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USA-China Trade: चीन ने अमेरिका से सोयाबीन खरीद की रफ्तार बढ़ाई, लेकिन 17 अरब डॉलर के कृषि सौदे पर पेंच फंसा

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Tue, 22 Sep 2026 12:09 PM IST
सार

  • चीन 2.5 करोड़ टन अमेरिकी सोयाबीन खरीद के लक्ष्य के आधे से ज्यादा हिस्से तक पहुंच चुका है।
  • अतिरिक्त 17 अरब डॉलर के अमेरिकी कृषि उत्पादों की खरीद में अब तक धीमी प्रगति है।
  • जानकार अतिरिक्त 17 अरब डॉलर की प्रतिबद्धता में सुस्ती को चीन की रणनीति से जोड़ रहे हैं
  • जानकारों का कहना है कि चीनी पर लागू अमेरिकी टैरिफ में कटौती से कृषि उत्पादों की चीनी खरीद का रास्ता खुल सकता है।
  • इस हफ्ते डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच अमेरिका में बैठक होने वाली है।

अमेरिका की सरकार और किसान अपनी उपज को खपाने के लिए चीन पर काफी निर्भर दिखाई दे रहे हैं।
अमेरिका की सरकार और किसान अपनी उपज को खपाने के लिए चीन पर काफी निर्भर दिखाई दे रहे हैं। - फोटो : AI
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विस्तार
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अमेरिका और चीन के बीच इस सप्ताह होने वाली राष्ट्रपति स्तरीय बैठक से पहले कृषि व्यापार पर दोनों देशों की प्रतिबद्धताओं पर बातचीत तेज हो गई है। इस बैठक की सफलता कई मोर्चों पर टिकी है, जिसमें कृषि व्यापार भी एक अहम भूमिका निभाता नजर आ रहा है।

चीन ने जमकर अमेरिकी सोयाबीन खरीदी है। आंकड़े बताते हैं कि सालाना 2.5 करोड़ अमेरिकी सोयाबीन खरीदने की चीनी प्रतिबद्धता आधे से ज्यादा पूरी हो चुकी है। आगामी अक्तूबर महीने में खरीद का लक्ष्य पूरा हो सकता है। हालांकि अमेरिकी कृषि उत्पादों की अतिरिक्त कम से कम 17 अरब डॉलर की खरीद काफी सुस्त है। कुछ जानकार इस सुस्त रफ्तार को चीन की रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं।

सोयाबीन की खरीद में तेजी
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर के अनुसार, अमेरिका में किसानों की वसंत में बोई गई फसलों की कटाई का समय होने के कारण अभी खरीद का समय है। ग्रीर के अनुसार, चीन सोयाबीन के मामले में वही कर रहा है जिसका उसने वादा किया था।

सोयाबीन की चीनी को जरूरत, 17 अरब डॉलर का क्या?
जानकार बताते हैं कि अमेरिकी सोयाबीन खरीद के लिए चीन की प्रतिबद्धता उसकी मौजूदा आयात जरूरत के अंदर है। हालांकि चीन 17 अरब डॉलर के अतिरिक्त कृषि उत्पादों की खरीद की प्रतिबद्धता को एक माध्यम की तरह इस्तेमाल कर सकता है, जिससे वे अमेरिका पर टैरिफ कम करने के लिए दबाव बना सकता है। 

मक्का और गेहूं की खरीद नहीं
सोयाबीन के अलावा अमेरिका की दूसरी प्रमुख कृषि उपज की चीन से खरीद अभी कमजोर है। अमेरिकी कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2026-27 सीजन के लिए अमेरिकी मक्का और गेहूं की बिक्री फिलहाल शून्य है।

सोरघम की खरीद इस साल जारी रही है। हालांकि, नेशनल सोरघम प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के प्रमुख टिम लस्ट के अनुसार, हाल में चीन की सोरघम मांग भी धीमी हुई है। अमेरिका के किसान चाहते हैं कि चीन 17 अरब डॉलर की प्रतिबद्धता के तहत मक्का, कपास, गेहूं और सोरघम जैसी दूसरी फसलों की भी खरीद बढ़ाए। मिसौरी के किसान मार्टी रिचर्डसन ने कहा कि चीन सोरघम खरीदता है, लेकिन इतनी बड़ी रकम की पूरी खरीद केवल सोरघम से संभव नहीं है।

टैरिफ में कमी से चीनी खरीद का रास्ता खुल सकता है
अमेरिकी कृषि उत्पादों की खरीद में टैरिफ एक बड़ी बाधा बने हुए हैं। दोनों देश अमेरिकी ऊर्जा और कृषि उत्पादों पर टैरिफ कम करने को लेकर चर्चा कर चुके हैं। कारोबारियों के अनुसार, टैरिफ में कमी से अमेरिका से कृषि खरीद बढ़ने का रास्ता खुल सकता है।

चीन ने अमेरिकी कृषि उत्पादों की खरीद के साथ-साथ दूसरे देशों से आपूर्ति बढ़ाकर आयात में विविधता लाने की रणनीति भी अपनाई है। अमेरिका से खरीद बढ़ाने के लिए उसे कनाडा, अर्जेंटीना, ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से होने वाली कुछ खरीद कम करनी पड़ सकती है।

अमेरिकी चावल उद्योग की चीन पर नजरें
इस बीच, अमेरिकी चावल उद्योग भी चीन में अधिक बिक्री की संभावना देख रहा है। लुइसियाना की कैनेडी राइस मिल की प्रमुख मेरिल कैनेडी फार ने कहा कि चीन को अमेरिकी चावल का निर्यात अब तक लगभग नहीं के बराबर रहा है और 17 अरब डॉलर की खरीद में चावल को शामिल करना अमेरिकी चावल उद्योग के लिए महत्वपूर्ण होगा।

अमेरिका-चीन कृषि व्यापार को मौसम, रूस-यूक्रेन युद्ध, ईंधन और उर्वरक की लागत, चीन की धीमी अर्थव्यवस्था और घरेलू कृषि आपूर्ति जैसी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। अमेरिकी कृषि क्षेत्र की उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच कृषि व्यापार अधिक नियमित हो, जबकि कुछ किसान चाहते हैं कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बैठक से बाजार में कोई ऐसा बदलाव न हो जिससे कृषि कीमतों पर दबाव बढ़े।
 
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