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उत्तराखंड : पहाड़ों की ट्राउट मछली को मिलेगा बड़ा बाजार, नेपाल से लेकर ITBP तक बढ़ेगी मांग

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Mon, 19 Oct 2026 06:39 PM IST
सार

  • उत्तराखंड राज्य हिमालयी क्षेत्र में ट्राउट निर्यात करने वाला पहला राज्य बना है।

  • उत्तराखंड से सीमा सुरक्षा बल को ट्राउट मछली दी जा रही है।

  • रेखा जोशी ट्राउट से फिश बॉल्स, फिश फिंगर्स और फिश मोमोज बना रही हैं।

  • रेखा जोशी के मुताबिक, उनके तैयार उत्पादों की दैनिक बिक्री करीब 5,000 रुपये है।

ट्राउट मछली
ट्राउट मछली - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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उत्तराखंड में ट्राउट मछली पालन को बढ़ावा देने और मछली किसानों की कमाई बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने प्रयास तेज किए हैं। सोमवार, 19 अक्टूबर को मत्स्य विभाग के केंद्रीय सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने पिथौरागढ़ में कोल्डवॉटर फिशरीज क्लस्टर की समीक्षा बैठक की। इसमें ट्राउट मछली के उत्पादन, बाजार तक पहुंच, बेहतर कीमत, प्रसंस्करण और निर्यात की संभावनाओं पर चर्चा हुई। 

विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, उत्तराखंड हिमालयी क्षेत्र का पहला राज्य बन गया है, जो ट्राउट मछली नेपाल को निर्यात कर रहा है। यह राज्य भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) को भी ट्राउट की आपूर्ति करने वाला पहला राज्य है।

ट्राउट किसानों को बेहतर बाजार और दाम दिलाने पर जोर
बैठक में पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी आशीष कुमार भटगाईं ने जिले में मत्स्य पालन से जुड़ी उपलब्धियों और योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मछली किसानों को बेहतर कीमत दिलाने, बाजार से जोड़ने और मछली से तैयार दूसरे उत्पादों को बढ़ावा देने की जरूरत है। जिला प्रशासन ने मत्स्य विभाग के साथ मिलकर इन चुनौतियों पर काम करने का भरोसा दिया।

राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. बीके बेहेरा ने कोल्डवॉटर फिशरीज क्लस्टर कार्यक्रम की जानकारी दी। उन्होंने उत्पादन से पहले और बाद की व्यवस्थाओं में मौजूद कमियों को दूर करने के लिए अगले पांच साल का रोडमैप भी प्रस्तुत किया।

आईटीबीपी और सेना तक पहुंच सकती है ट्राउट मछली
केंद्रीय सचिव ने हिमालयी क्षेत्र के दूसरे राज्यों को भी आईटीबीपी और अन्य सशस्त्र बलों को ट्राउट मछली की आपूर्ति की संभावनाएं तलाशने का सुझाव दिया। इसके लिए केंद्र के मत्स्य विभाग के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) करने पर विचार करने को कहा गया।

आईटीबीपी के अतिरिक्त महानिदेशक संजय कुमार गुंज्याल ने बताया कि सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे पूर्वोत्तर राज्यों में आईटीबीपी को ट्राउट मछली की काफी जरूरत है। इससे इन राज्यों के मछली किसानों को भी बाजार मिल सकता है।

महिला किसान ने मछली के उत्पाद बेचकर बनाई पहचान
बैठक में ट्राउट मछली पालने वाले किसानों ने अपनी समस्याएं रखीं। किसानों ने बेहतर दाम, प्रशिक्षण, क्षमता विकास और उचित कीमत पर अच्छी गुणवत्ता वाला मछली आहार उपलब्ध कराने की मांग की। मुनस्यारी के एक किसान ने बताया कि आईटीबीपी को ट्राउट की आपूर्ति के लिए मिलने वाली कीमत, आहार और परिवहन की अधिक लागत को देखते हुए कम है।

महिला मछली किसान रेखा जोशी ने अपनी सफलता की कहानी साझा की। उन्होंने ट्राउट से मछली के बॉल्स, फिश फिंगर्स और फिश मोमोज जैसे उत्पाद तैयार करना शुरू किया है। उनके मुताबिक, इन उत्पादों की रोजाना बिक्री करीब 5,000 रुपये तक पहुंच जाती है। इससे पता चलता है कि मछली पालन के साथ प्रसंस्करण और नए उत्पाद तैयार करके भी कमाई बढ़ाई जा सकती है।

उत्पादन से लेकर निर्यात तक की व्यवस्था मजबूत करने की योजना
बैठक में ट्राउट के बीज की उपलब्धता, मछली आहार की आपूर्ति, उत्पादन बढ़ाने और कोल्ड चेन जैसी सुविधाओं को मजबूत करने पर चर्चा हुई। कोल्ड चेन ऐसी व्यवस्था है, जिसमें मछली जैसे जल्दी खराब होने वाले उत्पादों को कम तापमान पर सुरक्षित रखा और पहुंचाया जाता है।

केंद्रीय सचिव ने हवाई अड्डों और रेलवे स्टेशनों के पास कोल्ड स्टोरेज बनाने पर जोर दिया, ताकि ट्राउट मछली को घरेलू और विदेशी बाजारों तक पहुंचाना आसान हो सके। उन्होंने स्टार्टअप और उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाने, वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन करने और सहकारी मॉडल के जरिए क्लस्टर को मजबूत बनाने की भी बात कही।

समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (MPEDA) के अध्यक्ष पी. जवाहर ने किसानों को प्रशिक्षण देने और निर्यात के लिए तैयार करने की जरूरत बताई। उन्होंने मछली की कटाई के बाद उसे संभालने, गुणवत्ता बनाए रखने, प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन पर बेहतर काम करने का सुझाव दिया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के उपमहानिदेशक डॉ. जे.के. जेना ने ट्राउट पालन को आगे बढ़ाने में वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी सहायता की भूमिका बताई।

बैठक में अधिकारियों ने संबंधित परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड को भेजने पर भी जोर दिया। इसका उद्देश्य उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, भंडारण और बाजार तक पहुंच की व्यवस्था को मजबूत करना है।
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