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उत्तर प्रदेश : कुशीनगर कृषि विश्वविद्यालय को मिला पहला कुलपति, डॉ. रामजी सिंह संभालेंगे कमान

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sat, 17 Oct 2026 05:57 PM IST
सार

  • पहले कुलपति की नियुक्ति: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 16 अक्टूबर 2026 को डॉ. रामजी सिंह को नियुक्त किया।

  • तीन साल तक कार्यकाल: उनका कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तारीख से अधिकतम तीन वर्ष का होगा।

  • मऊ जिले से संबंध: डॉ. रामजी सिंह उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के पतेहपुर गांव के मूल निवासी हैं।

  • पौध रोग विज्ञान के विशेषज्ञ: उन्होंने पंतनगर विश्वविद्यालय से प्लांट पैथोलॉजी में एमएससी और पीएचडी की।

कुशीनगर कृषि विश्वविद्यालय के पहले कुलपति बने डॉ. रामजी सिंह
कुशीनगर कृषि विश्वविद्यालय के पहले कुलपति बने डॉ. रामजी सिंह - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में कृषि शिक्षा और अनुसंधान को नई दिशा देने की जिम्मेदारी अब डॉ. रामजी सिंह संभालेंगे। राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने 16 अक्टूबर 2026 को उन्हें कुशीनगर स्थित नवनिर्मित महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय का पहला कुलपति नियुक्त किया है। उनका कार्यकाल कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से अधिकतम तीन साल का होगा। पौध रोग विज्ञान, कृषि अनुसंधान और विश्वविद्यालय प्रशासन में लंबे अनुभव वाले डॉ. सिंह की नियुक्ति से क्षेत्र में कृषि शिक्षा को मजबूत करने और किसानों तक वैज्ञानिक तकनीक पहुंचाने की उम्मीद है।

इस नियुक्ति से विश्वविद्यालय के शैक्षणिक ढांचे को विकसित करने और कृषि क्षेत्र में शोध को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी भी उनके सामने होगी। उम्मीद है कि विश्वविद्यालय के माध्यम से पूर्वांचल के विद्यार्थियों को कृषि शिक्षा और शोध के बेहतर अवसर मिलेंगे, वहीं किसानों को फसल रोगों की पहचान, फसल संरक्षण और टिकाऊ खेती से जुड़ी वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

पंतनगर से पाई पीएचडी की डिग्री
डॉ. रामजी सिंह उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के पतेहपुर गांव के मूल निवासी हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई रानीपुर क्षेत्र के पतेहपुर से की। इसके बाद आजमगढ़ के चंडेश्वर महाविद्यालय से कृषि में स्नातक की डिग्री हासिल की।

कृषि विज्ञान में आगे की पढ़ाई के लिए वह गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर पहुंचे। यहां से उन्होंने पौध रोग विज्ञान (प्लांट पैथोलॉजी) में एमएससी और पीएचडी की डिग्री प्राप्त की। पौधों में होने वाली बीमारियों, उनके प्रबंधन और फसल संरक्षण से जुड़े इस विषय में उनकी विशेषज्ञता आगे चलकर उनके अकादमिक और शोध कार्यों का अहम हिस्सा बनी।

कृषि अनुसंधान और प्रशासन का लंबा अनुभव
डॉ. रामजी सिंह ने अपने करियर में शिक्षण, शोध और विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़ी कई जिम्मेदारियां निभाई हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार), लखनऊ में भी सेवाएं दीं। इसके बाद आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में काम किया।

उनके करियर का महत्वपूर्ण हिस्सा मेरठ स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में बीता। यहां उन्होंने प्रशिक्षण निदेशक और कुलसचिव सहित विभिन्न पदों पर जिम्मेदारी निभाई। नियुक्ति से पहले वह इसी विश्वविद्यालय में प्लांट पैथोलॉजी के प्रोफेसर और अनुसंधान निदेशक के पद पर कार्यरत थे। शिक्षण और शोध के साथ प्रशासनिक अनुभव भी उनके लिए नए विश्वविद्यालय को व्यवस्थित रूप से विकसित करने में उपयोगी हो सकता है।

निभाएंगे अहम जिम्मेदारियां
महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के पहले कुलपति के रूप में डॉ. सिंह के सामने शैक्षणिक व्यवस्था को विकसित करने, शोध गतिविधियों को बढ़ावा देने और विद्यार्थियों के लिए बेहतर अवसर तैयार करने जैसी अहम जिम्मेदारियां होंगी।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप व्यावहारिक और कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना भी विश्वविद्यालय के विकास का महत्वपूर्ण पहलू हो सकता है। आधुनिक कृषि तकनीकों के साथ स्थानीय कृषि परिस्थितियों और पारंपरिक ज्ञान को जोड़ने से विद्यार्थियों को खेती की वास्तविक चुनौतियों को समझने में मदद मिल सकती है।

विश्वविद्यालय के विकास से पूर्वांचल के युवाओं को अपने क्षेत्र में कृषि शिक्षा और अनुसंधान के अवसर मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए शैक्षणिक ढांचे, शिक्षकों, प्रयोगशालाओं और शोध सुविधाओं को मजबूत करना जरूरी होगा।

किसानों तक पहुंच सकती है कृषि अनुसंधान की जानकारी
पूर्वांचल के किसानों के लिए इस विश्वविद्यालय की भूमिका केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रहेगी। फसल रोगों की पहचान, पौधों का स्वास्थ्य, कीट एवं रोग प्रबंधन और टिकाऊ खेती जैसी जरूरतों पर शोध किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

डॉ. सिंह की प्लांट पैथोलॉजी में विशेषज्ञता के आधार पर विश्वविद्यालय में फसल संरक्षण से जुड़े शोध को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। कृषि वैज्ञानिकों और किसानों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करके शोध के निष्कर्ष खेतों तक पहुंचाए जा सकते हैं।

इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्रों, राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े संगठनों के साथ सहयोग महत्वपूर्ण होगा। यदि विश्वविद्यालय स्थानीय फसलों और किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखकर शोध और प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित करता है, तो क्षेत्र की कृषि उत्पादकता और खेती की टिकाऊ पद्धतियों को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है। डॉ. रामजी सिंह की नियुक्ति के साथ अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि उनके नेतृत्व में नया विश्वविद्यालय कृषि शिक्षा, शोध और किसान हितों के बीच कितना प्रभावी तालमेल स्थापित कर पाता है।
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