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जौ की खेती में छिपा है मुनाफे का मौका : 110 दिन में तैयार होगी फसल... जानें बीज और किस्में

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sun, 08 Nov 2026 12:00 PM IST
सार

राजस्थान देश के कुल जौ उत्पादन का 60 से 65 फीसदी हिस्सा पैदा करता है। यहां की उत्पादकता राष्ट्रीय औसत से 20 से 25 फीसदी अधिक है। राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान के जौ प्रजनक एस एस राजपूत ने जौ की खेती पर महत्वपूर्ण जानकारी दी।
 

जौ की खेती में छिपा है मुनाफे का मौका
जौ की खेती में छिपा है मुनाफे का मौका - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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जौ की खेती के लिए राजस्थान की जलवायु, जमीन और पानी बहुत अनुकूल हैं। यह हल्की और क्षारीय लवणीय भूमि में भी सफलतापूर्वक उगाई जा सकती है। जौ को गेहूं की तुलना में दो से तीन कम सिंचाई की आवश्यकता होती है। इसमें उर्वरकों की जरूरत भी गेहूं से आधी होती है, जिससे किसानों की लागत कम आती है।

सामान्य प्रबंधन से किसान 50 से 60 क्विंटल प्रति हेक्टर तक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। संस्थान की नवीनतम किस्में 100 क्विंटल तक उपज दे सकती हैं। जौ में 10 से 12 फीसदी प्रोटीन और 5 से 10 फीसदी बीटा ग्लूकान जैसे महत्वपूर्ण तत्व पाए जाते हैं।

जौ की प्रमुख किस्में और उनके उपयोग
जौ मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है: दाना जौ, माल्ट जौ और छिलका रहित जौ। दाना जौ पशुओं के चारे और पारंपरिक खाद्यान्न के लिए है। इसकी नवीनतम किस्में आरडी 2899, आरडी 2786 हैं। माल्ट जौ औद्योगिक जरूरतों जैसे कॉर्नफ्लेक्स, चॉकलेट, बीयर और विस्की उद्योग में काम आता है। इसकी नवीनतम किस्म आरडी 3064 है, जिसकी उपज क्षमता 92 क्विंटल प्रति हेक्टर तक है। आरडी 2715 दोहरी उपयुक्तता वाली किस्म है, जो हरा चारा और दाना दोनों देती है।

बुवाई का समय और बीज की उपलब्धता
जौ की बुवाई का सबसे अच्छा समय 5 से 20 नवंबर है। राजस्थान में फसल 110 से 120 दिन में तैयार होती है, जबकि उत्तर प्रदेश में 15 से 20 दिन अधिक लगते हैं। एक हेक्टर के लिए 100 किलो बीज पर्याप्त होता है। ये किस्में राष्ट्रीय स्तर पर एनडब्ल्यूपीजेड और सीजेड जैसे क्षेत्रों के लिए उपयुक्त हैं। किसान एसकेएनयू सीड पोर्टल एप से बीज की उपलब्धता जान सकते हैं।
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