मिजोरम के म्यांमार सीमा के पास बसे एक दूरदराज गांव की 35 वर्षीय महिला किसान ने स्ट्रॉबेरी की खेती से अपनी पहचान दुनिया भर में बनाई है। कभी सरकारी नौकरी पाने का सपना देखने वाली मारि जेडटी लालरिथांगी ने छोटे स्तर पर स्ट्रॉबेरी उगाना शुरू किया था। आज वह दो हेक्टेयर जमीन पर 10 हजार से अधिक पौधों के साथ खेती कर रही हैं। उनकी सालाना कमाई 10 लाख रुपये से अधिक हो चुकी है। इस उपलब्धि के लिए संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने उन्हें सम्मानित किया है।
लालरिथांगी को वर्ष 2026 के लिए FAO की ‘कृषि-खाद्य व्यवस्था और ग्रामीण विकास में 100 महिला नायिकाओं’ की सूची में शामिल किया गया है। यह सम्मान अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष 2026 के तहत दिया गया है। मिजोरम की वह पहली महिला हैं, जिन्हें यह पहचान मिली है। दुनिया के 131 देशों से आए 600 से अधिक नामांकनों में से उनका चयन किया गया। इस सूची में भारत की दो महिलाएं शामिल हैं।
15 अक्टूबर को इटली की राजधानी रोम में FAO मुख्यालय में आयोजित विश्व खाद्य मंच के दौरान उन्हें यह सम्मान दिया गया। रोम से पीटीआई से बातचीत में लालरिथांगी ने खुशी जताते हुए ईश्वर, अपने परिवार और मिजोरम के बागवानी विभाग का आभार व्यक्त किया।
1,000 पौधों से शुरू किया सफर
लालरिथांगी मिजोरम के लॉन्गतलाई जिले के सांगाउ गांव की रहने वाली हैं। उन्होंने वर्ष 2024 में पड़ोसी सियाहा जिले के किसानों से स्ट्रॉबेरी की सफल खेती के बारे में जानने के बाद इसकी शुरुआत की। गांव से करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित खेत में उन्होंने लगभग 1,000 पौधे लगाए। अच्छी कमाई होने पर उन्होंने खेती का दायरा बढ़ाया और अब दो हेक्टेयर जमीन पर 10 हजार से अधिक पौधे लगा चुकी हैं।
उनकी मेहनत का असर कमाई में भी दिखाई दिया। खेती के पहले साल उन्हें करीब 1.5 लाख रुपये की आमदनी हुई। वर्ष 2025 में उनकी कमाई बढ़कर 10 लाख रुपये से अधिक हो गई। इस तरह उन्होंने सीमित संसाधनों के साथ शुरू किए गए प्रयोग को एक सफल कारोबार में बदल दिया।
स्ट्रॉबेरी से वाइन और कैंडी भी बना रहीं
लालरिथांगी केवल ताजी स्ट्रॉबेरी बेचने तक सीमित नहीं हैं। वह अपनी उपज के एक हिस्से से स्ट्रॉबेरी वाइन और कैंडी भी तैयार करती हैं। इन उत्पादों की बिक्री मुख्य रूप से स्थानीय बाजारों में होती है। इससे उन्हें अपनी उपज के अलग-अलग उत्पाद बेचने और कारोबार बढ़ाने का मौका मिला है।
सरकारी नौकरी की तैयारी छोड़ खेती को बनाया सहारा
लालरिथांगी ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) से समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने एक निजी स्कूल में शिक्षिका के रूप में काम किया और सरकारी नौकरी पाने के लिए कई प्रतियोगी परीक्षाएं भी दीं। बार-बार सफलता नहीं मिलने पर उन्होंने आय के दूसरे रास्ते तलाशने शुरू किए। उन्होंने तय किया कि आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए सरकारी नौकरी ही एकमात्र रास्ता नहीं है। इसके बाद उन्होंने खेती को अपनी आजीविका बनाने का फैसला किया।
यूट्यूब से सीखी खेती, परिवार ने भी दिया साथ
लालरिथांगी के पास स्ट्रॉबेरी की खेती का कोई औपचारिक प्रशिक्षण नहीं था। उन्होंने यूट्यूब पर उपलब्ध वीडियो देखकर खेती की तकनीक सीखी और दूसरे किसानों से भी जानकारी हासिल की। तीन बच्चों की परवरिश के साथ खेती संभालना उनके लिए आसान नहीं था। इसके बावजूद वह समय निकालकर देर रात तक खेती से जुड़ी जानकारियां पढ़ती और सीखती थीं।
उनके पति सांगाउ के एक सरकारी प्राथमिक स्कूल में शिक्षक हैं। पति और सास-ससुर ने उनके इस काम में सहयोग दिया। पति-पत्नी सप्ताहांत में खेत पर मिलकर काम करते हैं। FAO से मिले सम्मान से पहले भी लालरिथांगी को पहचान मिल चुकी है। उन्हें मिजोरम हॉर्टी फेयर 2026 में लॉन्गतलाई जिले की सर्वश्रेष्ठ किसान चुना गया था। अब उनकी सफलता दिखाती है कि सही जानकारी, मेहनत और नए प्रयोगों के सहारे दूरदराज के गांवों में भी खेती को कमाई का अच्छा जरिया बनाया जा सकता है।
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