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Don T Rely Urea Dap Adding Only Npk Crops Isn T Enough Lack These Nutrients Can Reduce Yields
यूरिया-DAP पर न रहें निर्भर: फसल में सिर्फ NPK डालना काफी नहीं... इन पोषक तत्वों की कमी घटा सकती है पैदावार
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Mon, 12 Oct 2026 05:13 PM IST
सार
अच्छी पैदावार के लिए केवल खाद की मात्रा बढ़ाना जरूरी नहीं है, बल्कि फसल को सही समय पर सही पोषक तत्व देना अधिक महत्वपूर्ण है। मिट्टी की जांच और संतुलित पोषण प्रबंधन से किसानों को फसल की सेहत और उपज सुधारने में मदद मिल सकती है।
फसल से अच्छी पैदावार लेने के लिए केवल नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश देना ही काफी नहीं है। पौधों की सही बढ़वार, फूल आने, फल बनने और अच्छी गुणवत्ता वाली उपज के लिए सूक्ष्म पोषक तत्वों की भी जरूरत होती है। इनकी आवश्यकता भले ही कम मात्रा में होती है, लेकिन पौधों के विकास में इनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। जिंक, बोरॉन, आयरन, मैंगनीज और कॉपर जैसे तत्वों की कमी से फसल की बढ़वार और पैदावार प्रभावित हो सकती है।
जाने पौधों के लिए जरूरी 10 पोषक तत्व और उनके काम
1. जिंक (जस्ता) उर्वरक स्रोत : जिंक सल्फेट (उदाहरण के तौर पर 33% जिंक वाला उत्पाद)
जिंक पौधों की नई पत्तियों और टहनियों की बढ़वार में मदद करता है। यह कई एंजाइमों की क्रियाओं और पौधों के सामान्य विकास के लिए जरूरी है। इसकी कमी से पौधों की बढ़वार रुक सकती है और पत्तियां छोटी रह सकती हैं।
2. बोरॉन उर्वरक स्रोत : बोरेक्स (उदाहरण के तौर पर 10.5% बोरॉन वाला उत्पाद)
बोरॉन फूल आने, परागण, फल बनने और पौधों में कोशिकाओं के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी कमी से फूल और फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसकी सही मात्रा फसल के अनुसार तय करनी चाहिए, क्योंकि अधिक बोरॉन भी नुकसान पहुंचा सकता है।
3. आयरन (लोहा)
उर्वरक स्रोत : फेरस सल्फेट (उदाहरण के तौर पर 19% आयरन वाला उत्पाद)
आयरन पौधों में क्लोरोफिल बनने की प्रक्रिया में मदद करता है। इसकी कमी से खासकर नई पत्तियों की नसों के बीच पीलापन दिखाई दे सकता है। मिट्टी में आयरन मौजूद होने के बावजूद अधिक क्षारीय मिट्टी में पौधे इसे पर्याप्त मात्रा में नहीं ले पाते।
4. मैंगनीज
उर्वरक स्रोत : मैंगनीज सल्फेट (उदाहरण के तौर पर 32% मैंगनीज वाला उत्पाद)
मैंगनीज प्रकाश संश्लेषण और कई एंजाइमों की क्रियाओं के लिए जरूरी है। इसकी कमी से पत्तियों पर पीलापन और अन्य लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कमी की सही पहचान के बाद ही इसका इस्तेमाल करना चाहिए।
5. कॉपर (तांबा)
उर्वरक स्रोत : कॉपर सल्फेट (उदाहरण के तौर पर 24% कॉपर वाला उत्पाद)
कॉपर पौधों में एंजाइमों की क्रियाओं, चयापचय और सामान्य विकास में मदद करता है। इसकी कमी से पत्तियों और नई टहनियों का विकास प्रभावित हो सकता है। कॉपर की अधिक मात्रा पौधों के लिए नुकसानदायक हो सकती है।
6. मोलिब्डेनम
उर्वरक स्रोत : सोडियम मोलिब्डेट
