किसानों तक खेती की नई तकनीकें पहुंचाने और कृषि अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और सवाना सीड्स प्राइवेट लिमिटेड ने समझौता किया है। 12 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के पूसा स्थित राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर (NASC) में हुए इस समझौते का उद्देश्य कृषि अनुसंधान, नई तकनीकों के परीक्षण, किसान प्रशिक्षण और आधुनिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना है।
इस साझेदारी के तहत किसानों को बेहतर बीज और फसल उत्पादन तकनीकों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही, जलवायु के बदलते हालात के अनुकूल खेती, डिजिटल सलाह और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर भी काम किया जाएगा।
खेतों में नई तकनीकों का होगा परीक्षण
इस समझौते पर ICAR के उप महानिदेशक (कृषि विस्तार) डॉ. राजबीर सिंह और सवाना सीड्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अजय राणा ने हस्ताक्षर किए। इस दौरान कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव और ICAR के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट सहित दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
समझौते के तहत कृषि से जुड़ी नई तकनीकों पर संयुक्त शोध किया जाएगा। खेतों में उनका प्रदर्शन और परीक्षण करके यह समझने की कोशिश होगी कि किसानों के लिए कौन-सी तकनीक कितनी उपयोगी है। इसके अलावा किसानों को प्रशिक्षण देने और फसल उत्पादन से जुड़ी बेहतर विधियों की जानकारी पहुंचाने पर भी जोर रहेगा।
खेती में AI, ड्रोन और डिजिटल सलाह का इस्तेमाल
इस साझेदारी में आधुनिक तकनीकों को भी प्रमुखता दी गई है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सटीक खेती (प्रिसिजन एग्रीकल्चर), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और ड्रोन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की योजना है।
इन तकनीकों का उपयोग खेती की निगरानी, कृषि संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने और फसल उत्पादन को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है। किसानों तक डिजिटल माध्यमों से कृषि सलाह पहुंचाने पर भी काम किया जाएगा।
जलवायु के अनुकूल खेती को मिलेगा बढ़ावा
बदलते मौसम और जलवायु संबंधी चुनौतियों को देखते हुए इस साझेदारी में जलवायु के अनुकूल खेती पर भी ध्यान दिया जाएगा। बेहतर बीजों और उन्नत फसल उत्पादन तकनीकों के जरिए खेती को अधिक टिकाऊ बनाने के प्रयास होंगे।
ICAR के कृषि अनुसंधान और देशभर में फैले कृषि विस्तार नेटवर्क के साथ सवाना सीड्स के अनुभव का उपयोग करके नई तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने की कोशिश की जाएगी। इसका उद्देश्य किसानों की क्षमता बढ़ाना और कृषि विकास को अधिक टिकाऊ बनाना है।
हालांकि, इस समझौते से किसानों को मिलने वाले वास्तविक लाभ का आकलन इसके तहत शुरू होने वाली परियोजनाओं, खेतों में किए जाने वाले परीक्षणों और तकनीकों को अपनाने के नतीजों के आधार पर किया जा सकेगा।
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