लहसुन की मांग सालभर बनी रहती है। इसका इस्तेमाल मसाले के साथ-साथ सब्जी और आयुर्वेदिक उत्पादों में भी किया जाता है। ऐसे में किसानों के लिए लहसुन की खेती कमाई का अच्छा विकल्प बन सकती है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, सही किस्म का चुनाव, संतुलित खाद और समय पर सिंचाई से इसकी पैदावार बेहतर की जा सकती है। कृषि एक्सपर्ट अनुसार, लहसुन की खेती के लिए यह समय अनुकूल है। इसकी बाजार में हरे लहसुन से लेकर पूरी तरह पकी कलियों तक मांग रहती है। पकी हुई कलियों को बाजार में बेहतर भाव मिल सकता है।
लहसुन की ये 5 किस्में हैं बेहतर विकल्प
लहसुन की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी अच्छी मानी जाती है। हालांकि, काली मिट्टी में भी इसकी अच्छी पैदावार हो सकती है। विशेषज्ञ के मुताबिक, किसान इन किस्मों का चुनाव कर सकते हैं—
यमुना सफेद (G-1)
यमुना सफेद-2 (G-50)
यमुना सफेद-3 (G-282)
भीमा पर्पल
वीएल गार्लिक-1
इन किस्मों की उत्पादकता अच्छी मानी जाती है। हालांकि, किस्म चुनते समय अपने क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
एक बीघे में करीब एक क्विंटल बीज की जरूरत
एक बीघे में लगभग एक क्विंटल लहसुन की कलियां बीज के रूप में लगती हैं। बुवाई के समय पौधे से पौधे के बीच करीब 4 इंच और कतार से कतार के बीच 5 इंच की दूरी रखनी चाहिए। खेत में गोबर या कंपोस्ट खाद का इस्तेमाल करने पर विशेषज्ञ ने प्रति बीघा करीब 5 टन खाद देने की सलाह दी है। रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल मिट्टी की जांच और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार करें। खाद की मात्रा मिट्टी की जरूरत और बीघे के स्थानीय माप के हिसाब से बदल सकती है।
30 और 50-60 दिन पर करें निराई-गुड़ाई
लहसुन की फसल में खरपतवार नियंत्रण के लिए बुवाई के करीब 30 दिन बाद पहली निराई-गुड़ाई करनी चाहिए। इसके बाद 50 से 60 दिन के आसपास दोबारा निराई-गुड़ाई करें। इससे खेत में खरपतवार कम होंगे और फसल की बढ़वार अच्छी हो सकेगी। फसल में जरूरत के अनुसार समय-समय पर सिंचाई करते रहें। ध्यान रखें कि खेत में नमी बनी रहे, लेकिन पानी जमा न हो।
150 दिन में तैयार हो सकती है फसल
विशेषज्ञ के मुताबिक, लहसुन की फसल सामान्य तौर पर करीब 150 दिन में तैयार हो जाती है। नवंबर के आसपास बुवाई करने पर फरवरी से अप्रैल के बीच इसकी खुदाई की जा सकती है। खुदाई का सही समय किस्म और मौसम पर निर्भर करेगा।
पत्तियां पीली पड़ें तो रखें इन बातों का ध्यान
लहसुन की फसल में पत्तियां पीली पड़ने की समस्या हो सकती है। इसके पीछे पोषक तत्वों की कमी, फफूंद या थ्रिप्स जैसे कीट कारण हो सकते हैं। माइट्स का प्रकोप भी फसल को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसी स्थिति में पहले समस्या की पहचान करें। जरूरत पड़ने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह से उचित दवा का इस्तेमाल करें। नीम के तेल या नीम की पत्तियों के घोल का छिड़काव भी कुछ कीटों के नियंत्रण में मदद कर सकता है, लेकिन इसका असर कीट और प्रकोप के स्तर पर निर्भर करता है।
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