विज्ञापन
Home› Khabar Junction› Major Government Decision On Ethanol State Run Oil Companies Will No Longer Procure Ethanol Made From Sugarca

इथेनॉल पर सरकार का बड़ा फैसला : अब सरकारी तेल कंपनियां नहीं खरीदेंगी गन्ने से बना इथेनॉल, चीनी बाजार को मजबूती

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Sat, 17 Oct 2026 05:57 PM IST
सार

  • सरकारी तेल कंपनियों के लिए केंद्र ने एक नवंबर से बदले इथेनॉल खरीद के नियम
  • अब ये कंपनियां चीनी के सिरप और बी-हैवी शीरे से बने इथेनॉल की खरीद नहीं कर सकेंगी
  • यह कदम बाजार में चीनी की सप्लाई को मजबूत करने में भूमिका निभा सकता है।

प्रमुख गन्ना आधारित उत्पादों से बनने वाले इथेनॉल की खरीद पर एक नवंबर से रोक।
प्रमुख गन्ना आधारित उत्पादों से बनने वाले इथेनॉल की खरीद पर एक नवंबर से रोक। - फोटो : AI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

गन्ना आधारित इथेनॉल पर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। खबरों के अनुसार, केंद्र ने सरकारी ईंधन खुदरा विक्रेता कंपनियों को प्रमुख गन्ना आधारित उत्पादों से बने इथेनॉल की खरीद बंद करने का निर्देश दिया है। यह व्यवस्था 1 नवंबर से शुरू होने वाले देश के नए आपूर्ति वर्ष से प्रभावी होगी। गर्मियों के शुष्क मौसम के कारण गन्ने के उत्पादन पर असर पड़ा है, जिससे दुनिया भर में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

कमजोर मानसून और उत्पादन में गिरावट के चलते फैसला
दुनिया के दूसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक देश भारत में इस बार पिछले साल के मुकाबले कम फसल की स्थिति बनी है। एक शक्तिशाली अल नीनो के प्रभाव से बीते एक दशक से अधिक समय में सबसे कमजोर मानसून रहा, जिसके चलते बाजार में चीनी की उपलब्धता कम हुई है।

देश में आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता घटाने और किसानों को आमदनी का एक अतिरिक्त जरिया देने के प्रयासों के तहत गन्ने और अनाजों से इथेनॉल का उत्पादन बढ़ाया जाता रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने के अपने लक्ष्य को पांच साल पहले कर दिया था और इस लक्ष्य को वर्ष 2025 में हासिल भी कर लिया गया।

सरकारी रिफाइनरियों ने जारी किया 11 अरब लीटर का संयुक्त टेंडर
सरकार के नए निर्देशों का हवाला देते हुए देश की सरकारी रिफाइनरी कंपनियों ने नए आपूर्ति वर्ष के लिए करीब 11 अरब लीटर इथेनॉल खरीदने हेतु एक साझा टेंडर निकाला है। इन कंपनियों में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन, नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड शामिल हैं।

शुक्रवार को जारी टेंडर दस्तावेज के अनुसार, इस मात्रा बोली टेंडर में गन्ने के रस, चीनी, चीनी के सिरप और बी-हैवी शीरे से बनने वाले इथेनॉल के लिए कोई भी प्रस्ताव नहीं मांगा गया है।

इन विकल्पों से बने एथेनॉल की होगी खरीद
टेंडर के अनुसार, बोली में शामिल होने वाले आपूर्तिकर्ता केवल निर्धारित वैकल्पिक स्रोतों से बने एथेनॉल की ही पेशकश कर सकते हैं। इसके तहत सी-हैवी शीरे (C-heavy molasses), खराब हुए खाद्यान्न, भारतीय खाद्य निगम (FCI) से लिए गए अतिरिक्त चावल, मक्का और राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति के तहत स्वीकृत अन्य कच्चे माल से तैयार एथेनॉल की आपूर्ति की जा सकेगी।


विज्ञापन
विज्ञापन