मोलिब्डेनम पौधों को नाइट्रोजन का सही उपयोग करने में मदद करता है। दलहनी फसलों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण की प्रक्रिया के लिए भी यह महत्वपूर्ण है। इसकी जरूरत बहुत कम मात्रा में होती है।
7. मैग्नीशियम
उर्वरक स्रोत : मैग्नीशियम सल्फेट
मैग्नीशियम क्लोरोफिल का प्रमुख घटक है, इसलिए यह प्रकाश संश्लेषण के लिए जरूरी है। इसकी कमी से पुरानी पत्तियों में नसों के बीच पीलापन दिखाई दे सकता है। ध्यान दें : मैग्नीशियम सूक्ष्म पोषक तत्व नहीं, बल्कि द्वितीयक पोषक तत्व है।
8. कैल्शियम
उर्वरक स्रोत : कैल्शियम नाइट्रेट
कैल्शियम पौधों की कोशिकाओं की मजबूती, नई जड़ों और नई पत्तियों के विकास में मदद करता है। इसकी कमी से बढ़ते हिस्सों को नुकसान हो सकता है। टमाटर में फल के निचले हिस्से का सड़ना कैल्शियम की कमी से जुड़ा हो सकता है, हालांकि पानी की अनियमितता भी इसका प्रमुख कारण है। ध्यान दें : कैल्शियम भी द्वितीयक पोषक तत्व है, सूक्ष्म पोषक तत्व नहीं।
9. सल्फर (गंधक)
उर्वरक स्रोत : सल्फर आधारित उर्वरक
सल्फर प्रोटीन निर्माण और नाइट्रोजन के उपयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी कमी से नई पत्तियों में पीलापन और पौधों की बढ़वार में कमी हो सकती है। ध्यान दें : सल्फर भी द्वितीयक पोषक तत्व है। सल्फर आधारित उत्पादों में इसकी मात्रा उत्पाद के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
10. निकेल
उर्वरक स्रोत : निकेल युक्त उत्पाद, निर्धारित मात्रा में
निकेल पौधों के लिए बहुत कम मात्रा में जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्व है। यह यूरिया से मिलने वाले नाइट्रोजन के उपयोग से जुड़ी एंजाइम प्रक्रिया में भूमिका निभाता है। इसकी कमी सामान्य खेती में कम देखने को मिलती है। सावधानी : निकेल की अधिक मात्रा पौधों और मिट्टी के लिए नुकसानदायक हो सकती है। इसका इस्तेमाल कृषि विशेषज्ञ की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए।
क्लोरीन भी है जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्व
पौधों के लिए आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों में क्लोरीन भी शामिल है। यह प्रकाश संश्लेषण, कोशिकाओं में पानी के संतुलन और पौधों की सामान्य क्रियाओं में मदद करता है। इसकी कमी खेती में अपेक्षाकृत कम देखने को मिलती है।
किसान इन बातों का रखें ध्यान
मिट्टी की जांच कराएं : उर्वरक डालने से पहले मिट्टी की जांच कराना बेहतर रहता है।
कमी के लक्षण पहचानें : पत्तियों का पीलापन या पौधों की कमजोर बढ़वार हमेशा सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी के कारण नहीं होती। पानी, रोग, कीट और मिट्टी की स्थिति भी इसकी वजह हो सकते हैं।
सही मात्रा में इस्तेमाल करें : सूक्ष्म पोषक तत्व कम मात्रा में चाहिए। जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल फसल को नुकसान पहुंचा सकता है।
फसल के अनुसार उत्पाद चुनें : अलग-अलग फसलों और मिट्टी की स्थिति के अनुसार पोषक तत्वों की जरूरत बदलती है।
विशेषज्ञ की सलाह लें : उर्वरक की मात्रा, डालने का समय और इस्तेमाल का तरीका कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार तय करें।
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