रिकॉर्ड उत्पादन का लक्ष्य, अल नीनो की चुनौती
सरकार ने इस रबी सीजन के लिए 121 मिलियन टन गेहूं उत्पादन का लक्ष्य तय किया है, जो पिछले सीजन के रिकॉर्ड 120.7 मिलियन टन उत्पादन से ज्यादा है। बता दें कि गेहूं की बुवाई का काम अक्तूबर-नवंबर तक चलता है। इस बार अल नीनो के कारण सर्दी के महीनों में भी तापमान बढ़ सकता है, जो फसल विकास के लिए अच्छी खबर नहीं है।
सिंचाई का मोर्चा कमजोर, बुवाई से पैदावार तक संकट
इस मानसून सीजन में 13 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। कमजोर मानसून के कारण रबी सीजन की शुरुआत में मिट्टी में नमी कम बचती है और जलाशयों-नहरों में भी पानी की उपलब्धता लुढ़क जाती है। गेहूं की फसल को बुवाई के बाद कई बार सिंचाई चाहिए होता है। ऐसे में बारिश की कमी कम रकबे से लेकर पैदावार पर संकट खड़ा कर सकती है।
प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों पर कमजोर मानसून की मार
इस मानसून सीजन में कम बारिश का संकट पंजाब और राजस्थान जैसे राज्यों पर भी दिख रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि ये राज्य गेहूं के रकबे का 31 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं। पंजाब में 38 प्रतिशत और राजस्थान में 22 प्रतिशत मानसूनी बारिश पर कमी देखने को मिली है।
दलहन-तिलहन की भी सुस्त शुरुआत
कृषि मंत्रालय के 23 अक्टूबर तक के आंकड़ों के अनुसार, गेहूं के अलावा अन्य रबी फसलों की बुवाई भी पिछले साल के मुकाबले पीछे चल रही है। धान का रकबा पिछले साल के 2.13 लाख हेक्टेयर के मुकाबले घटकर 1.02 लाख हेक्टेयर रह गया है।
दलहन फसलों की बुवाई 4.39 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 3.27 लाख हेक्टेयर में हुई है। तिलहन का रकबा पिछले साल के 21.34 लाख हेक्टेयर से घटकर 13.38 लाख हेक्टेयर रह गया है। मोटे अनाजों के रकबे में बढ़त देखी गई है। यह 13,000 हेक्टेयर से बढ़कर 23,000 हेक्टेयर हो गया है। आंकड़ों के अनुसार, 23 अक्टूबर तक कुल रबी फसलों की बुवाई 18.02 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इसी समय तक 28.26 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी।