कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने खरीफ फसलों की बुआई के नए आंकड़े जारी किए हैं। इसके अनुसार, इस बार खरीफ फसल की बुवाई 575 लाख हेक्टेयर के पार हो चुकी है। पिछले साल इसी अवधि में 521.25 लाख हेक्टेयर की बुवाई हुई थी। अच्छी बात ये है कि इस बार दलहन और तिलहन की बुवाई में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिली है। धान की बुवाई का रकबा भी बढ़ गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इन फसलों के रकबे में हुई बढ़ोतरी का बाजार पर कितना और कैसा असर पड़ेगा? इस बढ़ोतरी के कारण क्या हैं? आइए समझते हैं...
पहले आंकड़े जान लीजिए
कृषि मंत्रालय के अनुसार, इस बार धान की बुवाई अब तक 115.64 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। पिछले बार इसी अवधि में 95.78 लाख हेक्टेयर बुवाई हुई थी। इसी तरह दलहनी फसलों के रकबे में भी इजाफा देखने को मिला है। पिछली बार इस समय तक 49.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुवाई हुई थी, जो इस बार बढ़कर 62.32 लाख हेक्टेयर पहुंच चुका है।
दलहनी फसलों का रकबा कैसे बढ़ा?
फसल
2023 में कितना था?
2024 में अब तक बुवाई का रकबा
अरहर
9.66
28.14
उड़द दाल
12.75
13.90
मूंगदाल
19.57
15.79
कुल्थी
0.12
0.12
अन्य दालें
7.40
4.37
तिलहनी फसलों का क्या हाल है?
4
तिलहन
140.43
115.08
a
मूंगफली
28.20
28.27
b
सोयाबीन
108.10
82.44
c
सूरजमुखी
0.51
0.34
d
तिल
3.21
3.59
e
रामतिल
0.20
0.02
f
अरंड़ी
0.16
0.39
g
अन्य तिलहन
0.05
0.04
कैसे बढ़ गया रकबा?
इसे समझने के लिए हमने कृषि वैज्ञानिक और पूसा नई दिल्ली के पूर्व निदेशक डॉ. एके सिंह से बात की। उन्होंने कहा, 'इस बार समय से पहले ही मानसून दे दस्तक दे दी। इसका फायदा किसानों को मिला और जल्द ही धान की बुवाई शुरू हो गई। इसी तरह दलहनी और तिलहनी फसलों को भी फायदा मिला।'
सरकार दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भर होने के लिए कई कदम उठा रही है। हाल ही में सरकार ने एलान किया था कि वह किसानों ने दलहनी फसलों की पूरी खरीदारी करेंगे। इसी तरह तिलहनी फसलों को लेकर भी उन्नतशील बीज किसानों को दिए जा रहे हैं। दलहनी और तिलहनी फसलों के मामले में सरकार के उठाए गए कदम किसानों को अपनी ओर खींच रहे हैं। किसानों को भी लगने लगा है कि इन फसलों में वह अच्छी कमाई कर सकते हैं। जब सरकार किसी चीज का भरोसा देती है तो जमीन पर उसका सकारात्मक असर पड़ना स्वाभाविक है।
रकबा बढ़ने का क्या पड़ेगा असर?
दिल्ली विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर और अर्थशास्त्री डॉ. पुरुषोत्तम आर्य कहते हैं, 'खरीफ फसलों का रकबा बढ़ना एक अच्छा संकेत है। अब सबकुछ मौसम के ऊपर निर्भर है। अगर फसलों के अनुकूल मौसम रहा तो अच्छी पैदावार होगी। धान के साथ-साथ दलहन और तिलहन की पैदावार बढ़ने का सीधा फायदा किसानों को मिलेगा। आयात का बोझ भी कम होगा और सरकार की नीति के अनुसार हम दलहनी और तिलहनी फसलों में आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत होंगे। पैदावार बढ़ने से आम लोगों को भी महंगाई से राहत मिलने की उम्मीद है।'
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।