गन्ने के उचित दाम और तौल में गड़बड़ी जैसी समस्याओं से जूझ रहे किसानों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। केंद्र सरकार ने इन समस्याओं के समाधान के लिए संयुक्त समिति बनाने का फैसला किया है। केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि सरकार किसानों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर रही है और जल्द ही राहत देने वाला फैसला लिया जा सकता है। उन्होंने किसानों से सड़क जाम कर आंदोलन नहीं करने की अपील भी की है।
मंगलवार को दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में जोशी ने बताया कि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में किसानों की समस्याओं पर तीन से चार घंटे तक बैठक हुई। इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकारी, संबंधित मंत्री और किसान संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में किसानों की समस्याएं सुनने के बाद उनके स्थायी समाधान के लिए संयुक्त समिति बनाने का निर्णय लिया गया।
समिति में किसान, वैज्ञानिक और सरकारी प्रतिनिधि होंगे शामिल
प्रल्हाद जोशी के मुताबिक, समिति में गन्ना किसान, कृषि वैज्ञानिक और केंद्र व राज्य सरकारों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह समिति किसानों की समस्याओं का अध्ययन करेगी और उनके समाधान के लिए जरूरी सुझाव देगी। उन्होंने कहा कि गन्ना किसानों की समस्याओं का समाधान एक-दो दिन में या किसी एक मंत्रालय के प्रयास से संभव नहीं है। इसके लिए अलग-अलग मंत्रालयों और राज्य सरकारों के बीच तालमेल जरूरी है। केंद्र सरकार इस दिशा में सभी राज्यों का सहयोग लेगी।
गन्ने के दाम से लेकर तौल में गड़बड़ी तक पर चर्चा
बैठक में गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP), न्यूनतम समर्थन मूल्य की मांग, गन्ने की तौल में अंतर और चीनी मिलों में होने वाली कथित अनियमितताओं पर चर्चा हुई। किसानों ने शिकायत की कि गन्ने की कटाई के बाद चीनी मिलों में करीब 9 फीसदी वजन की कटौती या बर्बादी दिखाए जाने से उन्हें नुकसान हो सकता है। गन्ने में चीनी की मात्रा के आकलन और तौल में गड़बड़ी के आरोपों पर भी विचार किया गया।
जोशी ने कहा कि राज्य सरकारों को ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की सलाह दी गई है। बैठक में व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए चीनी की अलग कीमत तय करने की मांग पर भी चर्चा हुई।
कर्नाटक में गन्ने का राज्य निर्धारित मूल्य लागू करने की मांग
बैठक में कर्नाटक के किसानों के लिए राज्य निर्धारित मूल्य (SAP) लागू करने की मांग भी उठी। किसानों की ओर से बताया गया कि तमिलनाडु, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में SAP की व्यवस्था है। ऐसे में कर्नाटक सरकार से भी इस दिशा में विचार करने की मांग की गई। SAP वह कीमत है, जिसे राज्य सरकार गन्ने के लिए निर्धारित करती है। यह केंद्र सरकार की ओर से तय FRP से अलग होती है।
किसानों से आंदोलन नहीं करने की अपील
प्रल्हाद जोशी ने उन दावों को खारिज किया कि किसान नेताओं के साथ हुई बैठक बिना किसी नतीजे के समाप्त हुई। उन्होंने बैठक को सकारात्मक और उपयोगी बताया। उनके मुताबिक, किसान नेता राजू शेट्टी ने भी संयुक्त समिति बनाने के फैसले पर सहमति जताई है।
जोशी ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों की समस्याओं को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने किसानों से आंदोलन का रास्ता नहीं अपनाने और धैर्य रखने की अपील की। उन्होंने भरोसा जताया कि सरकार जल्द ही इस मामले में आगे की कार्रवाई करेगी।
डीके शिवकुमार ने भी उठाया गन्ना किसानों का मुद्दा
इससे पहले कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सोमवार देर रात दिल्ली में केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने गन्ना किसानों की समस्याओं और 2026-27 के चीनी सीजन के लिए गन्ने की कीमत पर चर्चा की।
मुख्यमंत्री ने गन्ने की तौल कम दर्ज करने, तराजू में कथित छेड़छाड़ और कटाई के बाद परिवहन के दौरान किसानों के साथ धोखाधड़ी जैसे मुद्दे उठाए। उन्होंने राज्य में गन्ने का उचित मूल्य तय करने की मांग भी रखी।
शिवकुमार ने सोशल मीडिया पर बैठक की जानकारी साझा करते हुए कहा कि चर्चा का उद्देश्य कर्नाटक के गन्ना किसानों को उचित और लाभकारी मूल्य दिलाना तथा उनकी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करना था। उन्होंने केंद्र सरकार से राज्य की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए किसानों के हितों की रक्षा करने का आग्रह किया। अब किसानों की नजर संयुक्त समिति की सिफारिशों और केंद्र व राज्य सरकारों के अगले फैसलों पर है।
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