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Oilmeal Exports: भारत से खली का निर्यात 65% गिरा, दक्षिण अमेरिका के सस्ते सोयाबीन मील से बढ़ी प्रतिस्पर्धा

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Wed, 14 Oct 2026 05:36 PM IST
सार

  • जुलाई में निर्यात 65% घटा: भारत से तेलखली का निर्यात 4.22 लाख टन से गिरकर 1.48 लाख टन रह गया।

  • सोयाबीन मील को सबसे बड़ा झटका: इसका निर्यात करीब 90% गिरकर 17,810 टन रह गया।

  • भारतीय माल महंगा: जुलाई में भारतीय सोयाबीन मील की कीमत करीब 613 डॉलर प्रति टन थी, जबकि अंतरराष्ट्रीय कीमत लगभग 428 डॉलर थी।

सोयाबीन
सोयाबीन - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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भारत से खली (ऑयलमील) के निर्यात में जुलाई 2026 के दौरान बड़ी गिरावट दर्ज की गई। दक्षिण अमेरिका से सस्ती आपूर्ति, भारतीय सोयाबीन मील की ऊंची कीमत और समुद्री माल ढुलाई महंगी होने के कारण कुल निर्यात सालाना आधार पर 65 प्रतिशत घट गया। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के मुताबिक, जुलाई 2026 में भारत ने 1.48 लाख टन तेलखली का निर्यात किया, जबकि जुलाई 2025 में यह मात्रा 4.22 लाख टन थी।

SEA के कार्यकारी निदेशक बीवी मेहता ने बिजनेस लाइन को बताया कि भारतीय सोयाबीन मील को अर्जेंटीना और ब्राजील से आने वाली सस्ती आपूर्ति के कारण कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा। जुलाई 2026 में इसका निर्यात करीब 90 प्रतिशत गिरकर 17,810 टन रह गया, जबकि पिछले साल इसी महीने में 1,83,553 टन सोयाबीन मील का निर्यात हुआ था।

भारतीय सोयाबीन मील की कीमत ज्यादा
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय सोयाबीन मील की ऊंची कीमत भी निर्यात में गिरावट की बड़ी वजह बनी। जुलाई 2026 में भारतीय सोयाबीन मील की कीमत करीब 613 डॉलर प्रति टन थी, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत लगभग 428 डॉलर प्रति टन थी। इस अंतर के कारण भारतीय उत्पाद विदेशी खरीदारों के लिए महंगा पड़ रहा था। इसके अलावा, देश में सोयाबीन मील की ऊंची कीमत और पोल्ट्री व पशु आहार बनाने वाली कंपनियों की मांग के कारण निर्यात के लिए इसकी उपलब्धता और आकर्षण दोनों प्रभावित हुए।

समुद्री रास्ते लंबे होने से ढुलाई महंगी
लाल सागर क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने के कारण कई जहाजों को लंबे समुद्री रास्तों से गुजरना पड़ा। इससे माल पहुंचाने का समय और परिवहन खर्च बढ़ गया। यूरोप और पश्चिम एशिया भेजी जाने वाली खेपों पर इसका खास असर पड़ा। महंगी ढुलाई और भारतीय उत्पाद की ऊंची कीमत ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करना और मुश्किल बना दिया।

चार महीने में निर्यात 27% घटा
वित्त वर्ष 2026-27 के पहले चार महीनों यानी अप्रैल से जुलाई के दौरान भी भारत के कुल तेलखली निर्यात में गिरावट रही। इस अवधि में निर्यात घटकर 11.05 लाख टन रह गया, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की इसी अवधि में यह 15.16 लाख टन था। इस तरह निर्यात में 27 प्रतिशत की कमी आई।

बीवी मेहता के मुताबिक, इस गिरावट की मुख्य वजह सोयाबीन मील के निर्यात में कमजोरी, दक्षिण अमेरिकी देशों से प्रतिस्पर्धा और समुद्री माल ढुलाई की बढ़ी लागत रही। चीन को सरसों खली के निर्यात में बढ़ोतरी से कुछ राहत मिली, लेकिन इससे कुल गिरावट की भरपाई नहीं हो सकी।

सरसों खली का निर्यात बढ़ा, सोयाबीन मील पिछड़ा
अप्रैल-जुलाई 2026-27 के दौरान भारत का सरसों खली निर्यात बढ़कर 7.56 लाख टन हो गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह 7.40 लाख टन था। इसके उलट, सोयाबीन मील का निर्यात 6.76 लाख टन से घटकर 1.87 लाख टन रह गया। जुलाई में सरसों खली का निर्यात भी घटा और यह पिछले साल के 2,09,128 टन से कम होकर 96,539 टन रह गया।

चीन, बांग्लादेश और वियतनाम प्रमुख खरीदार
अप्रैल-जुलाई 2026-27 के दौरान चीन, बांग्लादेश और वियतनाम भारतीय तेलखली के प्रमुख खरीदार रहे।
  • चीन : भारत से 3.55 लाख टन तेलखली खरीदी, जबकि पिछले साल इसी अवधि में आयात 2.83 लाख टन था। इसमें 3.50 लाख टन सरसों खली शामिल थी।
  • बांग्लादेश : भारत से 1.72 लाख टन तेलखली का आयात किया, जबकि पिछले साल यह मात्रा 1.47 लाख टन थी। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा सरसों खली का रहा।
  • वियतनाम : भारत से तेलखली का आयात बढ़कर 1.08 लाख टन हो गया, जबकि पिछले साल अप्रैल-जून की अवधि में यह 75,901 टन था।

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