राजस्थान में मशरूम उत्पादन तेजी से बढ़ा है। साल 2017-18 से 2023-24 के बीच प्रदेश में मशरूम का उत्पादन 15.9 गुना बढ़कर 1.30 हजार टन से 20.69 हजार टन पहुंच गया। इस बढ़त के साथ राजस्थान मशरूम उत्पादन में देश में 13वें स्थान से नौवें स्थान पर पहुंच गया है। कम जगह में उत्पादन, कम समय में फसल तैयार होने और बाजार में बढ़ती मांग के कारण युवा किसानों, महिलाओं और छोटे किसानों के लिए मशरूम की खेती एक विकल्प बन रही है।
देश में भी मशरूम उत्पादन में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2019-20 में देश का कुल उत्पादन 2.11 लाख टन था, जो 2024-25 में बढ़कर 3.99 लाख टन हो गया। वर्ष 2025-26 में इसके 4.27 लाख टन रहने का अनुमान है।
उत्पादन लागत 70 से 120 रुपये प्रति किलो
मशरूम की सामान्य किस्मों की उत्पादन लागत करीब 70 से 120 रुपये प्रति किलोग्राम बताई गई है। थोक बाजार में इसकी कीमत करीब 200 रुपये प्रति किलोग्राम, जबकि खुदरा बाजार में 300 रुपये प्रति किलोग्राम तक है। राजस्थान के सीकर, झुंझुनूं, चूरू, जयपुर, दौसा, अलवर, भरतपुर, धौलपुर, नागौर, पाली, जालोर, जोधपुर, कोटा और उदयपुर जिलों में मशरूम का उत्पादन बढ़ रहा है। जयपुर, जोधपुर और उदयपुर जैसे पर्यटन शहरों के रेस्तरां में भी इसकी मांग बढ़ी है। दवा कंपनियों और रेस्तरां में बढ़ती मांग को भी मशरूम उत्पादन में वृद्धि की वजह बताया गया है।
राजस्थान की जलवायु के लिए मिल्की मशरूम अनुकूल
प्रदेश में मुख्य रूप से बटन, ऑयस्टर, मिल्की और पैडी स्ट्रॉ मशरूम का उत्पादन किया जा रहा है। राजस्थान की गर्म जलवायु में मिल्की मशरूम को अनुकूल माना गया है। यह 28 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान में अच्छी तरह बढ़ता है। वहीं, बटन मशरूम के उत्पादन के लिए 16 से 18 डिग्री सेल्सियस तापमान की जरूरत होती है। इसके लिए किसान नियंत्रित तापमान वाले कमरों का इस्तेमाल करते हैं।
मशरूम में विटामिन और कैल्शियम पाए जाते हैं। इसके अलावा, इसमें अल्जाइमर और कैंसर जैसी बीमारियों से बचाव से जुड़े गुण होने की बात कही गई है। इसी वजह से दवा उद्योग में भी इसकी मांग बताई गई है।
बिजली, सब्सिडी और विपणन की चुनौतियां
उत्पादन बढ़ने के बावजूद मशरूम किसानों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राजस्थान सरकार मशरूम उत्पादन को कृषि के बजाय उद्योग की श्रेणी में रखती है। इसके कारण किसानों को बिजली कनेक्शन और सब्सिडी का लाभ मिलने में परेशानी होती है। इसके अलावा, पर्याप्त बीज की उपलब्धता, तापमान नियंत्रण और मशरूम के विपणन से जुड़ी समस्याएं भी बनी हुई हैं। जनजातीय क्षेत्रों में आदिवासियों की आर्थिक स्थिति सुधारने के उद्देश्य से जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग को मशरूम उत्पादन से जुड़ी एक विशेष योजना भेजी गई है।