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कम नमी ने बिगाड़ा खेल: रबी सीजन में गेहूं की बुवाई आधी से भी कम, दलहन-तिलहन भी पिछड़े

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Tue, 27 Oct 2026 02:39 PM IST
सार

  • गेहूं की बुवाई पिछले साल से 59% पीछे
  • 23 अक्टूबर तक केवल 11 हजार हेक्टेयर में बुवाई
  • कमजोर मानसून से रबी फसलों की बुवाई प्रभावित
  • पंजाब और राजस्थान में बारिश की भारी कमी
  • गेहूं उत्पादन का लक्ष्य 12.1 करोड़ टन

मिट्टी में कम नमी, देश के कई इलाकों में गेहूं की बुवाई पर संकट के बादल हैं।
मिट्टी में कम नमी, देश के कई इलाकों में गेहूं की बुवाई पर संकट के बादल हैं। - फोटो : AI Image
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विस्तार
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मिट्टी में कम नमी के कारण इस रबी सीजन गेहूं की शुरुआती बुवाई में काफी सुस्ती देखने को मिली है। आंकड़ों के अनुसार, 23 अक्तूबर तक मात्र 11 हजार हेक्टेयर में गेहूं बोया गया, जबकि बीते साल इसी समय यह आंकड़ा 27 हजार हेक्टेयर था। दूसरी तरफ कृषि मंत्रालय का कहना है कि अभी बस कुछ राज्यों में ही बुवाई का काम शुरू हुआ है। 

बीते मानसून सीजन में कम बारिश के कारण मिट्टी में कम नमी की समस्या उन इलाकों के लिए अधिक गंभीर है, जहां खेती-बाड़ी बारिश पर निर्भर है और सिंचाई सुविधाएं मजबूत नहीं हैं।  जानकार ऐसे इलाकों में राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, बुंदेलखंड और मध्य भारत के कुछ हिस्से गिनाते हैं। 

रिकॉर्ड उत्पादन का लक्ष्य, अल नीनो की चुनौती
सरकार ने इस रबी सीजन के लिए 121 मिलियन टन गेहूं उत्पादन का लक्ष्य तय किया है, जो पिछले सीजन के रिकॉर्ड 120.7 मिलियन टन उत्पादन से ज्यादा है। बता दें कि गेहूं की बुवाई का काम अक्तूबर-नवंबर तक चलता है। इस बार अल नीनो के कारण सर्दी के महीनों में भी तापमान बढ़ सकता है, जो फसल विकास के लिए अच्छी खबर नहीं है। 

सिंचाई का मोर्चा कमजोर, बुवाई से पैदावार तक संकट 
इस मानसून सीजन में 13 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। कमजोर मानसून के कारण रबी सीजन की शुरुआत में मिट्टी में नमी कम बचती है और जलाशयों-नहरों में भी पानी की उपलब्धता लुढ़क जाती है। गेहूं की फसल को बुवाई के बाद कई बार सिंचाई चाहिए होता है। ऐसे में बारिश की कमी कम रकबे से लेकर पैदावार पर संकट खड़ा कर सकती है।
 
प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों पर कमजोर मानसून की मार 
इस मानसून सीजन में कम बारिश का संकट पंजाब और राजस्थान जैसे राज्यों पर भी दिख रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि ये राज्य गेहूं के रकबे का 31 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं। पंजाब में 38 प्रतिशत और राजस्थान में 22 प्रतिशत मानसूनी बारिश पर कमी देखने को मिली है। 

दलहन-तिलहन की भी सुस्त शुरुआत
कृषि मंत्रालय के 23 अक्टूबर तक के आंकड़ों के अनुसार, गेहूं के अलावा अन्य रबी फसलों की बुवाई भी पिछले साल के मुकाबले पीछे चल रही है। धान का रकबा पिछले साल के 2.13 लाख हेक्टेयर के मुकाबले घटकर 1.02 लाख हेक्टेयर रह गया है।

दलहन फसलों की  बुवाई 4.39 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 3.27 लाख हेक्टेयर में हुई है। तिलहन का रकबा पिछले साल के 21.34 लाख हेक्टेयर से घटकर 13.38 लाख हेक्टेयर रह गया है। मोटे अनाजों के रकबे में बढ़त देखी गई है। यह 13,000 हेक्टेयर से बढ़कर 23,000 हेक्टेयर हो गया है। आंकड़ों के अनुसार, 23 अक्टूबर तक कुल रबी फसलों की बुवाई 18.02 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इसी समय तक 28.26 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी।


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