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खेत में उगाएं कसूरी मेथी : किसान बढ़ाएं कमाई... जानें बुवाई से कटाई तक की जरूरी बातें

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Thu, 29 Oct 2026 05:20 PM IST
सार

कसूरी मेथी की खेती से कमाई बढ़ाना चाहते हैं? जानें नागौर में बुवाई का सही समय, पूसा कसूरी किस्म, खेत की तैयारी, सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण और बाजार से जुड़ी जरूरी बातें।

कसूरी मेथी
कसूरी मेथी - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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रबी सीजन में कसूरी मेथी की खेती किसानों के लिए आय बढ़ाने का एक अच्छा विकल्प बन सकती है। इसके सुगंधित पत्तों का इस्तेमाल सब्जी, पराठे और कई तरह के व्यंजनों में किया जाता है। बाजार में इसकी मांग को देखते हुए किसान सही बीज, समय पर बुवाई और बेहतर खेत प्रबंधन के जरिए अच्छी गुणवत्ता वाली फसल तैयार कर सकते हैं। हालांकि, खेती शुरू करने से पहले स्थानीय बाजार में इसकी मांग और संभावित भाव की जानकारी लेना जरूरी है।

नवंबर में करें बुवाई, मौसम का रखें ध्यान
नागौर क्षेत्र में कसूरी मेथी की बुवाई के लिए नवंबर का मध्य से आखिरी सप्ताह तक का समय उपयुक्त माना जाता है। हालांकि, बुवाई का सही समय स्थानीय तापमान, मिट्टी में नमी और मौसम की स्थिति पर निर्भर करता है। बहुत अधिक तापमान या खेत में ज्यादा नमी होने से बीजों के अंकुरण पर असर पड़ सकता है। इसलिए किसान खेत की स्थिति को देखते हुए बुवाई करें, ताकि पौधों की शुरुआती बढ़त अच्छी हो सके।

पूसा कसूरी किस्म का कर सकते हैं चयन
कसूरी मेथी की खेती में अच्छे बीजों का चुनाव महत्वपूर्ण है। पूसा कसूरी इसकी प्रचलित किस्मों में शामिल है। किसान अपने क्षेत्र की मिट्टी और जलवायु के अनुसार उपयुक्त किस्म चुनने के लिए कृषि विभाग या कृषि विशेषज्ञों से सलाह ले सकते हैं। बीज खरीदते समय उसकी शुद्धता, अंकुरण क्षमता, पैकेट पर दी गई जानकारी और वैधता की जांच करें। हमेशा अधिकृत विक्रेता से ही बीज खरीदें। इससे खराब बीजों पर होने वाले अनावश्यक खर्च से बचने में मदद मिल सकती है।

खेत की तैयारी और खाद पर दें ध्यान
अच्छी फसल के लिए बुवाई से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई करें। मिट्टी को भुरभुरा और खेत को समतल बनाएं, ताकि बीजों का अंकुरण बेहतर हो सके। खेत में जल निकासी की व्यवस्था भी जरूरी है। सिंचाई या बारिश के बाद पानी जमा होने से बीजों के अंकुरण और पौधों की बढ़वार पर बुरा असर पड़ सकता है।

मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए खेत में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद का इस्तेमाल किया जा सकता है। रासायनिक खाद की मात्रा तय करने के लिए मिट्टी की जांच कराएं और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ही उर्वरकों का प्रयोग करें।

जरूरत के अनुसार करें सिंचाई
बीजों की बुवाई के बाद खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखना जरूरी है। सिंचाई फसल की जरूरत और मिट्टी की स्थिति के अनुसार करें। खेत में अधिक पानी जमा होने से बचें, क्योंकि इससे पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। सही समय पर सिंचाई करने से फसल की बढ़वार में मदद मिलती है।

निराई-गुड़ाई से रखें खरपतवार पर नियंत्रण
फसल के शुरुआती विकास के दौरान खरपतवार पौधों के साथ पानी, पोषक तत्वों और जगह के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। इसलिए समय-समय पर निराई-गुड़ाई करके खरपतवार हटाते रहें। इससे फसल को बढ़ने के लिए बेहतर वातावरण मिलता है। यदि पौधों में कीट या रोग के लक्षण दिखाई दें, तो बिना विशेषज्ञ की सलाह के कीटनाशक का छिड़काव न करें।

कटाई के बाद गुणवत्ता का रखें ध्यान
कसूरी मेथी की कटाई के बाद पत्तियों की सफाई और सुखाने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। पत्तियों को साफ-सुथरी जगह पर उचित तरीके से सुखाएं, ताकि उनकी गुणवत्ता बनी रहे। अच्छी गुणवत्ता वाली उपज के विपणन में मदद मिल सकती है। किसान फसल बेचने से पहले स्थानीय मंडी में इसकी मांग, आवक और भाव की जानकारी जरूर लें।

किसानों के लिए जरूरी सलाह: कसूरी मेथी की खेती शुरू करने से पहले अपने क्षेत्र के कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र से बुवाई के समय, बीज दर, सिंचाई और खाद की मात्रा की जानकारी लें। इससे स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार खेती की योजना बनाने में मदद मिलेगी।
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