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वित्तीय गड़बड़ियों की होगी कड़ी निगरानी: सहकारी समितियों में कहां लगा पैसा, कहां हुई गड़बड़ी? सख्त हुए नियम

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Wed, 14 Oct 2026 05:50 PM IST
सार

  • ऑडिट के नए नियम अनिवार्य : बहु-राज्य सहकारी समितियों के लिए लेखापरीक्षा रिपोर्टिंग का एक समान प्रारूप तय किया गया है।

  • वित्तीय गड़बड़ियों की पहचान : NPA, बकाया कर्ज, जमा राशि और भुगतान में चूक जैसे मामलों पर नजर रखी जाएगी।

  • सदस्यों के पैसे की सुरक्षा : निवेश, शेयर पूंजी और धन के इस्तेमाल से जुड़े रिकॉर्ड की जांच होगी।

  • जोखिम वाली समितियों पर विशेष निगरानी : ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर अधिक जोखिम वाली समितियों की पहचान करने में मदद मिलेगी।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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केंद्र सरकार ने बहु-राज्य सहकारी समितियों में पारदर्शिता बढ़ाने और वित्तीय गड़बड़ियों पर रोक लगाने के लिए लेखापरीक्षा (ऑडिट) के नए नियम अनिवार्य किए हैं। सहकारिता मंत्रालय ने बहु-राज्य सहकारी सोसाइटी (लेखापरीक्षक की रिपोर्ट) आदेश, 2026 यानी MSCARO-2026 लागू करने की पहल की है। इसके तहत सहकारी समितियों के ऑडिट की रिपोर्ट एक तय प्रारूप में तैयार करनी होगी। इससे वित्तीय अनियमितताओं की पहचान करने और समितियों के कामकाज की निगरानी बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य सहकारी समितियों में वित्तीय अनुशासन, जवाबदेही और सुशासन को मजबूत करना है। इससे सदस्यों की जमा राशि और अन्य वित्तीय हितों की सुरक्षा पर भी जोर दिया जाएगा।

ऑडिट रिपोर्ट में देनी होगी स्पष्ट जानकारी
नई व्यवस्था के तहत लेखापरीक्षकों को वित्तीय स्थिति, प्रशासनिक व्यवस्था और नियमों के पालन से जुड़े सवालों के जवाब तय प्रारूप में देने होंगे। रिपोर्ट में कई बिंदुओं पर स्पष्ट रूप से ‘हां’ या ‘नहीं’ बताना होगा। जरूरत के अनुसार संबंधित टिप्पणियां भी दर्ज करनी होंगी। इससे अलग-अलग सहकारी समितियों की ऑडिट रिपोर्ट की तुलना करना और गड़बड़ियों को पहचानना आसान होगा। यह व्यवस्था कंपनी क्षेत्र में लागू लेखापरीक्षा रिपोर्टिंग नियमों की तर्ज पर तैयार की गई है।

वित्तीय गड़बड़ी के संकेत पहले मिल सकेंगे
नई व्यवस्था में सहकारी समितियों की वित्तीय स्थिति से जुड़े कई अहम पहलुओं की जांच की जाएगी। इनमें शामिल हैं-
  • डूबने के जोखिम वाले कर्ज : गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) और बकाया कर्ज की स्थिति।
  • पैसों की उपलब्धता : समिति के पास रोजमर्रा के भुगतान के लिए पर्याप्त धन है या नहीं।
  • जमा और कर्ज का हिसाब : जमा राशि, दिए गए कर्ज और उनके भुगतान की स्थिति।
  • उधारी का विवरण : कर्ज लेने और उसे चुकाने में हुई चूक की जानकारी।

इन जानकारियों से वित्तीय संकट के शुरुआती संकेत मिल सकेंगे। समय रहते कमियां सामने आने पर जरूरी सुधारात्मक कदम उठाने में मदद मिलेगी।

जोखिम वाली समितियों पर होगी खास नजर
नई व्यवस्था के तहत केंद्रीय सहकारी समितियों के पंजीयक (CRCS) को ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर अधिक जोखिम वाली समितियों की पहचान करने में मदद मिलेगी। ऐसी समितियों के निरीक्षण, जांच और जरूरी कार्रवाई को प्राथमिकता दी जा सकेगी। इससे निगरानी केवल नियमित जांच तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वित्तीय और प्रशासनिक जोखिम के आधार पर भी की जा सकेगी।

सदस्यों के पैसे और निवेश की जांच
सहकारी समितियों में सदस्यों की जमा राशि, निवेश और शेयर पूंजी से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की जाएगी। इसके साथ यह देखा जाएगा कि धन का इस्तेमाल निर्धारित नियमों के अनुसार हुआ है या नहीं। सदस्यता रिकॉर्ड और जरूरी वैधानिक मंजूरियों का सत्यापन भी किया जाएगा। इससे वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ाने और सहकारी संस्थाओं पर सदस्यों का भरोसा मजबूत करने में मदद मिलेगी।

प्रबंधन और बैठकों के नियमों की भी होगी जांच
नई व्यवस्था में सिर्फ पैसों का हिसाब ही नहीं, बल्कि समितियों के प्रबंधन और कामकाज की भी जांच होगी। इसमें निदेशक मंडल की संरचना, निदेशकों की पात्रता, वार्षिक आम सभाओं और बोर्ड बैठकों के आयोजन तथा जरूरी समितियों के गठन से जुड़े नियम शामिल हैं। इसके अलावा, संबंधित पक्षों के साथ किए गए लेन-देन और वैधानिक प्रावधानों के पालन की भी जांच की जाएगी। इससे समितियों में पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया और जवाबदेही को बढ़ावा मिलेगा।

CRCS पोर्टल से निगरानी, AI का भी इस्तेमाल
सरकार मानकीकृत ऑडिट रिपोर्ट की जानकारी को CRCS पोर्टल से जोड़ने की योजना बना रही है। इससे आंकड़ों की स्वचालित जांच, नियामकीय डैशबोर्ड और जोखिम का आकलन करने वाली व्यवस्था विकसित करने में मदद मिलेगी। भविष्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित विश्लेषण का भी इस्तेमाल किया जा सकेगा।

जहां लागू होगा, वहां साइबर सुरक्षा और धन शोधन रोकने से जुड़े नियमों के पालन की भी जांच की जाएगी। इसमें ग्राहक की पहचान, संदिग्ध लेन-देन की रिपोर्टिंग और संबंधित अधिकारियों की नियुक्ति जैसे पहलू शामिल होंगे।

चरणबद्ध तरीके से लागू होगी व्यवस्था
सहकारिता मंत्रालय ने समितियों को अपने सिस्टम और प्रक्रियाएं बेहतर बनाने का समय देने के लिए नई व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का प्रावधान किया है। शुरुआत में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय आकार वाली बड़ी सहकारी समितियों को इसके दायरे में लाने की बात कही गई है। आगे चलकर इसे 50 करोड़ रुपये से अधिक के निर्धारित वित्तीय आकार वाली समितियों तक विस्तारित करने का लक्ष्य है।

मंत्रालय के मुताबिक, MSCARO-2026 से सहकारी समितियों के ऑडिट में एकरूपता आएगी, वित्तीय जोखिम की पहचान बेहतर होगी और निगरानी मजबूत होगी। इससे सहकारी संस्थाओं के कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाने और सदस्यों के हितों की सुरक्षा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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