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Palm Oil: इंडोनेशिया में घट सकता है पाम तेल का उत्पादन, भारत में महंगे हो सकते हैं पैकेज्ड फूड

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Wed, 14 Oct 2026 01:37 PM IST
सार

  • 2027 में उत्पादन घटने का अनुमान : इंडोनेशिया में पाम तेल का उत्पादन 40 से 50 लाख टन तक घट सकता है।

  • बायोडीजल से बढ़ेगी घरेलू मांग : B50 कार्यक्रम पूरी तरह लागू होने पर इंडोनेशिया में पाम तेल की खपत करीब 20 लाख टन बढ़ सकती है।

  • भारतीय कंपनियों की बढ़ सकती है लागत : ITC, ब्रिटानिया, नेस्ले इंडिया, पेप्सिको इंडिया और हल्दीराम जैसी कंपनियां प्रभावित हो सकती हैं।

पाम ऑयल
पाम ऑयल - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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भारत में बिस्कुट, नमकीन और पैकेज्ड फूड महंगे होने का खतरा बढ़ सकता है। दुनिया के सबसे बड़े पाम तेल उत्पादक इंडोनेशिया में 2027 के दौरान उत्पादन 40 से 50 लाख टन तक घटने की आशंका है। वहीं, बायोडीजल बनाने में पाम तेल की खपत बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी सप्लाई और कीमतों पर दबाव पड़ सकता है। इसका सीधा असर भारत की उन खाद्य कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है, जो अपने उत्पाद बनाने में बड़े पैमाने पर पाम तेल का इस्तेमाल करती हैं। दिवाली के दौरान बढ़ती मांग के बीच कंपनियों के सामने अब अगले साल के लिए तेल की खरीद और बढ़ती लागत को संभालने की चुनौती है।

इंडोनेशियाई पाम ऑयल एसोसिएशन (GAPKI) के डॉ. मोहम्मद फाधिल हसन के मुताबिक, अल नीनो से जुड़ी मौसमी गड़बड़ियां होने पर 2027 में इंडोनेशिया का पाम तेल उत्पादन 40 से 50 लाख टन तक घट सकता है। वहीं, देश में B50 बायोडीजल कार्यक्रम पूरी तरह लागू होने पर घरेलू खपत करीब 20 लाख टन और बढ़ सकती है। इससे निर्यात के लिए उपलब्ध पाम तेल की मात्रा घटने और अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ने की आशंका है।

भारत की खाद्य कंपनियों पर क्यों पड़ेगा असर?
पाम तेल का इस्तेमाल बिस्कुट, नमकीन, बेकरी उत्पाद, मिठाई, कन्फेक्शनरी और तले हुए खाद्य पदार्थ बनाने में बड़े पैमाने पर होता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत बढ़ने से खाद्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। इसका असर कंपनियों के मुनाफे पर पड़ सकता है। कंपनियां बढ़ी हुई लागत का कितना बोझ खुद उठाती हैं और कितना ग्राहकों पर डालती हैं, यह उनकी खरीद व्यवस्था, उत्पादों और बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा।

खाद्य तेल के कारोबार से जुड़ी कंपनियां AWL एग्री बिजनेस, पतंजलि फूड्स, बंज और ADM एग्रो इंडस्ट्रीज भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलावों से प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे में भारतीय कंपनियों के सामने अगले साल की जरूरत के लिए पहले से तेल खरीदने या कीमतों में संभावित गिरावट का इंतजार करने का विकल्प होगा।

कीमतें बढ़ेंगी, लेकिन तेजी कितनी होगी?
गोदरेज इंटरनेशनल के निदेशक दोराब मिस्त्री ने मुंबई में आयोजित GLOBOIL India 2026 सम्मेलन में कहा कि 2027 में पाम तेल की कीमतों को लेकर रुख तेजी का है, लेकिन बहुत बड़ी तेजी की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। उनके मुताबिक, कीमतें ज्यादा होने पर खपत घट सकती है। इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर की मजबूती भी कमोडिटी बाजारों में तेजी को सीमित कर सकती है।

