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कमजोर मानसून में रबी की खेती कैसे बचाएं? : आप भी जानिए किसानों के लिए क्रॉपलाइफ की 4 जरूरी सलाह

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Wed, 14 Oct 2026 11:59 AM IST
सार

  • कमजोर मानसून का असर: 2015 के बाद सबसे कमजोर मानसून से कई इलाकों में मिट्टी की नमी घटी है।

  • बुवाई से पहले बीज उपचार: गेहूं और चने को बीज व मिट्टी से फैलने वाले रोगों से बचाने पर जोर।

  • जरूरत पर ही दीमक नियंत्रण: जिन खेतों में पहले दीमक का प्रकोप रहा है, वहीं उचित नमी होने पर उपचार की सलाह।

  • निगरानी के बाद छिड़काव: कीटों की संख्या और प्रकोप देखकर ही फसल सुरक्षा उत्पादों का इस्तेमाल करें।

रबी फसल
रबी फसल - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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रबी सीजन 2026-27 की बुवाई शुरू हो गई है। इस बार 2015 के बाद मानसून सबसे कमजोर रहने से कई इलाकों में मिट्टी में नमी की कमी है। ऐसे में किसानों को फसल की बुवाई से लेकर कीट और रोग नियंत्रण तक सावधानी बरतने की जरूरत है। कीटनाशक निर्माता कंपनियों के संगठन क्रॉपलाइफ इंडिया ने किसानों के लिए चार सूत्रीय सलाह जारी की है। संगठन के मुताबिक, सही समय पर जरूरी उपाय अपनाकर किसान खेती की लागत कम कर सकते हैं और फसल की पैदावार को नुकसान से बचा सकते हैं।

बुवाई से पहले बीज का उपचार करें
क्रॉपलाइफ इंडिया के अनुसार, बुवाई से पहले बीज का उपचार करना फसल को बीज और मिट्टी से फैलने वाले रोगों से बचाने का किफायती तरीका है। गेहूं में कंडुआ रोग ठंडे और नम मौसम में बढ़ सकता है। वहीं, चने में उकठा और जड़ सड़न जैसे रोग नमी की कमी और अधिक गर्मी से बढ़ सकते हैं। इसलिए किसान फसल के अनुसार उचित बीज उपचार करें।

जरूरत के हिसाब से करें दीमक नियंत्रण
किसानों को हर खेत में दीमक नियंत्रण के लिए दवा डालने की जरूरत नहीं है। जिन खेतों में पहले दीमक का प्रकोप रहा हो, वहां मिट्टी में पर्याप्त नमी होने पर ही उचित उपचार करें। इससे दवा का असर बेहतर हो सकता है और अनावश्यक खर्च से बचा जा सकता है। संगठन ने यह भी सलाह दी है कि जहां मिट्टी में पर्याप्त नमी हो, वहां अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में सरसों की बुवाई करने से फूल आने के समय माहू कीट का प्रकोप कम हो सकता है।

कीट दिखने पर ही करें दवा का छिड़काव
फसल में कीट या रोग नियंत्रण के लिए बिना जरूरत दवा का छिड़काव न करें। किसानों को नियमित रूप से खेत की निगरानी करनी चाहिए और कीटों का प्रकोप तय स्तर से अधिक होने पर ही नियंत्रण के उपाय अपनाने चाहिए।

उदाहरण के तौर पर, गेहूं में माहू की संख्या प्रति टिलर 10 से 15 से अधिक होने पर नियंत्रण की जरूरत का आकलन किया जा सकता है। कीट या रोग का असामान्य प्रकोप दिखाई देने पर किसान राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली (National Pest Surveillance System) या नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर सकते हैं।

अधिकृत विक्रेता से ही खरीदें कीटनाशक
किसान बीज उपचार और फसल सुरक्षा के लिए इस्तेमाल होने वाले उत्पाद अधिकृत विक्रेता से ही खरीदें। खरीदारी के समय पक्का बिल लें और दवा इस्तेमाल करने से पहले उसकी एक्सपायरी तारीख जरूर जांचें।

क्रॉपलाइफ इंडिया ने आगाह किया है कि मुश्किल कृषि परिस्थितियों में किसानों तक नकली या अवैध उत्पाद पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है। संगठन ने अवैध बिक्री पर सख्त कार्रवाई और ऑनलाइन बिक्री में लाइसेंस की जांच व उत्पादों की पहचान सुनिश्चित करने की मांग की है।

कमजोर मानसून के कारण बढ़ी सावधानी की जरूरत
क्रॉपलाइफ इंडिया के महासचिव दुर्गेश चंद्र ने कहा कि एक दशक से अधिक समय में सबसे कमजोर मानसून के कारण रबी सीजन की शुरुआत की परिस्थितियां बदल गई हैं। मिट्टी में नमी का असमान स्तर फसल की शुरुआती बढ़त, कीट-रोगों के प्रकोप और कृषि उत्पादों के असर को प्रभावित कर सकता है।

उन्होंने कहा कि आने वाले कुछ सप्ताह में किसान जो फैसले लेंगे, उनका असर पूरे सीजन पर पड़ेगा। ऐसे में सही समय पर उचित उपाय अपनाना जरूरी है, ताकि फसल सुरक्षित रहे और किसानों का निवेश भी बेकार न जाए।
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