कर्नाटक में सूखे और बदलते मौसम के बीच फसलों की स्थिति का पता लगाने के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सैटेलाइट और ड्रोन की मदद ली जाएगी। इससे फसलों में कीट और बीमारियों का पता लगाने, फसल की सेहत पर नजर रखने और गांव स्तर पर उत्पादन का अनुमान लगाने में मदद मिलेगी। इसका उद्देश्य फसल नुकसान का आकलन बेहतर करना और कृषि योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाना है।
कर्नाटक राज्य रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (KSRSAC) ने इस पायलट परियोजना को विकसित करने और इसका प्रदर्शन करने के लिए कंपनियों, एजेंसियों और स्टार्टअप से बोलियां आमंत्रित की हैं। यह परियोजना मुख्यमंत्री रायता चेतन्य कर्नाटक एग्रीटेक मिशन 2026 के तहत शुरू की जाएगी।
इन इलाकों में शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट
इस परियोजना को दो फसल सत्रों- रबी 2026-27 और खरीफ 2027-28—के दौरान लागू करने की योजना है। इसके लिए लगभग 500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र वाले दो अध्ययन क्षेत्र चुने गए हैं। पहले क्षेत्र में बेलगावी जिले का अथानी तालुक और विजयपुरा जिले का टिकोटा शामिल है। दूसरे क्षेत्र में रायचूर जिले के देवदुर्गा और सिंधनूर तथा कोप्पल जिले का कुस्तगी तालुक शामिल होगा।
राज्य सरकार के अनुसार, कर्नाटक के 240 में से 226 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है। फसल नुकसान का अनुमान 46,324 करोड़ रुपये से अधिक लगाया गया है। ऐसे में तकनीक की मदद से नुकसान का आकलन करना और प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करना अहम माना जा रहा है।
हर 15 दिन में जांची जाएगी फसल की सेहत
प्रस्तावित व्यवस्था में सैटेलाइट तस्वीरों, ड्रोन से मिले आंकड़ों, भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS), मौसम संबंधी जानकारी और खेतों से जुटाए गए आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाएगा। AI और मशीन लर्निंग की मदद से फसलों की पहचान की जाएगी। साथ ही, कीट और बीमारियों के संभावित प्रकोप का पता लगाने और फसलों की मौजूदा स्थिति पर नजर रखने की कोशिश होगी।
चुनी गई कंपनियां हर 15 दिन में फसलों की सेहत का आकलन करेंगी। जिन क्षेत्रों में फसल की स्थिति असामान्य या कमजोर दिखाई देगी, उनकी पहचान कर फसल की सेहत से जुड़े नक्शे और अलग-अलग फसलों के आंकड़े तैयार किए जाएंगे। इन नतीजों की खेतों में जाकर भी जांच की जाएगी, ताकि आकलन की सटीकता परखी जा सके।
जरूरत पड़ने पर ड्रोन से ली जाएंगी तस्वीरें
KSRSAC इस परियोजना के लिए उच्च गुणवत्ता वाली ऑप्टिकल और सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR) सैटेलाइट तस्वीरें, मौसम संबंधी आंकड़े और उपलब्ध GIS डेटा उपलब्ध कराएगा। खासकर खरीफ के मौसम में जब बादलों के कारण साफ सैटेलाइट तस्वीरें नहीं मिल पाती हैं, तब जरूरत के अनुसार ड्रोन से तस्वीरें ली जा सकती हैं।
गांव स्तर पर उत्पादन का अनुमान
परियोजना के तहत ऐसे मॉडल तैयार किए जाएंगे, जिनसे गांव स्तर पर फसल उत्पादन का अनुमान लगाया जा सके। इसके लिए खेतों से मिले आंकड़ों, फसल कटाई प्रयोगों (CCE), सैटेलाइट और ड्रोन तस्वीरों, मौसम की जानकारी तथा फसल की बढ़वार से जुड़े संकेतकों को एक साथ जोड़ा जाएगा। फिलहाल यह एक पायलट परियोजना है। इसे पूरे राज्य में लागू करने का फैसला इसके प्रदर्शन, अनुमान की सटीकता, जरूरी मंजूरियों और खरीद प्रक्रिया के बाद लिया जाएगा।
खेती में AI का इस्तेमाल बढ़ाने की तैयारी
कर्नाटक सरकार कृषि क्षेत्र में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने पर काम कर रही है। राज्य की मुख्य सचिव शालिनी रजनीश ने हाल ही में खेत से उपभोक्ता तक कृषि उपज की निगरानी के लिए भी तकनीकी व्यवस्था तलाशने की बात कही थी। नई परियोजना से फसलों की निगरानी और उत्पादन के आकलन में तकनीक की भूमिका बढ़ने की उम्मीद है।
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