विज्ञापन
Home› Khabar Junction› Tnau Useful News For Maize Farmers Prices Could Reach 2 700 Quintal During The Harvest Season Keep An Eye O

TNAU: मक्का किसानों के लिए काम की खबर, कटाई सीजन में ₹2,700/क्विंटल मिल सकता है भाव, बिहार से सप्लाई पर नजर...

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Thu, 29 Oct 2026 09:58 AM IST
सार

  • मक्के का भाव 2,700 रुपये प्रति क्विंटल रहने का अनुमान
  • तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय ने फसल कटाई से पहले जारी किया बाजार पूर्वानुमान
  • बिहार से मक्के की आवक पर निर्भर करेंगी कीमतें
  • कम बारिश से मक्के की उपलब्धता और पैदावार पर असर की आशंका
  • पशु आहार, ईंधन और स्टार्च उद्योगों में बढ़ रही मक्के की मांग

तमिलनाडु  में मक्के के भाव को लेकर TNAU का बड़ा अनुमान।
तमिलनाडु में मक्के के भाव को लेकर TNAU का बड़ा अनुमान। - फोटो : AI Image
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

किसानों के लिए मक्के की कीमतों को लेकर एक अहम जानकारी सामने आई है। तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय के अनुसार, कटाई के सीजन के दौरान खेत पर मक्के का भाव 2,700 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास रहने की संभावना है। यह अनुमान विश्वविद्यालय के कृषि अर्थशास्त्र विभाग के तहत काम करने वाले घरेलू और निर्यात बाजार खुफिया सेल द्वारा तैयार किया गया है। सेल ने उदुमलपेट बाजार में पिछले 15 सालों के मक्के के भावों का विश्लेषण करने और एक बाजार सर्वेक्षण करने के बाद यह अनुमान लगाया है।

बिहार की आवक से तय होगी आगे की कीमत
विश्वविद्यालय के सेल ने बताया है कि आने वाले समय में मक्के की कीमतें काफी हद तक बिहार से आने वाली फसल (आवक) पर निर्भर करेंगी। इसलिए, किसानों को सलाह दी गई है कि वे बाजार की मौजूदा स्थिति और आवक को देखते हुए ही अपनी फसल बेचने का सही फैसला लें।

कम बारिश का फसल पर असर
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्र में उत्तर-पूर्वी मानसून की बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है। इस कम बारिश का सीधा असर तमिलनाडु में मक्के की उपलब्धता और इसकी कीमतों पर पड़ सकता है। घटती मानसूनी बारिश के कारण खरीफ सीजन की बुवाई का रकबा पहले ही प्रभावित हुआ है। इसके अलावा, संयुक्त राज्य कृषि विभाग  ने भी अपनी रिपोर्ट में बताया है कि भारत में सामान्य से कम बारिश का असर मक्के की पैदावार और इसके बोए गए क्षेत्र पर पड़ा है।

मक्के के लिए तमिलनाडु की दूसरे राज्यों पर निर्भरता 
आंकड़ों के मुताबिक, तमिलनाडु अपने 5.4 लाख हेक्टेयर रकबे से लगभग 33 लाख टन मक्के का उत्पादन करता है। राज्य के प्रमुख मक्का उत्पादक जिलों में सेलम, नमक्कल, पेरम्बलुर, अरियालुर, विल्लुपुरम और तिरुपुर शामिल हैं। अपने घरेलू उत्पादन के अलावा, मक्के की जरूरत पूरी करने के लिए तमिलनाडु अन्य राज्यों पर भी निर्भर है। राज्य में बिहार, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से मक्के की आपूर्ति होती है। कीमतों के उतार-चढ़ाव में इन राज्यों, खासकर बिहार से आने वाली फसल की भूमिका बहुत अहम होगी।

कई उद्योगों में तेजी से बढ़ी मांग
अब मक्का सिर्फ इंसानों के खाने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अन्य चीजों में भी इसका महत्व बढ़ गया है। पशु आहार (चारा), ईंधन में मिलाने (फ्यूल ब्लेंडिंग) और स्टार्च बनाने वाले उद्योगों की तरफ से मक्के की मांग में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, साल 2025-26 में भारत ने 144.08 लाख हेक्टेयर क्षेत्र से 550.93 लाख टन मक्के का उत्पादन किया है। देश में मक्के की सबसे ज्यादा पैदावार करने वाले प्रमुख राज्यों में मध्य प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, बिहार और आंध्र प्रदेश शामिल हैं।

मौसम के मौजूदा हालात और एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने वाली फसल स्थानीय आपूर्ति को काफी हद तक प्रभावित कर सकती है। इसलिए किसानों के लिए यह जरूरी है कि वे अपनी उपज बेचने का समय तय करने से पहले बाजार के मौजूदा भाव और बाहर से आने वाली फसल के रुझानों का अच्छे से आकलन कर लें।


विज्ञापन
विज्ञापन