खेत में भी दूसरी फसल लगाकर अतिरिक्त आमदनी हासिल कर सकते हैं।
  • गोभी के साथ गेंदा और धनिया लगा सकते हैं।
  • आलू के खेत में गेंदा, धनिया और पालक उगा सकते हैं।
  • टमाटर, बैंगन और मिर्च की कतारों के बीच धनिया और पालक लगा सकते हैं।
  • सब्जियों के साथ गेंदा उगाकर अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं।

इससे एक ही खेत से अलग-अलग फसलों का उत्पादन मिल सकता है। हालांकि, फसलों के बीच उचित दूरी और बुवाई का समय ध्यान में रखना जरूरी है।

मिट्टी की सेहत सुधारने में भी मिलेगी मदद
दलहन फसलों को अंतरवर्तीय खेती में शामिल करने का एक फायदा मिट्टी की सेहत से भी जुड़ा है। चना और मसूर जैसी दलहनी फसलें अपनी जड़ों में मौजूद राइजोबियम बैक्टीरिया की मदद से वायुमंडलीय नाइट्रोजन को मिट्टी में उपलब्ध कराने में मदद करती हैं। इससे मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में सहयोग मिलता है।

वहीं, अलग-अलग फसलों को एक साथ उगाने से किसानों को एक ही फसल पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। यदि मौसम की मार से एक फसल प्रभावित होती है, तो दूसरी फसल से कुछ आमदनी मिलने की संभावना बनी रहती है। इस तरह कम बारिश और बढ़ते तापमान की चुनौती के बीच अंतरवर्तीय खेती बुंदेलखंड के किसानों के लिए उपयोगी विकल्प बन सकती है। सही फसल चयन और वैज्ञानिक प्रबंधन से किसान पानी की बचत के साथ खेती की लागत घटाने और आमदनी बढ़ाने की दिशा में कदम उठा सकते हैं।
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