पतंजलि फूड्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजीव अस्थाना ने बिजनेसलाइन से कहा कि खाद्य तेल की बढ़ती कीमतें FMCG कंपनियों के मुनाफे के लिए चिंता का विषय हैं। उन्होंने बताया कि पतंजलि की एक विशेष टीम तेल की खरीद और कीमतों से जुड़े जोखिमों पर नजर रखती है। हालांकि, व्यापक बाजार की स्थिति पर लगातार निगरानी रखने की जरूरत है।

यूरोप की मांग से भी बदल सकता है बाजार
इंडोनेशिया और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार व्यवस्था में बदलाव भी पाम तेल की वैश्विक सप्लाई को प्रभावित कर सकता है। GAPKI के मुताबिक, यूरोप को इंडोनेशिया से सालाना 19 लाख टन कच्चे और प्रसंस्कृत पाम तेल का शुरुआती तरजीही कोटा देने का प्रस्ताव है। इसके बाद नौ वर्षों तक कोटे में हर साल 3 फीसदी की बढ़ोतरी का प्रावधान है।

यह व्यवस्था लागू होने और स्थिरता से जुड़ी शर्तें पूरी होने पर निर्भर करेगी। इससे यूरोपीय खरीदारों को इंडोनेशियाई पाम तेल की आपूर्ति तक बेहतर पहुंच मिल सकती है। हालांकि, इससे भारत के लिए उपलब्ध तेल घटेगा या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

खाद्य तेल और बायोडीजल के बीच बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा
पाम तेल उत्पादक देशों की परिषद (CPOPC) ने भारत के साथ सहयोग बढ़ाने की जरूरत बताई है। परिषद की महासचिव इज्जाना सालेह के मुताबिक, भारत पाम तेल उत्पादक देशों के लिए केवल निर्यात बाजार नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा और मजबूत आपूर्ति व्यवस्था में अहम साझेदार है।

परिषद की उप महासचिव डॉ. मुस्दालिफाह मचमुद ने कहा कि खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा दोनों जरूरी हैं। लेकिन बायोडीजल से जुड़ी नीतियों में बदलाव के बारे में पारदर्शिता होनी चाहिए, ताकि भारतीय खरीदार पहले से अपनी खरीद की योजना बना सकें।

CPOPC के अनुसार, उसके सदस्य देशों का संयुक्त पाम तेल उत्पादन 2021 में करीब 6.6 करोड़ टन से बढ़कर 2025 में 7.3 करोड़ टन हो गया। भविष्य में उत्पादन बढ़ाने के लिए पुराने बागानों में दोबारा पौधरोपण, बेहतर पैदावार और छोटे किसानों की उत्पादकता बढ़ाना अहम होगा।

भारत के सामने क्या है चुनौती?
भारतीय खरीदार अगले साल की जरूरत के लिए दूसरे खाद्य तेलों के विकल्प तलाश रहे हैं और खरीद समझौतों पर बातचीत कर रहे हैं। फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता त्योहारों के दौरान मांग पूरी करना है, लेकिन कंपनियों को 2027 की सप्लाई और कीमतों का जोखिम भी ध्यान में रखना होगा।

अगर इंडोनेशिया में उत्पादन घटता है और बायोडीजल के लिए घरेलू खपत बढ़ती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम तेल की उपलब्धता पर दबाव पड़ सकता है। हालांकि, कमजोर वैश्विक मांग और दूसरे खाद्य तेलों के विकल्प कीमतों में तेजी को सीमित कर सकते हैं। इसलिए भारतीय कंपनियों के लिए चुनौती यह होगी कि वे समय रहते पर्याप्त तेल खरीदें, लेकिन जल्दबाजी में महंगी खरीद से भी बचें।
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