आने वाले एक साल या उससे अधिक समय तक चीनी की महंगाई उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ा सकती है। उद्योग से जुड़े जानकारों का कहना है कि मौसम की मार के कारण इस सीजन में चीनी का उत्पादन काफी प्रभावित हुआ है और अगले सीजन में भी इसका भारी असर देखने को मिल सकता है।
सूखे और मौसम का असर
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के इन्फ्लेशन एनालिसिस डिवीजन को दी गई एक प्रस्तुति में, इंडियन फेडरेशन ऑफ ग्रीन एनर्जी के पश्चिमी क्षेत्रीय निदेशक दिलीप पाटिल ने बताया कि वर्तमान सीजन (अक्टूबर 2026-सितंबर 2027) के दौरान चीनी उत्पादन 15 प्रतिशत घटकर 27 मिलियन (2.7 करोड़) टन रह सकता है। उन्होंने इसके लिए कमजोर मानसून और अल-नीनो जैसे मौसम के हालातों को जिम्मेदार ठहराया। पाटिल के अनुसार, इसका सबसे ज्यादा असर महाराष्ट्र और उत्तरी कर्नाटक में दिख रहा है। हालांकि, नहर और ट्यूबवेल सिंचाई सुविधाओं के कारण उत्तर प्रदेश की स्थिति काफी बेहतर है और वहां फसल सुरक्षित है।
पाटिल का यह आकलन ऐसे समय में आया है जब अन्य हितधारक चीनी उत्पादन 27 से 29 मिलियन टन के बीच रहने की उम्मीद कर रहे हैं। वहीं, वैश्विक विश्लेषकों का अनुमान है कि यह उत्पादन 28.4 से 29.5 मिलियन टन के बीच रह सकता है।
पानी की कमी से नई बुवाई पर संकट
पानी की कमी और सूखे के कारण अगले सीजन की गन्ने की बुवाई भी प्रभावित होने की आशंका है। वेस्ट इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (पुणे) के कार्यकारी निदेशक अजीत चौगुले ने कहा कि मध्य महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में सूखे की स्थिति गंभीर है। इसके अलावा सांगली और कोल्हापुर जैसे पश्चिमी महाराष्ट्र के जिलों और पड़ोसी राज्य कर्नाटक में भी पानी की भारी कमी है। कोल्हापुर के एक चीनी ब्रोकर अभिजीत घोरपड़े के अनुसार, सिंचाई के लिए पानी की अनिश्चितता के कारण अगले सीजन के लिए गन्ने की नई बुवाई बुरी तरह प्रभावित होगी।
एमईआईआर कमोडिटीज के संस्थापक राहिल शेख ने कहा कि नई बुवाई न होने पर किसान मक्का और सोयाबीन की खेती की ओर रुख कर सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि गन्ने को बहुत पानी चाहिए और सूखे के कारण पेड़ी की फसल (कटाई के बाद जड़ों से उगने वाली नई फसल) भी खराब हो रही है। शेख ने उत्पादन 28 मिलियन टन के आसपास रहने का अनुमान जताया है।
गुड़ की तरफ झुकाव और उत्पादन में कमी
घोरपड़े ने बताया कि गन्ने की फसल कम होने, रिकवरी दर (गन्ने से चीनी निकलने की मात्रा) घटने और गुड़ बनाने वाली इकाइयों की तरफ गन्ने के जाने से चीनी उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा। कोल्हापुर के आसपास गुड़ बनाने वाली इकाइयां चीनी मिलों के मुकाबले गन्ने की ज्यादा कीमत दे रही हैं, जिससे किसानों ने उन्हें गन्ना बेचना शुरू कर दिया है।
दिलीप पाटिल के अनुमान के मुताबिक, देश में चीनी की खपत 28.5 से 29 मिलियन टन के बीच होगी, जबकि उनका उत्पादन अनुमान केवल 26-27 मिलियन टन का है। इसका मतलब है कि उत्पादन में 1.5 से 2.5 मिलियन टन की भारी कमी आएगी। आपूर्ति तंग होने के कारण इस बार एथेनॉल बनाने के लिए भी चीनी का इस्तेमाल न के बराबर होगा।
आयात की जरूरत और बढ़ती कीमतें
चीनी की बढ़ती कीमतों को देखते हुए आयात में तेजी आ सकती है। पाटिल का कहना है कि दीवाली के बाद आयात तेज होने की संभावना है। उन्होंने अनुमान जताया कि मिलों से निकलने वाली चीनी की कीमत 40-42 रुपये प्रति किलो तक नरम हो सकती है, जो 2027 की शुरुआत में 45 रुपये के आसपास रहेगी और जून-अक्टूबर 2027 के बीच 50 रुपये के पार जा सकती है।
राहिल शेख के मुताबिक, जब तक आपूर्ति नहीं बढ़ाई जाती, खुदरा बाजार में चीनी की कीमत 50 रुपये प्रति किलो से नीचे आने की उम्मीद नहीं है। उपभोक्ता मामलों के विभाग के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, फिलहाल देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत 58.87 रुपये प्रति किलो है, जो अलग-अलग जगहों पर 45 से 76 रुपये प्रति किलो के बीच बिक रही है। मिल गेट पर इसकी कीमत 5,000 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर है। दुनिया भर के बाजारों में भी इस साल चीनी की कीमतों में लगभग 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मार्च के लिए कच्ची चीनी का वायदा भाव 41,050 रुपये प्रति टन और सफेद चीनी का भाव 51,225 रुपये प्रति टन चल रहा है।
स्थिति को देखते हुए, उद्योग से जुड़े एक अनाम सूत्र ने कहा कि सरकार को सीजन के दौरान ‘पहले आओ-पहले पाओ’ के आधार पर कच्ची और सफेद चीनी के आयात की छूट देनी चाहिए। सूत्र ने सवाल उठाया कि आयात केवल उनके हाथ में क्यों छोड़ा जाना चाहिए जिनके पास टैरिफ रेट कोटा है।
सर्दियों का मौसम करेगा तय
27 अक्टूबर तक महाराष्ट्र में 98 मिलों (जिनमें 48 सहकारी क्षेत्र की हैं) ने गन्ने की पेराई शुरू कर दी है। राज्य में अब तक 5.5 मिलियन टन गन्ने की पेराई हो चुकी है, जिससे 7.27 प्रतिशत की रिकवरी मिली है।
पाटिल ने बताया कि 3 मिलियन टन के शुरुआती स्टॉक के कारण फिलहाल त्योहारों की मांग पूरी हो गई है और स्थिति नियंत्रण में है। लेकिन 2026-27 सीजन के लिए स्टॉक में बहुत कम चीनी बचेगी, जिससे 2027 की शुरुआत में कीमतें और उछल सकती हैं। घोरपड़े के मुताबिक, इस सीजन में गन्ने से चीनी की रिकवरी इस बात पर निर्भर करेगी कि सर्दियां कितनी पड़ती हैं। अगर ठंड कम पड़ी, तो चीनी की रिकवरी पर बुरा असर पड़ सकता है। पानी की स्थिति इतनी गंभीर है कि जिलाधिकारियों ने गन्ने और अन्य फसलों के लिए नदी का पानी छोड़ने पर पाबंदियां लगा दी हैं।