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UP सरकार का कदम : सभी जिलों में खुलेंगे पंचगव्य आउटलेट, देसी गो पालकों को लाभ, धूपबत्ती से गमलों तक की बिक्री

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Mon, 12 Oct 2026 06:17 PM IST
सार

  • यूपी सरकार का बड़ा फैसला, सभी 75 जिलों में खुलेंगे पंचगव्य उत्पादों के स्टोर 
  • दूध संग गोबर-गोमूत्र से भी होगी कमाई, देसी गाय पालकों को मिलेगा बाजार
  • इन आउटलेट्स पर गोबर के उपले, धूपबत्ती, अगरबत्ती, दीये, गमले और हस्तशिल्प बेचे जाएंगे।
  • दूध, दही, घी के साथ गोमूत्र और गोबर से बने उत्पाद भी उपलब्ध होंगे।
  • सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण इलाकों में रोजगार और स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा।

गाय आधारित उत्पादों को बाजार देने के लिए यूपी के सभी जिलों में खुलेंगे पंचगव्य आउटलेट।
गाय आधारित उत्पादों को बाजार देने के लिए यूपी के सभी जिलों में खुलेंगे पंचगव्य आउटलेट। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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यूपी सरकार ने गौ आधारित उत्पादों को बाजार देने के लिए प्रदेश के सभी 75 जिलों में पंचगव्य उत्पादों की बिक्री के लिए आउटलेट खोलने का फैसला लिया है। सरकार का मानना है कि इस तरह ग्रामीण इलाकों में रोजगार पैदा होगा। 

धूपबत्ती ेस दियों तक की होगी बिक्री
उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार, इन आउटलेट्स पर गाय के उत्पादों को कई अलग-अलग श्रेणियों में रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि पूजा-पाठ के सामान में गोबर के उपले, हवन कप, धूपबत्ती, अगरबत्ती और दीये शामिल होंगे। वहीं, घरों में इस्तेमाल के लिए गोबर से बने गमले और हाथ से बनी सजावटी वस्तुएं (हस्तशिल्प) भी बेची जाएंगी। इसके अलावा, पंचगव्य से बनी रोजमर्रा की जरूरत की चीजें और पर्यावरण के अनुकूल सामान भी इन आउटलेट्स पर उपलब्ध होगा। आयोग के अध्यक्ष का कहना है कि हर जिले में आउटलेट खुलने से स्थानीय स्तर पर काम करने वाले लोगों और उद्यमिता को काफी बढ़ावा मिलेगा।

दूध संग गोबर और गोमूत्र से भी होगी कमाई
आधिकारिक बयान के अनुसार, अब पशुपालन को सिर्फ दूध उत्पादन तक ही सीमित नहीं रखा जाएगा। गाय से मिलने वाले अन्य उत्पादों का भी व्यावसायिक इस्तेमाल किया जाएगा। इन आउटलेट्स पर दूध, दही और घी के अलावा गोमूत्र और गोबर से बनी अलग-अलग तरह की चीजें बेची जाएंगी। सरकार के अनुसार, डेयरी उत्पादों के अलावा गोबर से जैविक खाद, हवन सामग्री, धूपबत्ती, अगरबत्ती, दीये, गमले और घर सजाने का सामान तैयार किया जाएगा। इसके साथ ही, पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाने वाली गो-आधारित वस्तुओं के निर्माण को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

गांव के लोगों और महिलाओं को मिलेगा रोजगार
सरकार का मानना है कि गो-उत्पादों का एक व्यवस्थित बाजार बनने से गांव के स्तर पर काम करने वाले लोगों की भागीदारी बढ़ेगी। एक तरफ जहां किसान और गोपालक दूध और गोबर जैसी कच्ची सामग्री देंगे, वहीं स्थानीय लोग और छोटे व्यवसायी इनसे सामान बनाने, उनकी पैकिंग करने और उन्हें बाजार में बेचने का काम संभालेंगे। इस योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले स्वयं सहायता समूहों और छोटे उत्पादकों को भी अपने सामान के लिए एक बड़ा बाजार मिलेगा। सरकार के अनुसार, इससे गांवों में छोटे उद्योगों के विकास को प्रोत्साहन मिलेगा।

 


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