महाराष्ट्र सरकार महिला किसान सशक्तिकरण अधिनियम 2026 के तहत महिलाओं को महिला किसान प्रमाण पत्र जारी कर रही है। एमएस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन की चेयर डॉ. सौम्या स्वामीनाथन के अनुसार, इस नए कानून के तहत उन महिलाओं को भी आधिकारिक तौर पर किसान की पहचान मिलेगी, जिनके नाम पर खेती की जमीन नहीं है। यह ऐतिहासिक कदम उन लाखों महिलाओं के लिए नए रास्ते खोलेगा जो फसल बोने, कटाई करने, पशुपालन, पोल्ट्री और मछली पालन जैसे काम करती हैं, लेकिन भूमि स्वामित्व न होने के कारण औपचारिक रूप से उन्हें किसान नहीं माना जाता था।
बिना जमीन के भी मिलेगी किसान की पहचान और सरकारी योजनाओं का लाभ
डॉ. स्वामीनाथन के लेख के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर कृषि कार्यबल में लगभग 60 प्रतिशत महिलाएं हैं, लेकिन उनके पास 15 प्रतिशत से भी कम भूमि का मालिकाना हक है। महाराष्ट्र के आंकड़े बताते हैं कि राज्य में 82 प्रतिशत ग्रामीण महिला कार्यबल कृषि में लगा है, जबकि केवल 15.5 प्रतिशत महिलाओं के पास ही जमीन है। जमीन का मालिकाना हक न होने के कारण महिलाओं को कृषि ऋण, फसल और पशु बीमा, सिंचाई सब्सिडी, मोटर पंप और किसान क्रेडिट कार्ड जैसी महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता था। साथ ही, वे एग्रीस्टैक (किसानों का डिजिटल डेटाबेस) और पीएम-किसान जैसी योजनाओं से भी बाहर रह जाती थीं। इस नए कानून में 'किसान' की परिभाषा को राष्ट्रीय किसान नीति (2007) के अनुरूप व्यापक बनाया गया है। अब इसमें फसल उगाने, पशुपालन, पोल्ट्री, मछली पालन, कृषि वानिकी और मशरूम की खेती करने वाली महिलाओं को भी शामिल किया गया है।
दस महीने में तैयार हुआ कानून, महिला किसानों की भागीदारी रही अहम
इस कानून को बनाने की प्रक्रिया सितंबर 2025 में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ एक बैठक के बाद शुरू हुई थी। इसके बाद महाराष्ट्र सरकार और एमएस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन के बीच एक समझौता हुआ। विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी ने इस कानून का ड्राफ्ट तैयार करने में कानूनी भागीदार की भूमिका निभाई। डॉ. स्वामीनाथन ने बताया कि जनवरी 2026 में मुंबई से शुरू होकर पुणे, छत्रपति संभाजीनगर और नागपुर में महिला किसानों, स्वयं सहायता समूहों, बैंकरों, वकीलों और सरकारी अधिकारियों के साथ व्यापक चर्चा की गई। महिलाओं से मिले सुझावों के आधार पर तैयार हुए इस बिल को 2 जुलाई 2026 को विधानसभा और विधान परिषद में सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। सितंबर 2025 की पहली बैठक से लेकर बिल पास होने तक की यह पूरी प्रक्रिया महज 10 महीने में पूरी कर ली गई।
राज्य स्तर पर निगरानी समिति और जिला स्तर पर मिलेगी सहायता
इस अधिनियम के तहत महिलाओं की मदद और कानून को सही तरीके से लागू करने के लिए कई नई व्यवस्थाएं की गई हैं। राज्य स्तर पर एक 'महिला किसान सशक्तिकरण सेल' और कानून के पालन की निगरानी के लिए एक 'राज्य स्तरीय निगरानी समिति' बनाई जाएगी। इसके अलावा, एक 'महिला किसान डेटाबेस' तैयार किया जाएगा, जिसमें प्रमाण पत्र पाने वाली हर महिला किसान की जानकारी होगी। राज्य के हर जिले और ब्लॉक में 'महिला किसान सहायता अधिकारी' नियुक्त किए जाएंगे, जो महिलाओं को प्रमाण पत्र प्राप्त करने और अन्य अधिकारों के बारे में जानकारी देंगे।
डॉ. सौम्या स्वामीनाथन के अनुसार, किसान की पहचान को जमीन के मालिकाना हक से अलग करना एक महत्वपूर्ण पहला कदम है। हालांकि, असली बदलाव तब आएगा जब ऋण, बीमा और सरकारी योजनाओं से जुड़ी नीतियां इस प्रमाण पत्र को मान्यता देंगी। इसके अलावा, महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए राज्यों को जमीन के रिकॉर्ड में महिलाओं को संयुक्त मालिकाना हक देने की दिशा में भी काम करना होगा।